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सुबह की लार सेहत के लिए वरदान...रोगों का है रामबाण, घाव से लेकर आंखों की समस्याओं के लिए अमृत समान
Morning Saliva Benefits: सुबह की लार आयुर्वेद में अमृत समान मानी जाती है, जो त्वचा, आंखों और घावों के इलाज में प्राकृतिक और असरदार उपाय है।
Morning Saliva Benefits
Morning Saliva Benefits: हम दाग-धब्बे, झाइयां और डार्क सर्कल्स जैसी त्वचा की समस्याओं से निजात पाने के लिए महंगे क्रीम और दवाइयों पर खर्च करते हैं। लेकिन आयुर्वेद में एक प्राकृतिक और मुफ्त उपाय बताया गया है-मुंह में बनने वाली लार। आयुर्वेदाचार्य इसे शरीर की सबसे शक्तिशाली औषधि मानते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठते ही मुंह में जो लार बनती है, उसे थूकना नहीं चाहिए। इसमें शरीर के लिए जरूरी 18 तरह के पोषक तत्व होते हैं। यह लार पुराने घाव, गैंग्रीन, एक्जिमा, सोरायसिस और त्वचा के दाग-धब्बों को ठीक करने में मदद कर सकती है। जो घाव महीनों तक दवाओं से ठीक नहीं हो रहे, उन पर रोज सुबह लार लगाने से सुधार देखा जा सकता है।
आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी
सिर्फ त्वचा ही नहीं, बल्कि आंखों के लिए भी सुबह की लार चमत्कारिक है। इसे आंखों में लगाने से रोशनी बढ़ती है, लाल आंखें 24 घंटे में ठीक हो जाती हैं, और आंखों के नीचे काले घेरे धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं। ध्यान रखें कि सुबह उठने के लगभग 48 मिनट बाद लार की क्षारीयता कम हो जाती है, इसलिए जल्दी इसका उपयोग करना लाभकारी होता है।
लार का सर्वोत्तम समय और उपयोग
आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 5 बजे) में बनने वाली लार को अमृत माना गया है। इसका पीएच लेवल लगभग 8.4 होता है, जो इसे क्षारीय और औषधीय गुणों से भरपूर बनाता है।
लार की गुणवत्ता कैसे बनाए रखें
डॉक्टर्स बताते हैं कि आधुनिक टूथपेस्ट में मौजूद सोडियम लॉरेल सल्फेट लार बनाने वाली ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाता है। नीम की दातून चबाना और उस दौरान बनने वाली लार का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। पान खाने वाले लोग बिना कत्था, सुपारी और तंबाकू वाला देशी हरा पान खा सकते हैं। इसमें सौंफ, अजवाइन, लौंग, इलायची, गुलकंद और चूना मिलाकर खाने से लार थूकने की जरूरत नहीं पड़ती और यह शरीर के तीनों दोष – कफ, पित्त और वात – को संतुलित करता है।


