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Oral Cancer: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा, मुंह के इन संकेतों को भूलकर भी न करें अनदेखा
Oral Cancer: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में दिखने वाले कुछ सामान्य लक्षण कई बार ओरल कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
Oral Cancer: तेजी से बदलती जीवनशैली, धूम्रपान और वेपिंग की बढ़ती आदतों के बीच ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) तेजी से गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 25 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में दिखने वाले कुछ सामान्य लक्षण कई बार ओरल कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं ओरल कैंसर के मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू चबाना, सिगरेट और बीड़ी पीना, वेपिंग, शराब का अत्यधिक सेवन और खराब ओरल हाइजीन ओरल कैंसर के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी भी चिंता का विषय है। कई लोग मुंह के छालों या मसूड़ों से खून आने जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है।
मुंह के इन संकेतों को बिल्कुल अनदेखा न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि मुंह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इसके अलावा मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना, चबाने में दर्द होना, मुंह में गांठ या सूजन महसूस होना, दांतों का ढीला पड़ना, निगलने या बोलने में परेशानी होना, लगातार मुंह से दुर्गंध आना या किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस होना भी ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
विशेष रूप से तंबाकू और धूम्रपान करने वाले लोगों को ऐसे लक्षणों को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
क्या हर मुंह का छाला कैंसर होता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर मुंह का छाला कैंसर का संकेत नहीं होता। सामान्य छाले आमतौर पर तीन से चार दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि छाला लगातार बना रहे, आकार में बढ़े, उसमें दर्द हो, खून निकलने लगे या खाने-पीने और बोलने में परेशानी होने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। यदि इसके साथ सफेद या लाल धब्बे भी दिखाई दें, तो जांच में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।
कम उम्र के लोग भी हो रहे हैं शिकार
कुछ वर्ष पहले तक ओरल कैंसर के अधिकांश मरीज 50 से 75 वर्ष की आयु वर्ग के होते थे, लेकिन अब युवाओं में भी इसके मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वेपिंग, तंबाकू उत्पादों का बढ़ता उपयोग और अस्वस्थ जीवनशैली इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं। इसलिए युवाओं को अपनी आदतों में सुधार करने और नियमित ओरल हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी जा रही है।
वक़्त पर पहचान से बच सकती है जान
डॉक्टरों का कहना है कि यदि ओरल कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इलाज के परिणाम काफी बेहतर होते हैं। शुरुआती अवस्था में उपचार कराने वाले मरीजों के ठीक होने की संभावना 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इसलिए मुंह से जुड़ी किसी भी असामान्य समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।


