Newstrack Special: 30 साल की जिंदगी भूल गई महिला, Kim Denicola की याददाश्त का रहस्य

Kim Denicola Memory Loss: किम डेनिकोला 2018 में अस्पताल में होश में आईं तो उन्हें अपनी जिंदगी के करीब 30 साल याद नहीं थे।

Neel Mani Lal
Published on: 6 Sept 2026 7:24 PM IST
Kim Denicola Memory Loss Explained in Hindi
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 Kim Denicola Memory Loss Explained in Hindi

Kim Denicola Memory Loss: कल्पना कीजिए - आप सुबह उठें और अचानक आपको लगे कि आप आज भी 18 साल के हैं। आपको अपना स्कूल याद है, अपने माता-पिता याद हैं, उस समय की दुनिया याद है, लेकिन उसके बाद की जिंदगी जैसे किसी ने आपकी यादों से काटकर निकाल दी हो। आपको यह भी याद नहीं कि आपकी शादी हुई, आपके बच्चे हुए या आपने पिछले कई दशकों में क्या-क्या किया। अमेरिका की किम डेनिकोला के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था। 2018 में वह 56 साल की थीं। एक दिन उन्हें तेज सिरदर्द हुआ। वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं और वहां बेहोश हो गईं। जब आंख खुली तो उनके लिए दुनिया बदल चुकी थी। उन्हें लग रहा था कि समय 1980 के आसपास है और वह अभी किशोरावस्था में हैं। उन्हें यह तक मालूम नहीं था कि अमेरिका में कई राष्ट्रपति बदल चुके हैं, कंप्यूटर और मोबाइल फोन आम जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं और उनकी अपनी जिंदगी में शादी, बच्चे और नाती-पोते जैसी पूरी एक दुनिया आ चुकी है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि सामने खड़ा उनका पति उन्हें बिल्कुल अजनबी लग रहा था।

अस्पताल में आंख खुली तो उन्हें लगा, साल 1980 है

किम को उस दिन क्या हुआ, इसकी शुरुआत तेज सिरदर्द से हुई। 2018 में वह चर्च की एक गतिविधि में थीं, तभी उन्हें बहुत तेज सिरदर्द और देखने में परेशानी महसूस हुई। बाद में वह बेहोश हो गईं और अस्पताल ले जाया गया। जब उन्हें होश आया तो नर्स ने उनसे कुछ सामान्य सवाल पूछे। नर्स ने पूछा कि अभी कौन सा साल चल रहा है। किम ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, 1980। जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका के राष्ट्रपति कौन हैं, तो उन्होंने रोनाल्ड रीगन का नाम लिया, जो 1980 के दशक में अमेरिका के राष्ट्रपति थे। उनके लिए उसके बाद का समय जैसे हुआ ही नहीं था। उनकी याद उस दौर में जाकर रुक गई थी जब वह करीब 18 साल की थीं। लेकिन असली झटका तब लगा जब उनका पति अस्पताल में उनसे मिलने आया। किम उसे पहचान नहीं पाईं।

वह व्यक्ति उनके सामने खड़ा था, लेकिन उनके दिमाग में उससे जुड़ी कोई याद मौजूद नहीं थी। उन्हें बाद में बताया गया कि यह वही व्यक्ति है जिससे उन्होंने शादी की थी और जिसके साथ वह कई साल से रह रही थीं।

उन्हें अपने बच्चों के बारे में भी याद नहीं था। नाती-पोतों की बात तो और भी अविश्वसनीय लगती थी। जिस महिला को लगता था कि वह अभी स्कूल से निकलकर जीवन की शुरुआत करने वाली है, वह वास्तव में 56 साल की दादी बन चुकी थी।

पूरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गायब था

आमतौर पर हम जब याददाश्त जाने की बात सुनते हैं तो सोचते हैं कि व्यक्ति कुछ बातें भूल गया होगा। किसी का नाम याद नहीं, कल क्या हुआ याद नहीं या किसी घटना की जानकारी दिमाग से निकल गई। किम का मामला इससे बिल्कुल अलग था। उनकी याददाश्त में करीब तीन दशक का एक बड़ा खाली हिस्सा बन गया था। उन्हें अपने बचपन और स्कूल के दिनों की बातें याद थीं, लेकिन उसके बाद की जिंदगी जैसे किसी और की कहानी हो।

उन्हें आधुनिक कंप्यूटरों की जानकारी नहीं थी। स्मार्ट फोन और स्मार्ट टीवी जैसी चीजें उनके लिए नई थीं। दुनिया में तकनीक कितनी बदल चुकी है, यह समझना भी उनके लिए आसान नहीं था। उन्हें यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी जिंदगी में इतने साल बीत चुके हैं।

लेकिन सबसे दर्दनाक हिस्सा अपने परिवार को दोबारा जानना था।

डॉक्टरों को भी समझ नहीं आया कि ऐसा हुआ क्यों

किम की जांच की गई। उनके दिमाग की तस्वीरें ली गईं और कई परीक्षण किए गए। लेकिन डॉक्टरों को ऐसा कोई साफ कारण नहीं मिला जिससे यह समझाया जा सके कि उनकी जिंदगी के इतने साल अचानक याददाश्त से कैसे गायब हो गए। डॉक्टरों ने इसे ट्रांजिएंट ग्लोबल एम्नेशिया, यानी अचानक होने वाली व्यापक भूलने की स्थिति, से जोड़ा। लेकिन किम का मामला सामान्य मामलों से बहुत अलग था। इस स्थिति में आम तौर पर व्यक्ति अचानक कुछ समय के लिए नई बातें याद रखने में असमर्थ हो जाता है और घटना खत्म होने के बाद उसकी याददाश्त वापस आ जाती है। किम में समस्या बहुत लंबे समय तक बनी रही और उनकी पुरानी जिंदगी के करीब तीन दशक की यादें वापस नहीं आईं। उनके डॉक्टर ने भी उस समय इसे बेहद असामान्य मामला बताया था। यानी डॉक्टरों के पास एक नाम था, लेकिन इस खास मामले की पूरी वजह का जवाब नहीं था।

क्या तेज सिरदर्द ने याददाश्त मिटा दी थी?

तेज सिरदर्द इस घटना से पहले जरूर हुआ था, लेकिन डॉक्टर यह साबित नहीं कर सके कि सिरदर्द ही उनकी स्मृति खोने का कारण था। कुछ मामलों में अचानक याददाश्त की समस्या तेज सिरदर्द या माइग्रेन जैसी स्थितियों के साथ देखी जा सकती है, लेकिन किम के मामले में इतने लंबे समय की स्मृति खोने की निश्चित वजह नहीं मिली। यही इस घटना को इतना रहस्यमय बनाता है। अगर दिमाग में साफ चोट होती, खून का रिसाव होता या कोई बड़ी बीमारी दिखाई देती, तो डॉक्टरों के पास कम से कम एक ठोस कारण होता। लेकिन उपलब्ध जांचों में ऐसा स्पष्ट कारण नहीं मिला।

क्या सच में इंसान 30 साल की याद एक साथ खो सकता है?

किम डेनिकोला का मामला वास्तविक और चिकित्सकीय रूप से दर्ज घटना है, लेकिन इसे यह समझने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि इंसान सामान्य तौर पर एक बटन दबने की तरह 30 साल की सारी यादें मिटा सकता है। याददाश्त कोई एक जगह रखा हुआ वीडियो रिकॉर्ड नहीं है। दिमाग में अलग-अलग तरह की यादों के लिए अलग-अलग तंत्र काम करते हैं। किसी घटना को याद रखना, किसी व्यक्ति को पहचानना, रास्ता याद रखना, भाषा बोलना या कोई सीखा हुआ काम करना, इन सबकी स्मृति एक जैसी नहीं होती।

इसीलिए दिमाग की कुछ स्थितियों में व्यक्ति नई जानकारी याद नहीं रख पाता, जबकि पुरानी बातें याद रहती हैं। किसी और स्थिति में पुरानी घटनाओं की याद कमजोर हो सकती है, जबकि नई जानकारी सीखने की क्षमता काफी हद तक बची रहती है। किम का मामला इसलिए असाधारण था क्योंकि उनकी पुरानी जिंदगी के एक लंबे दौर से जुड़ी आत्मकथात्मक यादें बहुत बड़े पैमाने पर गायब हो गई थीं।

याददाश्त वास्तव में होती क्या है?

हम अक्सर कहते हैं कि कोई याद हमारे दिमाग में रखी हुई है। लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से मामला इससे कहीं ज्यादा जटिल है। जब हमारे साथ कोई घटना होती है तो दिमाग उस अनुभव को अलग-अलग हिस्सों में दर्ज करता है। इसमें जगह, चेहरा, आवाज, भावना और घटना का क्रम सब शामिल हो सकते हैं। बाद में जब हम उस घटना को याद करते हैं तो दिमाग उन हिस्सों को फिर से जोड़ता है। यानी याददाश्त किसी अलमारी में रखी तस्वीर नहीं है जिसे जरूरत पड़ने पर निकाल लिया जाए। उसे हर बार कुछ हद तक दोबारा बनाया जाता है। इसीलिए याददाश्त कमजोर भी पड़ सकती है और बदल भी सकती है। कुछ यादें समय के साथ धुंधली होती जाती हैं। कुछ में दूसरे अनुभवों की बातें जुड़ सकती हैं। और कुछ मामलों में बीमारी या दिमाग को हुई क्षति के कारण याददाश्त का पूरा तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

चिकित्सा विज्ञान में ऐसे कई मामले दर्ज हैं जिनमें लोगों को लंबे समय तक पुरानी घटनाएं याद नहीं रहीं। एक प्रसिद्ध अध्ययन में ऐसे मरीज का भी वर्णन है जिसकी पुरानी सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी कई दशकों की याददाश्त प्रभावित थी, जबकि नई जानकारी सीखने की उसकी क्षमता अपेक्षाकृत ठीक थी।

लेकिन किम की याद वापस क्यों नहीं आई?

यह इस कहानी का सबसे दुखद हिस्सा है। 2018 में घटना के बाद कई महीनों तक किम को उम्मीद थी कि धीरे-धीरे उनकी पुरानी यादें लौट आएंगी। परिवार ने पुरानी तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने अपने पुराने जीवन को समझने की कोशिश की। उन्होंने अपनी पुरानी डायरी पढ़नी शुरू की, जिसमें उनके जीवन की घटनाएं लिखी थीं। लेकिन एक अजीब अनुभव हुआ।

डायरी में लिखी घटनाएं उनके लिए ऐसी थीं जैसे किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी पढ़ रही हों। वह जानती थीं कि ये बातें उनकी अपनी जिंदगी की हैं। उन्हें यह भी मालूम था कि डायरी उन्होंने ही लिखी होगी। लेकिन उन घटनाओं की अंदर से कोई याद उनके पास नहीं थी। यानी उनके पास अपनी जिंदगी का लिखित इतिहास था, लेकिन उस इतिहास से जुड़ी अपनी यादें नहीं थीं।

पांच साल बाद भी जिंदगी का वह हिस्सा खाली था

2023 में, घटना के करीब पांच साल बाद, किम ने अपनी स्थिति के बारे में फिर बताया। तब भी उनके मुताबिक उन खोई हुई यादों का बड़ा हिस्सा वापस नहीं आया था।

डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि अगर इतने लंबे समय में यादें वापस नहीं आईं तो उनके लौटने की संभावना कम हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि डॉक्टरों के पास कोई निश्चित समय सीमा होती है जिसके बाद याददाश्त हमेशा के लिए खत्म मान ली जाए। बल्कि किम के असामान्य मामले में इतने लंबे समय तक सुधार न होना चिंता की बात थी।

इस बीच किम ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने खोई हुई जिंदगी को वापस पाने की कोशिश के साथ-साथ नई जिंदगी को समझना शुरू किया। उन्होंने अपने परिवार को फिर से जाना। बच्चों और नाती-पोतों के साथ नए रिश्ते बनाने की कोशिश की। नई चीजें सीखीं और उन चीजों में दिलचस्पी ली जो उनके लिए कभी बिल्कुल अनजानी थीं। उनकी बातों में इस पूरे अनुभव का सबसे मानवीय पहलू दिखाई देता है। उनका कहना था कि अगर पुरानी यादें वापस नहीं भी आतीं तो नई यादें बनाई जा सकती हैं।

क्या यह बीमारी दोबारा किसी के साथ हो सकती है?

अचानक होने वाली याददाश्त की समस्या के कई कारण हो सकते हैं और हर घटना को एक ही बीमारी का नाम देना सही नहीं है। अचानक कुछ समय के लिए नई चीजें याद न रहना, पुरानी जिंदगी भूल जाना और अपनी पहचान तक भूल जाना, इन सभी स्थितियों के कारण अलग हो सकते हैं।

इसीलिए किसी व्यक्ति को अचानक याददाश्त में बड़ा बदलाव महसूस हो तो इसे सिर्फ तनाव या सामान्य भूलने की समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। अचानक याददाश्त खोना कभी-कभी दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है और ऐसे में तुरंत चिकित्सा जांच जरूरी होती है। किम की कहानी से सबसे महत्वपूर्ण बात यही निकलती है कि याददाश्त जितनी सामान्य चीज हमें लगती है, वास्तव में उतनी सरल नहीं है।

क्या किम सच में अपनी जिंदगी भूल गई थीं?

उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि किम ने अपनी जिंदगी के करीब तीन दशक से जुड़ी गंभीर और व्यापक याददाश्त की कमी का अनुभव किया था और डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को एक असामान्य प्रकार की व्यापक स्मृति हानि के रूप में दर्ज किया था। लेकिन यह कहना कि वैज्ञानिकों ने निश्चित रूप से साबित कर दिया था कि उनकी पूरी 30 साल की स्मृति एक ही बार में मिट गई, थोड़ा ज्यादा दावा होगा।

इस घटना की सबसे ईमानदार व्याख्या यही है कि किम के साथ अचानक और बेहद असामान्य स्मृति हानि हुई, लेकिन उसके पीछे का पूरा कारण डॉक्टर आज तक स्पष्ट नहीं कर पाए। और शायद इसी वजह से यह कहानी इतनी रहस्यमय लगती है।

सबसे बड़ा सवाल आखिर यही है

हम अपनी जिंदगी को घटनाओं की एक लंबी कहानी मानते हैं। बचपन, स्कूल, पहली नौकरी, शादी, बच्चे, दोस्त, यात्राएं, खुशियां, दुख, रिश्ते और हजारों छोटे-बड़े पल। हमें लगता है कि ये सब हमारे भीतर सुरक्षित हैं और जरूरत पड़ने पर हम उन्हें याद कर सकते हैं।

लेकिन किम डेनिकोला का मामला दिखाता है कि ऐसा हमेशा नहीं होता। एक इंसान अपने सामने खड़े पति को देख सकता है और उसके साथ बिताए वर्षों की एक भी तस्वीर उसके दिमाग में न हो। अपने बच्चों को देखकर उसे यह मालूम हो सकता है कि वे उसके बच्चे हैं, लेकिन उनके साथ बिताया बचपन याद न हो। अपनी ही डायरी पढ़कर उसे लग सकता है कि वह किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी के बारे में पढ़ रही है। याददाश्त चली जाए तो सिर्फ अतीत नहीं जाता। अतीत से जुड़ी हमारी पहचान का एक हिस्सा भी कमजोर पड़ जाता है।

किम के पास एक विकल्प था। वह उन खोए हुए वर्षों को वापस पाने का इंतजार करती रहतीं। लेकिन उन्होंने कहा, अगर पुरानी यादें वापस नहीं आतीं तो नई यादें बनाई जा सकती हैं। शायद इस पूरी कहानी का सबसे गहरा रहस्य यही नहीं है कि इंसान 30 साल कैसे भूल सकता है। असली सवाल यह है कि जब अतीत हमारा साथ छोड़ दे, तब क्या हम नए सिरे से अपनी जिंदगी बना सकते हैं? किम डेनिकोला की कहानी का जवाब है, शायद हां।

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