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Patient Navigator: सरकारी अस्पताल में अब नहीं भटकेंगे मरीज, पर्ची से दवा तक साथ रहेगा ‘पेशेंट नेवीगेटर’
Patient Navigator व्यवस्था से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्ची, डॉक्टर, जांच और दवा तक हर चरण में मार्गदर्शन मिलेगा। चुनिंदा अस्पतालों में इसका पायलट ट्रायल होगा।
Patient Navigator: Delhi Hospitals to Guide Patients From Registration to Medicines
Patient Navigator:सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाना कई मरीजों के लिए बीमारी से कम और व्यवस्था समझने से ज्यादा बड़ी चुनौती बन जाता है। पर्ची कहां बनेगी, डॉक्टर का कमरा किस तरफ है, जांच किस विभाग में होगी और रिपोर्ट दिखाने के बाद अगला कदम क्या होगा इन सवालों के जवाब तलाशते हुए मरीज और उनके परिजन कई बार अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों के चक्कर लगाते हैं। अब दिल्ली में इसी परेशानी को कम करने के लिए ‘पेशेंट नेवीगेटर’ व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। इसका शुरुआती ट्रायल चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा।
क्या है पेशेंट नेवीगेटर व्यवस्था
पेशेंट नेवीगेटर को आसान भाषा में अस्पताल के अंदर मरीज का ‘गाइड’ कहा जा सकता है। इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ या वॉलंटियर मरीजों को अस्पताल की प्रक्रिया समझाने और सही जगह तक पहुंचाने में मदद करेंगे। यानी मरीज को सिर्फ यह बताने के बजाय कि अगला काउंटर कहां है, पूरी इलाज प्रक्रिया में कदम-दर-कदम मार्गदर्शन देने की कोशिश होगी। मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद रजिस्ट्रेशन या पर्ची बनवाने से लेकर संबंधित डॉक्टर के पास जाने, जांच कराने और दवा लेने तक अलग-अलग चरणों में मदद मिल सकेगी। अगर डॉक्टर किसी दूसरे विभाग में रेफर करते हैं, तो वहां पहुंचने में भी नेवीगेटर मार्गदर्शन कर सकते हैं।
दिल्ली के चुनिंदा अस्पतालों से शुरू होगा ट्रायल
इस व्यवस्था को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किए जाने की बात सामने आई है। ट्रायल के लिए एलएनजेपी, जीबी पंत और जीटीबी जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों का उल्लेख किया गया है। इन अस्पतालों में व्यवस्था के काम करने के तरीके और मरीजों के अनुभव को देखा जाएगा। इसके बाद फीडबैक के आधार पर इसे दूसरे सरकारी अस्पतालों तक बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। दिल्ली सरकार की आधिकारिक सूची में एलएनजेपी, जीबी पंत और जीटीबी समेत बड़ी संख्या में सरकारी अस्पताल शामिल हैं।
मरीज के अस्पताल पहुंचते ही क्या होगा
मान लीजिए कोई व्यक्ति पहली बार किसी बड़े सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचता है। उसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर तलाशना पड़ सकता है। पर्ची बनने के बाद ओपीडी, डॉक्टर का कमरा, जांच केंद्र और फार्मेसी अलग-अलग जगह हो सकती है। ऐसे में नेवीगेटर मरीज को संबंधित स्थान तक पहुंचने में मदद करेगा।
डॉक्टर से परामर्श के बाद अगर ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, स्कैन या किसी दूसरे विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है, तो मरीज को अगली प्रक्रिया समझाने में भी यह व्यवस्था मदद कर सकती है। इसका उद्देश्य डॉक्टर का काम करना नहीं, बल्कि मरीज को अस्पताल की प्रक्रिया में रास्ता दिखाना है।
बुजुर्ग और अकेले आने वाले मरीजों को ज्यादा फायदा
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो सकता है जो अस्पताल की जटिल प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं। बुजुर्ग मरीज, अकेले इलाज कराने आने वाले लोग, दिव्यांग मरीज या पहली बार किसी बड़े अस्पताल में पहुंचने वाले मरीज अक्सर दिशा और प्रक्रिया को लेकर ज्यादा परेशान होते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में अस्पतालों को लेकर हुए एक हालिया सर्वे में भी मरीजों की गाइडेंस और इलाज के अगले चरण को लेकर परेशानी सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें डॉक्टर से मिलने के बाद अगले कदम के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
डिजिटल सिस्टम से भी जुड़ सकती है व्यवस्था
पेशेंट नेवीगेटर की व्यवस्था केवल स्टाफ तक सीमित रहने के बजाय डिजिटल सुविधाओं से भी जोड़ी जा सकती है। अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड, टोकन सिस्टम और डिजिटल जानकारी के जरिए मरीजों को अपनी बारी, विभाग और जरूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा सकती है।
दिल्ली के अस्पतालों में डिजिटल हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम के इस्तेमाल को भी बढ़ाया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्लेटफॉर्म को ओपीडी, कैजुअल्टी और आईपीडी रजिस्ट्रेशन जैसे मॉड्यूल के लिए अपनाने की जानकारी दी है और इसे अन्य सेवाओं तक बढ़ाने की प्रक्रिया बताई है।
मकसद सिर्फ रास्ता दिखाना नहीं, इलाज की प्रक्रिया आसान बनाना
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण डॉक्टरों और कर्मचारियों पर भी दबाव रहता है। ऐसे में मरीजों को सही दिशा-निर्देश मिलना व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों ने भी अस्पतालों में स्पष्ट साइन बोर्ड और बेहतर मरीज मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया है।
अगर दिल्ली का यह पायलट सफल रहता है, तो इसका फायदा सिर्फ अस्पताल के अंदर रास्ता तलाशने तक सीमित नहीं रहेगा। मरीज को यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि इलाज की शुरुआत कहां से करनी है और डॉक्टर की सलाह के बाद अगला कदम क्या होगा। यही वजह है कि पेशेंट नेवीगेटर व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में मरीजों के अनुभव को बदलने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।


