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Pet Ki Charbi Kyon Badhti Hai: पेट की चर्बी सबसे पहले क्यों बढ़ती है और आखिर में क्यों जाती है?
Pet Ki Charbi Kyon Badhti Hai: पेट की चर्बी क्यों बढ़ती है और वजन घटाने पर भी सबसे आखिर में कम होती हुई क्यों दिखाई देती है?
Pet ki charbi kyon Badhti Hai Explained in Hindi
Pet Ki Charbi Kyon Badhti Hai: वजन बढ़ना शुरू हुआ तो सबसे पहले पेट और कमर फैलने लगी। वजन घटाने की कोशिश की तो चेहरा पतला हो गया, हाथ-पैर हल्के दिखाई देने लगे, लेकिन पेट वैसा ही बना रहा। यह अनुभव बहुत आम है। इसी से यह धारणा बनती है कि शरीर पेट की चर्बी को किसी ‘इमरजेंसी गोदाम’ की तरह बचाकर रखता है और बाकी सारी चर्बी खत्म होने के बाद ही पेट की चर्बी जलाता है। लेकिन असल विज्ञान इससे थोड़ा अलग है। हर व्यक्ति में पेट की चर्बी सबसे पहले नहीं बढ़ती और न ही हर व्यक्ति में यह सबसे आखिर में घटती है। शरीर में चर्बी कहां जमा होगी और वजन घटने पर कहां से कितनी तेजी से कम होगी, यह आनुवंशिकता, लिंग, उम्र, हार्मोन, तनाव, नींद, शरीर में मौजूद फैट सेल्स और उनके जैविक व्यवहार जैसी कई चीजों पर निर्भर करता है। फिर भी पुरुषों और उम्र बढ़ने के बाद बहुत-सी महिलाओं में पेट ऐसा क्षेत्र बन जाता है जहां चर्बी अपेक्षाकृत आसानी से जमा होती है और कमर का घेरा घटाना मुश्किल महसूस हो सकता है।
पेट की चर्बी आखिर होती कितने तरह की है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘पेट की चर्बी’ वास्तव में एक ही तरह की चर्बी नहीं है। पेट की त्वचा को पकड़ने पर जो मुलायम तह हाथ में आती है, वह मुख्य रूप से त्वचा के नीचे की चर्बी (subcutaneous fat) होती है। इसके अलावा पेट के भीतर आंतों, लिवर और दूसरे अंगों के आसपास जमा होने वाली आंतरिक चर्बी (visceral fat) होती है। दोनों का व्यवहार एक जैसा नहीं होता।
आंतरिक चर्बी स्वास्थ्य के लिहाज से खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और दूसरी मेटाबोलिज्म संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है। लेकिन यहां एक और बात है। वजन घटाते समय पेट के भीतर की यह आंतरिक चर्बी कई बार त्वचा के नीचे जमा पेट की चर्बी की तुलना में अपेक्षाकृत तेजी से कम हो सकती है। इसलिए यह कहना कि ‘पेट की सारी चर्बी सबसे आखिर में जाती है’, वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही नहीं है।
शरीर पेट में चर्बी जमा ही क्यों करता है?
हमारा शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को मुख्य रूप से फैट सेल्स (कोशिकाओं) में ट्राइग्लिसराइड (triglyceride) के रूप में जमा करता है। अगर लंबे समय तक भोजन से मिलने वाली ऊर्जा शरीर की जरूरत से ज्यादा रहती है तो अतिरिक्त ऊर्जा का कुछ हिस्सा फैट के रूप में जमा होने लगता है। लेकिन यह चर्बी शरीर के हर हिस्से में बराबर नहीं जमा होती।
किसी व्यक्ति के नितंब और जांघ पहले बढ़ सकते हैं, किसी की कमर, किसी का पेट और किसी के पूरे शरीर में चर्बी लगभग समान रूप से फैल सकती है। इसमें आनुवंशिकता की भूमिका काफी मजबूत होती है। अगर परिवार में पुरुषों के पेट के आसपास चर्बी जमा होने की प्रवृत्ति अधिक रही है तो अगली पीढ़ी में भी वैसी शारीरिक बनावट देखने को मिल सकती है।
महिलाओं में प्रजनन आयु के दौरान एस्ट्रोजन (estrogen) हार्मोन चर्बी को नितंब और जांघों के आसपास जमा होने की प्रवृत्ति से जुड़ा होता है। रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) के बाद हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में चर्बी का वितरण पेट की ओर अधिक हो सकता है। पुरुषों में सामान्यतः पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होने की प्रवृत्ति महिलाओं की तुलना में अधिक देखी जाती है।
इसलिए केवल ‘ज्यादा खाना’ यह तय नहीं करता कि चर्बी कहां जमा होगी। ज्यादा ऊर्जा कुल चर्बी बढ़ने की एक बड़ी वजह हो सकती है, लेकिन शरीर उस चर्बी को कहां रखेगा, इसमें आनुवंशिकता और हार्मोनल व्यवस्था की बड़ी भूमिका होती है।
पेट जल्दी निकला हुआ क्यों दिखाई देता है?
इसमें शरीर विज्ञान के साथ थोड़ी ज्यामिति भी काम करती है। पेट शरीर का केंद्रीय हिस्सा है। कमर के चारों ओर कुछ सेंटीमीटर अतिरिक्त चर्बी जमा होने पर शरीर की पूरी आकृति में बदलाव तुरंत दिखाई देने लगता है। इसके उलट उतनी ही चर्बी अगर जांघ, नितंब, पीठ और बांहों में अलग-अलग जगहों पर फैली हो तो बदलाव उतना अचानक दिखाई नहीं देता।
इसके अलावा पेट का आकार हमेशा केवल चर्बी की वजह से नहीं बढ़ता। खाना खाने के बाद आंतों में मौजूद भोजन, कब्ज, गैस, पेट फूलना और शरीर में पानी का अस्थायी बदलाव भी पेट को बड़ा दिखा सकता है। इसलिए अगर शाम को पेट सुबह से ज्यादा निकला हुआ दिखाई दे तो इसका मतलब यह नहीं कि कुछ घंटों में पेट पर नई चर्बी चढ़ गई। चर्बी में बदलाव आमतौर पर धीरे-धीरे होता है, जबकि पेट का फूलना कुछ घंटों में बदल सकता है।
इंसुलिन की पेट की चर्बी में क्या भूमिका है?
भोजन के बाद, खासकर कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से रक्त में ग्लूकोज बढ़ता है और पैंक्रियास इंसुलिन (insulin) छोड़ता है। इंसुलिन शरीर को उपलब्ध ऊर्जा के इस्तेमाल और उसके भंडारण में मदद करता है। यह कुछ समय के लिए फैट सेल्स से फैट मुक्त होने की प्रक्रिया को भी कम करता है।
लेकिन इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि ‘इंसुलिन ही पेट की चर्बी बनाता है, इसलिए इंसुलिन को रोक दीजिए और पेट खत्म हो जाएगा।’ यह विज्ञान का बहुत ज्यादा सरलीकरण है। इंसुलिन शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है, कोई दुश्मन नहीं। लंबे समय में शरीर का कुल ऊर्जा संतुलन महत्वपूर्ण रहता है। अगर लगातार शरीर की जरूरत से ज्यादा ऊर्जा मिलती है तो चर्बी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ पेट के भीतर जमा अधिक आंतरिक चर्बी खुद इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) और दूसरी चयापचय (metabolism) संबंधी गड़बड़ियों से जुड़ी हो सकती है। यानी इंसुलिन और पेट की चर्बी का रिश्ता एकतरफा नहीं है, बल्कि काफी जटिल है।
तनाव और कोर्टिसोल का पेट से क्या संबंध है?
पेट की चर्बी की चर्चा में कोर्टिसोल (cortisol) का नाम बहुत आता है। इसमें कुछ विज्ञान जरूर है, लेकिन इंटरनेट पर इसे कई बार जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। कोर्टिसोल तनाव की प्रतिक्रिया से जुड़ा जरूरी हार्मोन है। लंबे समय तक तनाव, खराब नींद और तनाव के कारण होने वाले व्यवहारिक बदलाव, जैसे ज्यादा खाना, मीठे या ज्यादा ऊर्जा वाले भोजन की इच्छा बढ़ना और शारीरिक गतिविधि कम होना, वजन और पेट की चर्बी को प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ बीमारी की स्थितियों, जैसे कुशिंग सिंड्रोम (Cushing syndrome) में शरीर के मध्य हिस्से में चर्बी बढ़ना देखा जाता है। लेकिन किसी व्यक्ति का पेट देखकर यह कहना कि ‘आपका कोर्टिसोल बढ़ा हुआ है’, वैज्ञानिक निदान नहीं है। तनाव महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन हर निकला हुआ पेट ‘कोर्टिसोल बेली’ नहीं होता।
वजन घटाते समय शरीर पेट की चर्बी को तुरंत क्यों नहीं घटाता?
आपने भोजन नियंत्रित किया, चलना शुरू किया, व्यायाम किया और शरीर ऊर्जा की कमी की स्थिति में पहुंच गया। अब शरीर को अपनी जमा ऊर्जा इस्तेमाल करनी होगी। वसा कोशिकाओं में जमा ट्राइग्लिसराइड टूटकर फैटी एसिड (fatty acids) और ग्लिसरॉल के रूप में उपलब्ध होने लगता है, जिन्हें शरीर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
लेकिन हम शरीर को यह आदेश नहीं दे सकते कि ‘आज सिर्फ नाभि के नीचे जमा चर्बी इस्तेमाल करो।’ अलग-अलग हिस्सों की वसा कोशिकाओं पर हार्मोन के संकेत ग्रहण करने वाले ग्राही (receptors) अलग संख्या और संवेदनशीलता के साथ मौजूद होते हैं। रक्त प्रवाह भी अलग-अलग वसा क्षेत्रों में अलग हो सकता है। इसलिए कुछ हिस्सों की चर्बी ऊर्जा की जरूरत के समय अपेक्षाकृत आसानी से मुक्त होती है, जबकि कुछ हिस्सों की चर्बी ज्यादा ‘जिद्दी’ लगती है।
यही कारण है कि शरीर के दो अलग हिस्सों में जमा चर्बी समान मात्रा में होने के बावजूद वजन घटाते समय दोनों एक जैसी गति से कम नहीं होतीं।
क्या पेट की कसरत से पेट की चर्बी जलती है?
यही सबसे बड़ा भ्रम है। अगर आप रोज 500 क्रंच या सिट-अप करते हैं तो पेट की मांसपेशियां मजबूत हो सकती हैं और उनकी सहनशक्ति बढ़ सकती है। लेकिन इससे शरीर को यह आदेश नहीं मिलता कि ऊर्जा केवल उन्हीं मांसपेशियों के ऊपर जमा चर्बी से ली जाए।
इसे स्थानीय चर्बी घटाना (spot reduction) कहा जाता है और सामान्य तौर पर शरीर इस तरह काम नहीं करता। व्यायाम ऊर्जा खर्च बढ़ाता है और लंबे समय में शरीर की कुल चर्बी कम करने में मदद करता है, लेकिन चर्बी शरीर के किस हिस्से से पहले कम होगी, इस पर हमारा नियंत्रण बहुत सीमित है।
इसलिए सरल भाषा में कहें तो पेट की कसरत पेट की मांसपेशियां बनाती है, केवल पेट की चर्बी नहीं चुनती।
हां, मजबूत पेट और धड़ की मांसपेशियों से शरीर का आकार बेहतर दिखाई दे सकता है, मुद्रा (posture) सुधर सकती है और कमर अधिक व्यवस्थित दिख सकती है। लेकिन अगर मांसपेशियों के ऊपर पर्याप्त चर्बी है तो केवल पेट की कसरत से वह चर्बी गायब नहीं होगी।
फिर चेहरा पहले पतला क्यों दिखाई देने लगता है?
यह भी हर व्यक्ति में नहीं होता, लेकिन बहुत से लोगों में वजन घटने का शुरुआती बदलाव चेहरे, गर्दन और शरीर के ऊपरी हिस्से में ज्यादा दिखाई देता है। चेहरे पर थोड़ी-सी चर्बी या पानी कम होने से ही उसकी आकृति बदलती हुई नजर आ सकती है। जबड़े की रेखा स्पष्ट होने लगती है और गाल कम भरे हुए लग सकते हैं।
इसके मुकाबले पेट पर कुल चर्बी का भंडार बड़ा हो सकता है। अगर वहां चर्बी में कुछ प्रतिशत कमी आई भी है तो आईने में उसका फर्क तुरंत नजर नहीं आता। इसलिए कई बार पेट से भी चर्बी कम हो रही होती है, लेकिन उसका दृश्य प्रभाव सबसे बाद में दिखाई देता है।
एक महत्वपूर्ण बात: पेट के भीतर की चर्बी पहले कम हो सकती है
यहीं आम धारणा और विज्ञान के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। पेट के भीतर अंगों के आसपास जमा आंतरिक चर्बी चयापचय की दृष्टि से अधिक सक्रिय होती है। वजन घटाने, नियमित शारीरिक गतिविधि और ऊर्जा की कमी के दौरान इसमें उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
इसका स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत महत्व है। हो सकता है कि आईने में आपके पेट की बाहरी तह अभी भी दिखाई दे रही हो, लेकिन शरीर के भीतर मौजूद हानिकारक आंतरिक चर्बी पहले ही काफी कम हो चुकी हो। इसलिए केवल आईना यह बताने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वजन घटाने से शरीर को कितना फायदा हुआ।
कमर का घेरा, शरीर का वजन, रक्तचाप, रक्त शर्करा और दूसरे चयापचय संकेत कई बार आईने से ज्यादा उपयोगी जानकारी दे सकते हैं।
उम्र बढ़ने पर पेट क्यों निकलने लगता है?
उम्र बढ़ने के साथ कई बदलाव एक साथ होते हैं। मांसपेशियों की मात्रा कम हो सकती है, शारीरिक गतिविधि घट सकती है, रोजाना खर्च होने वाली ऊर्जा बदल सकती है और हार्मोनल वातावरण भी बदलता है। अगर भोजन की मात्रा लगभग पहले जैसी ही बनी रहे लेकिन शरीर की ऊर्जा जरूरत कम हो जाए तो धीरे-धीरे अतिरिक्त ऊर्जा चर्बी के रूप में जमा हो सकती है।
महिलाओं में मेनोपॉज के आसपास शरीर में चर्बी का वितरण पेट की ओर बदलना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पुरुषों में उम्र, कम गतिविधि, नींद और हार्मोनल बदलाव मिलकर पेट और कमर के आसपास चर्बी बढ़ने में योगदान दे सकते हैं। यानी 25 साल की उम्र में जो भोजन और जीवनशैली वजन को स्थिर रख रही थी, जरूरी नहीं कि 50 साल की उम्र में भी वही परिणाम दे।
क्या कम नींद से पेट की चर्बी बढ़ सकती है?
नींद को वजन घटाने की चर्चा में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार कम नींद भूख, भोजन की पसंद, ऊर्जा खर्च, इंसुलिन की संवेदनशीलता और शरीर के कई हार्मोनल संकेतों को प्रभावित कर सकती है। थका हुआ व्यक्ति अगले दिन कम सक्रिय रह सकता है और ज्यादा ऊर्जा वाला भोजन चुन सकता है।
इसलिए रात में पांच घंटे सोकर सुबह कोई ‘पेट घटाने वाला पेय’ पीना समस्या के एक बड़े हिस्से को नजरअंदाज करना हो सकता है। नींद खुद कोई जादुई फैट-घोलक नहीं है, लेकिन लगातार खराब नींद ऐसी स्थिति बना सकती है जिसमें वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाए।
शराब और पेट की चर्बी का क्या संबंध है?
‘बीयर बेली’ (beer belly) एक लोकप्रिय शब्द है, लेकिन शराब पीने से चर्बी सिर्फ पेट पर जाकर जमा नहीं होती। शराब खुद ऊर्जा देती है और इसके साथ खाए जाने वाले भोजन की मात्रा भी बढ़ सकती है। नियमित और अधिक शराब सेवन नींद, भूख, लिवर के काम और कुल ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए शराब से जुड़ा पेट किसी एक खास रासायनिक प्रक्रिया का परिणाम नहीं है। इसमें शराब से मिलने वाली ऊर्जा, खाने का व्यवहार, शारीरिक गतिविधि, नींद और पूरे जीवनशैली पैटर्न का संयुक्त प्रभाव हो सकता है।
क्या कोई खास भोजन पेट की चर्बी तेजी से घटा सकता है?
ऐसा कोई भोजन प्रमाणित नहीं है जिसे खाने के बाद शरीर को निर्देश दिया जा सके कि केवल पेट की चर्बी जलानी है। नींबू-पानी, अजवाइन, जीरा, दालचीनी, सिरका, ग्रीन टी या कोई ‘फैट बर्निंग’ पेय अपने आप पेट की चर्बी को चुनकर खत्म नहीं करता। इनमें से कुछ चीजें सामान्य और संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं और कुछ के छोटे चयापचय प्रभावों पर शोध भी हुआ है, लेकिन उनका प्रभाव उस मूल सिद्धांत का विकल्प नहीं है जिसमें लंबे समय तक शरीर की ऊर्जा जरूरत और ऊर्जा सेवन के बीच संतुलन बदलता है। सीधी बात यह है कि पेट की चर्बी किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं आई, इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ से जाएगी भी नहीं।
क्या भूखे रहने से पेट जल्दी कम होगा?
बहुत ज्यादा भोजन कम करने से वजन तेजी से गिर सकता है, लेकिन उसके साथ शरीर का पानी और मांसपेशियां भी कम हो सकती हैं। बहुत कठोर आहार कंट्रोल लंबे समय तक निभाना मुश्किल होता है और कई लोगों में बाद में वजन वापस बढ़ने की समस्या भी आती है।
अगर लक्ष्य केवल वजन मशीन पर संख्या कम करना नहीं बल्कि शरीर की संरचना सुधारना है तो पर्याप्त प्रोटीन, नियमित शक्ति-व्यायाम और ऐसी ऊर्जा कमी ज्यादा उपयोगी हो सकती है जिसे लंबे समय तक निभाया जा सके। वजन घटाते समय कोशिश यह होनी चाहिए कि शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम हो और मांसपेशियां यथासंभव सुरक्षित रहें।
पेट‘अटका हुआ’ क्यों लगता है?
मान लीजिए किसी व्यक्ति का वजन 90 किलो था और पेट काफी निकला हुआ था। उसने 12 किलो वजन घटा लिया। चेहरा, कंधे और पैर साफ तौर पर पतले दिखाई देने लगे, लेकिन पेट अभी भी निकला हुआ है। इसका मतलब यह नहीं कि पेट से एक ग्राम चर्बी भी नहीं गई।
मान लीजिए शरीर के एक हिस्से में 10 यूनिट चर्बी थी और दूसरे हिस्से में 3 यूनिट। अगर दोनों जगह 30 प्रतिशत कमी हुई तो पहली जगह 7 यूनिट और दूसरी जगह केवल 2.1 यूनिट चर्बी बचेगी। छोटी मात्रा वाली जगह लगभग पतली दिखाई देने लगेगी, जबकि बड़ी मात्रा वाली जगह अभी भी मोटी दिख सकती है।
इसलिए ‘हर जगह की चर्बी चली गई, बस पेट की नहीं’ कई बार हमारी आंखों का भ्रम भी हो सकता है। पेट से चर्बी कम हो रही होती है, लेकिन क्योंकि वहां शुरुआत में भंडार ज्यादा था, इसलिए बदलाव दिखाई देने में ज्यादा समय लग सकता है।
पुरुषों और महिलाओं में जिद्दी चर्बी अलग क्यों होती है?
सामान्य तौर पर पुरुषों में पेट और कमर चर्बी जमा होने के प्रमुख क्षेत्रों में हो सकते हैं, जबकि महिलाओं में नितंब, कूल्हे और जांघों की त्वचा के नीचे की चर्बी अपेक्षाकृत ज्यादा जिद्दी हो सकती है। यह अंतर प्रजनन जीवविज्ञान, हार्मोन और अलग-अलग क्षेत्रों की फैट कोशिकाओं के व्यवहार से जुड़ा है।
इसीलिए किसी पुरुष के लिए आखिरी कुछ किलो में पेट सबसे बड़ी समस्या हो सकता है, जबकि किसी महिला के लिए जांघ और कूल्हे। इसलिए ‘पेट की चर्बी हमेशा सबसे आखिर में जाती है’ मानव शरीर का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है।
क्या पेट की चर्बी सिर्फ सुंदरता का मामला है?
नहीं। यही इस पूरी चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। त्वचा के नीचे मौजूद थोड़ी अतिरिक्त चर्बी और पेट के भीतर अंगों के आसपास जमा अधिक आंतरिक चर्बी को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। आंतरिक चर्बी मेटाबोलिज्म की दृष्टि से ज्यादा सक्रिय होती है और इसकी अधिक मात्रा टाइप-2 मधुमेह, हृदय रोग और दूसरी मेटाबोलिज्म संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है।
इसीलिए केवल वजन ही नहीं, कमर का घेरा भी स्वास्थ्य का उपयोगी संकेत माना जाता है। भारतीय और अन्य दक्षिण एशियाई आबादी में यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि समान शरीर-भार सूचकांक (body weight index) पर भी पेट के आसपास चर्बी और उससे जुड़े चयापचय जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकते हैं।
लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि हर निकला हुआ पेट बीमारी का संकेत है। किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का आकलन केवल पेट देखकर नहीं किया जा सकता। वजन, कमर, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, ब्लड फैट और दूसरे स्वास्थ्य संकेतों को साथ देखकर तस्वीर ज्यादा साफ होती है।
पेट कम करने की सबसे असरदार रणनीति क्या है?
ऐसा भोजन रूटीन जिसे महीनों और वर्षों तक निभाया जा सके, कुल ऊर्जा का नियंत्रित सेवन, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर, नियमित चलना या दूसरी शारीरिक गतिविधि, सप्ताह में नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद, शराब का सीमित सेवन और तनाव को बेहतर तरीके से संभालना, इन सबका संयुक्त असर पेट सहित पूरे शरीर की अतिरिक्त चर्बी पर पड़ता है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग खास तौर पर उपयोगी है क्योंकि वजन घटाते समय लक्ष्य केवल छोटा शरीर बनाना नहीं होना चाहिए। लक्ष्य कम चर्बी और पर्याप्त मांसपेशियों वाला स्वस्थ शरीर होना चाहिए।
और सबसे बड़ी गलती यह है कि रोज सुबह आईने के सामने खड़े होकर या कमर नापकर यह तय कर लिया जाए कि कल का व्यायाम सफल हुआ या नहीं। चर्बी घटने की प्रक्रिया दिनों की बजाय हफ्तों और महीनों में ज्यादा साफ दिखाई देती है।
कैसे पता चले कि पेट की चर्बी वास्तव में कम हो रही है?
केवल वजन मशीन पर्याप्त नहीं है। शरीर का वजन पानी, नमक, भोजन और आंतों में मौजूद सामग्री के कारण रोज बदल सकता है। इसलिए वजन के साथ कमर का घेरा भी देखना उपयोगी है। हर बार लगभग समान परिस्थितियों में कमर नापना बेहतर होता है।
कपड़ों की फिटिंग भी अच्छा व्यावहारिक संकेत है। अगर वजन बहुत ज्यादा नहीं बदला लेकिन कमर ढीली हो रही है और आपकी शारीरिक ताकत बढ़ रही है तो शरीर की संरचना में सुधार हो सकता है। किसी एक दिन के बदलाव से ज्यादा महत्वपूर्ण कई हफ्तों की दिशा होती है।
पेट की चर्बी को लेकर सबसे बड़ा भ्रम क्या है?
लोग अक्सर सोचते हैं कि शरीर पहले चेहरे की चर्बी जलाता है, फिर हाथ-पैर की, फिर बाकी हिस्सों की और अंत में मजबूरी में पेट की चर्बी को खत्म करता है। शरीर में ऐसी कोई तय क्रम-सूची नहीं होती।
हर समय शरीर के अलग-अलग वसा भंडारों से चर्बी के निकलने और जमा होने की प्रक्रिया चलती रहती है। अंतर यह होता है कि किस क्षेत्र से चर्बी कितनी आसानी से मुक्त हो रही है, उस क्षेत्र में शुरुआत में कितना भंडार था और चर्बी कम होने के बाद उसका बदलाव हमें कितना दिखाई दे रहा है।
इसलिए पेट की चर्बी के बारे में सबसे सही बात यह होगी कि पेट की चर्बी हर व्यक्ति में सबसे पहले नहीं बढ़ती और न ही हर व्यक्ति में सबसे आखिर में घटती है। लेकिन आनुवंशिकता, हार्मोन और अलग-अलग क्षेत्रों की वसा कोशिकाओं के व्यवहार के कारण बहुत से लोगों में ऐसा जरूर महसूस होता है।
और इसमें एक अच्छी खबर छिपी है। आईने में पेट की बाहरी तह पूरी तरह गायब होने से पहले ही शरीर के भीतर स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव शुरू हो सकते हैं। आंतरिक चर्बी कम हो सकती है, कमर घट सकती है, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर बेहतर हो सकते हैं।
इसलिए पेट कम करने की कोशिश को केवल ‘सिक्स पैक’ पाने की कोशिश समझना सही नहीं है। असली लक्ष्य पेट की चर्बी को किसी खास कसरत से जलाना नहीं, बल्कि पूरे शरीर को ऐसी स्थिति में लाना है जिसमें अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम हो, मांसपेशियां सुरक्षित रहें और ऐसी जीवनशैली बने जिसे वजन घटने के बाद भी लंबे समय तक जारी रखा जा सके।


