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हर बार वजन बढ़ना और बाल झड़ना पीसीओएस नहीं: थायरॉइड व पोषण की कमी भी हो सकती है वजह, सेल्फ-डायग्नोसिस से बचें
Hormonal Imbalance: वजन बढ़ना, बाल झड़ना या अनियमित पीरियड्स को हर बार PCOS न समझें। विशेषज्ञों के अनुसार, ये थायरॉइड, पोषण की कमी या अन्य हार्मोनल समस्याओं के संकेत भी हो सकते हैं।
Hormonal Imbalance
Hormonal Imbalance: आधुनिक और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अमूमन वजन बढ़ने, अत्यधिक बाल झड़ने या माहवारी (पीरियड्स) के अनियमित होने पर महिलाएं इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर इसे सीधे 'पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम' (PCOS) मान बैठती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह 'सेल्फ-डायग्नोसिस' खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ये संकेत शरीर में पोषण की कमी, थायरॉइड विकार या अन्य गंभीर हार्मोनल गड़बड़ियों के भी हो सकते हैं।
बिना चिकित्सकीय सलाह के न तय करें बीमारी
केजीएमयू के क्वीन मैरी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पलता शंखवार का कहना है कि हर महिला की शारीरिक स्थिति और उम्र भिन्न होती है। इसलिए बिना जांच के खुद से निष्कर्ष निकालना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। लक्षणों को नजरअंदाज करने या गलत उपचार लेने से भविष्य में इनफर्टिलिटी (बांझपन), मेटाबॉलिक सिंड्रोम, टाइप-2 डायबिटीज और स्थायी मासिक धर्म विकारों का खतरा बढ़ जाता है। सही समय पर डॉक्टर से परामर्श कर पैथोलॉजिकल जांच कराना ही समाधान है।
लक्षण एक, कारण अनेक: ऐसे समझें अंतर
थायरॉइड डिसऑर्डर (हाइपोथायरायडिज्म): त्वचा में अत्यधिक रूखापन, कब्ज, अचानक वजन बढ़ना और बालों का तेजी से गिरना।
प्रोलैक्टिन हार्मोन का उच्च स्तर (हाइपरप्रोलैक्टिनीमिया): बिना गर्भावस्था के स्तनों से स्राव (गैलेक्टोरिया), लगातार सिरदर्द और दृष्टि (आईसाइट) से जुड़ी समस्याएं।
एंड्रोजन हार्मोन (पुरुष हार्मोन) का बढ़ना: चेहरे और शरीर पर अनचाहे मोटे बाल (हर्सुटिज्म), गंभीर मुहांसे और सिर के बालों का तेजी से पतला होना।
आयरन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी: अत्यधिक थकान, हीमोग्लोबिन घटने से बाल झड़ना और माहवारी के दौरान असामान्य रक्तस्राव।
प्रीमैच्योर ओवेरियन इंसफिशिएंसी (कम उम्र में ओवरी की शिथिलता): माहवारी चक्र में रुकावट और योनि में सूखापन।
क्रॉनिक स्ट्रेस और अनियंत्रित दिनचर्या: अत्यधिक मानसिक तनाव से हार्मोन चक्र का टूटना और माहवारी का कई-कई हफ्तों तक टल जाना।
हार्मोनल संतुलन के लिए जरूरी सावधानियां
संतुलित पोषण: आहार में प्रोटीन, आयरन, हरी पत्तेदार सब्जियां और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शामिल करें।
वजन प्रबंधन: क्रैश डाइट के जरिए अचानक वजन घटाने के बजाय नियमित व्यायाम और योग अपनाएं।
नींद और तनाव प्रबंधन: रोजाना 7-8 घंटे की निर्बाध नींद लें और अत्यधिक मानसिक तनाव से बचें।
जांच जरूरी: पीरियड्स में किसी भी तरह का बदलाव दिखने पर उसे सामान्य न समझें और तुरंत विशेषज्ञ से हार्मोन प्रोफाइल व जरूरी टेस्ट करवाएं।


