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SGRT तकनीक पर KSSSCI का अध्ययन: आसान और आरामदायक हुई कैंसर की रेडिएशन थेरेपी
KSSSCI Lucknow: KSSSCI के अध्ययन में पेल्विक कैंसर के इलाज में SGRT तकनीक अधिक सटीक और आरामदायक पाई गई। 100 मरीजों के 2,376 रेडिएशन सत्रों में मास्क-टैटू की जरूरत खत्म होने से इलाज का समय भी घटा।
KSSSCI Lucknow
KSSSCI Lucknow: पेल्विक कैंसर (गर्भाशय, मलाशय और प्रोस्टेट कैंसर) से जूझ रहे मरीजों के लिए रेडिएशन थेरेपी (सिंकाई) की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सुगम, सटीक और तनावमुक्त हो गई है। कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान (KSSSCI) के विशेषज्ञों ने आधुनिक सरफेस-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (SGRT) तकनीक पर एक विस्तृत अध्ययन कर यह साबित किया है कि अब मरीजों को सिंकाई के दौरान भारी थर्मोप्लास्टिक मास्क से जकड़ने या शरीर पर जीवनभर रहने वाले काले-नीले टैटू के पक्के निशान बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता, डॉ. शरद सिंह, डॉ. रुमिता सिंह और सुमंत मन्ना की टीम द्वारा किया गया यह महत्वपूर्ण शोध हाल ही में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है। डॉक्टरों ने 100 मरीजों के कुल 2,376 रेडिएशन सत्रों का गहन विश्लेषण कर इस निष्कर्ष को प्रमाणित किया है।
पारंपरिक पद्धति की असहजताओं से मिली मुक्ति
पारंपरिक रेडियोथेरेपी में सिंकाई के दौरान मरीज के शरीर की स्थिति को स्थिर रखने के लिए थर्मोप्लास्टिक मास्क को ट्रीटमेंट टेबल से बेहद कसकर बांध दिया जाता था। इस कसी हुई अवस्था के चलते मरीजों के पेट, कमर और जांघों पर अत्यधिक दबाव पड़ता था, जिससे मांसपेशियों में अकड़न, घुटन और घबराहट (क्लॉस्ट्रोफोबिया) होने लगती थी। कई बार त्वचा से मास्क चिपकने के कारण पसीना, खिंचाव और गंभीर खुजली की समस्या भी होती थी। इसके अलावा, सही लोकेशन तय करने के लिए मरीज की त्वचा पर स्थायी स्याही से टैटू बनाए जाते थे, जो इलाज के बाद भी उम्रभर निशान के रूप में रह जाते थे।
SGRT तकनीक से समय की बचत और बेहतर सटीकता
नई एसजीआरटी तकनीक 3D कैमरा और एडवांस ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए काम करती है, जो मरीज की त्वचा की ऊपरी सतह की रीयल-टाइम मैपिंग करती है। इसके प्रमुख फायदे सामने आए हैं:
मास्क और टैटू से आजादी: चेहरे या निचले शरीर पर टाइट प्लास्टिक फ्रेम कसने और शरीर पर पक्के निशान गोदने की बाध्यता पूरी तरह खत्म हो गई है।
समय में भारी कमी: टेबल पर मरीज को लिटाने और मशीन को सटीक जगह पर सेट करने का समय औसतन 3.55 मिनट से घटकर मात्र 2.51 मिनट रह गया है।
मानसिक और शारीरिक आराम: मरीज बिना किसी घुटन, दर्द या तनाव के सहज स्थिति में लेटकर रेडिएशन थेरेपी प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक न केवल कैंसर पीड़ितों के इलाज के अनुभव को बेहतर बनाती है, बल्कि अस्पतालों में मरीजों के टर्न-अराउंड समय को घटाकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुविधाजनक भी बनाती है।


