Premature Ejaculation Causes: शीघ्रपतन से परेशान हैं पुरुष? जानिए कौन-सी तकनीक कर सकती हैं मदद

Premature Ejaculation Causes: शीघ्रपतन क्या बीमारी है या सामान्य प्रक्रिया? जानिए इसके कारण, लक्षण, कितने मिनट में स्खलन को समस्या माना जाता है और स्टॉप-स्टार्ट तकनीक, दवाओं व अन्य प्रभावी इलाज के विकल्प।

Yogesh Mishra
Published on: 1 Nov 2026 4:16 PM IST
Premature Ejaculation Treatment | Premature Ejaculation Causes | Newstrack
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Premature Ejaculation Treatment | Premature Ejaculation Causes | Newstrack

Premature Ejaculation Causes: सेक्स करने के दौरान अपेक्षा से जल्दी स्खलित (इजेकुलेट) हो जाना कुछ पुरुषों के लिए इतनी बड़ी चिंता बन जाता है कि वे अपनी यौन क्षमता पर ही संदेह करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर पाएँगे। कुछ इसे शारीरिक कमजोरी समझते हैं, तो कुछ अपनी मर्दानगी से जोड़ लेते हैं। कई पुरुष इस डर से यौन संबंध बनाने से भी बचने लगते हैं।

चिकित्सा विज्ञान में इस समस्या को 'प्रीमैच्योर इजेकुलेशन' यानी शीघ्रपतन कहा जाता है। लेकिन हर बार जल्दी स्खलन होना बीमारी नहीं है। पहली बार सेक्स करते समय, लंबे अंतराल के बाद या बहुत अधिक उत्तेजना होने पर ऐसा हो सकता है। डॉक्टर इसे तब समस्या मानते हैं, जब स्खलन बार-बार अपेक्षा से बहुत जल्दी हो, व्यक्ति उसे नियंत्रित न कर पाए और इससे उसे मानसिक परेशानी या रिश्ते में कठिनाई होने लगे।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ पुरुषों को चिकित्सकीय रूप से शीघ्रपतन नहीं होता, फिर भी वे खुद को इस समस्या से पीड़ित मानते हैं। अश्लील फिल्मों, पुरुषत्व से जुड़ी सामाजिक धारणाओं और गलत विज्ञापनों ने इस चिंता को बढ़ाया है।

वास्तविक शीघ्रपतन के पीछे दिमाग और तंत्रिका तंत्र की प्रक्रियाएँ, मानसिक तनाव, इरेक्शन की समस्या और कुछ शारीरिक बीमारियाँ हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए व्यवहार संबंधी तकनीकें, काउंसलिंग और दवाएँ उपलब्ध हैं। इलाज का उद्देश्य सेक्स का समय असाधारण रूप से बढ़ाना नहीं, बल्कि स्खलन पर बेहतर नियंत्रण और यौन संतुष्टि हासिल करना है।

शीघ्रपतन वास्तव में क्या है?

पुरुष की यौन प्रतिक्रिया में उत्तेजना, इरेक्शन और स्खलन जैसी प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। स्खलन वह प्रक्रिया है जिसमें वीर्य लिंग के रास्ते शरीर से बाहर निकलता है। इसे दिमाग, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों का एक पूरा सिस्टम नियंत्रित करता है। समस्या तब मानी जाती है, जब स्खलन बार-बार व्यक्ति की इच्छा से काफी पहले हो जाए और वह उसे टाल न पाए। लेकिन केवल कम समय को शीघ्रपतन का प्रमाण नहीं माना जाता। इंटरनेशनल सोसायटी फॉर सेक्सुअल मेडिसिन (ISSM) के अनुसार इसकी पहचान में तीन बातें अहम हैं: सेक्स के दौरान बहुत जल्दी स्खलन होना।स्खलन को रोकने या टालने में लगातार कठिनाई होना।इससे व्यक्ति को परेशानी, निराशा या रिश्ते में कठिनाई होना।

कितने मिनट में स्खलन होना शीघ्रपतन कहलाता है?

यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। ISSM की परिभाषा के अनुसार, यदि किसी पुरुष को शुरुआती यौन अनुभवों से ही लगभग हर बार योनि में प्रवेश से पहले या उसके एक मिनट के भीतर स्खलन हो जाता है, वह इसे नियंत्रित नहीं कर पाता और इससे परेशान रहता है, तो इसे आजीवन शीघ्रपतन माना जा सकता है।

यदि पहले स्खलन का समय सामान्य था, लेकिन बाद में लगातार काफी कम हो गया, तो इसे बाद में विकसित हुआ शीघ्रपतन कहा जाता है। ऐसे मामलों में लगभग तीन मिनट या उससे कम समय एक संकेत हो सकता है। लेकिन केवल समय देखकर बीमारी तय नहीं की जाती।

एक चर्चित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में योनि में प्रवेश से स्खलन तक का औसत मध्य समय लगभग 5.4 मिनट पाया गया था। यह कोई अनिवार्य मानक नहीं है। हर व्यक्ति का यौन अनुभव अलग होता है।

यह समय चुंबन, स्पर्श और दूसरी अंतरंग गतिविधियों को शामिल नहीं करता। इसलिए दो, पाँच या दस मिनट का समय अपने आप किसी पुरुष की यौन क्षमता का पैमाना नहीं है। अगर व्यक्ति और उसका साथी संतुष्ट हैं और नियंत्रण को लेकर परेशानी नहीं है, तो किसी औसत समय से अपनी तुलना करने की जरूरत नहीं।

शीघ्रपतन के कितने प्रकार होते हैं?

विशेषज्ञ इसे आमतौर पर चार श्रेणियों में समझते हैं।

1. आजीवन शीघ्रपतन: इसमें शुरुआती यौन अनुभवों से ही लगभग हर बार बहुत जल्दी स्खलन होता है और व्यक्ति उसे नियंत्रित नहीं कर पाता।

2. बाद में विकसित हुआ शीघ्रपतन: इसमें पहले यौन अनुभव सामान्य रहते हैं, लेकिन किसी समय के बाद स्खलन का समय लगातार कम हो जाता है। इसके पीछे तनाव, इरेक्शन की समस्या या कुछ शारीरिक स्थितियाँ हो सकती हैं।

3. बदलता हुआ स्खलन समय: इसमें कभी जल्दी स्खलन होता है, तो कभी सामान्य समय लगता है। यह कई बार सामान्य शारीरिक बदलाव का हिस्सा होता है।

4. अनुमानित शीघ्रपतन: इसमें व्यक्ति को लगता है कि वह बहुत जल्दी स्खलित हो रहा है, जबकि उसका समय चिकित्सकीय रूप से सामान्य हो सकता है। ऐसी स्थिति में अवास्तविक अपेक्षाएँ और मानसिक दबाव बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

इन सभी स्थितियों का इलाज एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को केवल सही जानकारी और आश्वासन की जरूरत होती है, जबकि वास्तविक और लगातार समस्या में उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

स्खलन को दिमाग कैसे नियंत्रित करता है?

स्खलन केवल लिंग में होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें दिमाग, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों की भूमिका होती है। यौन उत्तेजना के दौरान शरीर से मिलने वाले संकेत दिमाग और तंत्रिका तंत्र तक पहुँचते हैं। इसके बाद तंत्रिका तंत्र स्खलन की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।

इसमें सेरोटोनिन नाम का एक रासायनिक संदेशवाहक भी भूमिका निभाता है। दिमाग में सेरोटोनिन से जुड़ी कुछ प्रक्रियाएँ स्खलन को देर से होने में मदद कर सकती हैं। इसी कारण कुछ ऐसी दवाएँ, जो सेरोटोनिन के संकेतों को प्रभावित करती हैं, शीघ्रपतन के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। हालाँकि यह कहना सही नहीं होगा कि शीघ्रपतन का कारण हमेशा सेरोटोनिन की कमी ही है। इसका कोई सामान्य ब्लड टेस्ट भी नहीं है, जिससे सेरोटोनिन मापकर इस बीमारी का पता लगाया जा सके। इसके पीछे कई जैविक और मानसिक कारण हो सकते हैं।

क्या शीघ्रपतन केवल मानसिक कमजोरी है?

यह मानना गलत है कि शीघ्रपतन हमेशा आत्मविश्वास की कमी या कमजोर इच्छाशक्ति के कारण होता है। कुछ पुरुषों में यह समस्या शुरुआती यौन अनुभवों से ही रहती है। वहीं कुछ पुरुषों में पहले सब सामान्य होता है, लेकिन बाद में समस्या शुरू हो जाती है। ऐसे मामलों में तनाव, रिश्तों की कठिनाइयाँ, इरेक्शन की समस्या या दूसरी शारीरिक स्थितियाँ भूमिका निभा सकती हैं। कई बार कोई एक निश्चित कारण नहीं मिलता। इसलिए हर पुरुष के लिए एक ही इलाज सही नहीं होता।

शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन में क्या अंतर है?

दोनों अलग समस्याएँ हैं।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन में पुरुष को इरेक्शन पाने या उसे बनाए रखने में कठिनाई होती है। शीघ्रपतन में मुख्य परेशानी स्खलन का समय और उस पर नियंत्रण है।हालाँकि दोनों समस्याएँ एक साथ हो सकती हैं। यदि किसी पुरुष को डर रहता है कि उसका इरेक्शन जल्दी खत्म हो जाएगा, तो वह जल्द स्खलित होने की कोशिश कर सकता है। दूसरी ओर, बार-बार जल्दी स्खलन होने से अगली बार प्रदर्शन को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इससे इरेक्शन भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए दोनों समस्याएँ मौजूद होने पर डॉक्टर को यह समझना जरूरी होता है कि शुरुआत किससे हुई।

क्या थायरॉयड या प्रोस्टेट की समस्या से शीघ्रपतन हो सकता है?

कुछ मामलों में ऐसा संभव है। विशेष रूप से थायरॉयड के अधिक सक्रिय होने यानी हाइपरथायरॉयडिज्म का संबंध बाद में विकसित हुए शीघ्रपतन से पाया गया है। प्रोस्टेट या जनन-मूत्र प्रणाली में सूजन और दूसरी समस्याएँ भी कुछ पुरुषों में स्खलन संबंधी परेशानी से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर शीघ्रपतन वाले पुरुष को थायरॉयड या प्रोस्टेट की बीमारी होती है। सभी के लिए ब्लड टेस्ट और स्कैन कराना जरूरी नहीं। डॉक्टर लक्षणों और स्वास्थ्य इतिहास के आधार पर जाँच तय करते हैं। यदि पहले सब सामान्य था और अचानक स्खलन का समय बहुत कम होने लगा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी है।

पुरुषों में इसे लेकर इतनी चिंता क्यों होती है?

इसका बड़ा कारण यौन क्षमता को मर्दानगी से जोड़ने वाली सामाजिक सोच है। कई पुरुषों को लगता है कि उन्हें सेक्स के दौरान हमेशा नियंत्रण बनाए रखना चाहिए और हर बार अपने साथी को संतुष्ट करना चाहिए। अश्लील फिल्मों में दिखाए जाने वाले लंबे यौन दृश्यों से भी अवास्तविक अपेक्षाएँ बन सकती हैं। लेकिन फिल्में वास्तविक जीवन का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। उनमें संपादन और कई बार अलग-अलग समय पर रिकॉर्ड किए गए दृश्य शामिल हो सकते हैं। उन्हें सामान्य यौन क्षमता का पैमाना मानना गलत है। जब कोई पुरुष जल्दी स्खलन को अपनी असफलता समझने लगता है, तो अगली बार भी उसे यही डर सताता है। वह यौन संबंध का आनंद लेने के बजाय अपने प्रदर्शन और समय पर नजर रखने लगता है। इससे तनाव और असंतोष बढ़ सकता है।हालाँकि यह भी सही नहीं कि हर मामले में मानसिक तनाव ही शीघ्रपतन का कारण होता है।

क्या साथी की असंतुष्टि के डर से समस्या बढ़ सकती है?

हाँ, कुछ पुरुषों में ऐसा हो सकता है। यदि उन्हें लगातार डर रहे कि साथी उनसे असंतुष्ट होगा, तो सेक्स के दौरान तनाव बढ़ सकता है। पहले जल्दी स्खलन होने के बाद अगली बार वही घटना दोहराने का डर भी पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में साथी से खुलकर बातचीत करना मददगार हो सकता है। यौन संतुष्टि केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि पुरुष कितनी देर तक योनि में प्रवेश बनाए रखता है। संवाद, सहमति, स्पर्श, सहजता और दोनों की पसंद भी महत्त्वपूर्ण हैं। कुछ मामलों में दंपती काउंसलिंग या सेक्स थेरेपी से भी मदद मिल सकती है।

क्या हस्तमैथुन से शीघ्रपतन होता है?

यह एक आम मिथक है। सामान्य हस्तमैथुन से शीघ्रपतन की बीमारी पैदा होती है, इसका विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। इससे शरीर की ताकत या प्रजनन क्षमता खत्म होने का दावा भी सही नहीं है। हाँ, किसी व्यक्ति की यौन आदतें उसके अनुभव को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन जल्दी हस्तमैथुन करने का मतलब यह नहीं कि उसे आगे चलकर शीघ्रपतन जरूर होगा। इसी तरह वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की संख्या और स्खलन का समय तीन अलग बातें हैं। जल्दी स्खलित होने का मतलब यह नहीं कि पुरुष में वीर्य की कमी है या वह पिता नहीं बन सकता। यदि स्खलन हमेशा योनि में प्रवेश से पहले हो जाता है, तो प्राकृतिक गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में प्रजनन विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है।

डॉक्टर शीघ्रपतन की पहचान कैसे करते हैं?

डॉक्टर सबसे पहले व्यक्ति की यौन और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेते हैं। वे जानना चाह सकते हैं: समस्या कब से है, शुरुआत से या बाद में हुई? क्या लगभग हर बार ऐसा होता है या कभी-कभी? क्या व्यक्ति स्खलन को टाल पाता है? क्या इससे मानसिक परेशानी या रिश्ते में कठिनाई हो रही है? क्या इरेक्शन की भी समस्या है?

जरूरत पड़ने पर शारीरिक परीक्षण या कुछ जाँचें कराई जा सकती हैं। लेकिन हर मरीज को सभी तरह के टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। मोबाइल पर स्टॉपवॉच चलाकर कुछ बार समय नाप लेना भी बीमारी की पहचान का पर्याप्त तरीका नहीं है। डॉक्टर समय के साथ नियंत्रण और उससे होने वाली परेशानी को भी देखते हैं।

शीघ्रपतन का इलाज कैसे होता है?

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस तरह की है। यदि कभी-कभार जल्दी स्खलन होता है, तो सही जानकारी और चिंता कम करना पर्याप्त हो सकता है। यदि समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर व्यवहार संबंधी तकनीकें, काउंसलिंग या दवाओं की सलाह दे सकते हैं। यदि पहले सब सामान्य था और बाद में शीघ्रपतन शुरू हुआ है, तो इरेक्शन की समस्या, थायरॉयड या दूसरी संभावित वजहों का इलाज भी जरूरी हो सकता है।

स्टॉप-स्टार्ट तकनीक

यह शीघ्रपतन के लिए इस्तेमाल होने वाली व्यवहार संबंधी तकनीक है। इसमें व्यक्ति उत्तेजना बहुत बढ़ने पर कुछ समय के लिए यौन गतिविधि रोक देता है। जब स्खलन की तीव्र इच्छा कम हो जाती है, तब दोबारा शुरुआत की जाती है। इस अभ्यास से व्यक्ति अपनी उत्तेजना के स्तर को पहचानना और स्खलन को टालना सीख सकता है। एक दूसरी तकनीक 'स्क्वीज' कहलाती है। इसमें स्खलन के करीब पहुँचने पर लिंग के अगले हिस्से के पास हल्का दबाव देकर उत्तेजना कम करने की कोशिश की जाती है। इसमें दर्द या बहुत अधिक दबाव नहीं होना चाहिए।

इन तकनीकों से कुछ लोगों को फायदा होता है, लेकिन हर व्यक्ति में एक जैसे परिणाम की गारंटी नहीं है।

क्या कंडोम मदद कर सकता है?

कुछ पुरुषों में कंडोम से लिंग की संवेदना थोड़ी कम हो सकती है और स्खलन में कुछ देर लग सकती है। बाजार में मोटे कंडोम और संवेदना कम करने वाले खास कंडोम भी मिलते हैं। लेकिन कंडोम शीघ्रपतन का पक्का इलाज नहीं है। इसका मुख्य महत्त्व अनचाहे गर्भ और कई यौन संक्रमणों का जोखिम कम करना है।

क्या सुन्न करने वाली क्रीम या स्प्रे काम करते हैं?

लिडोकेन और प्रिलोकेन जैसे पदार्थों वाली कुछ क्रीम और स्प्रे लिंग की संवेदना अस्थायी रूप से कम कर सकते हैं। इससे कुछ पुरुषों में स्खलन देर से होता है।

लेकिन इनका इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है। ज्यादा मात्रा से लिंग जरूरत से अधिक सुन्न हो सकता है। दवा साथी की त्वचा तक पहुँचने पर उसकी संवेदना भी कम कर सकती है। जलन या एलर्जी भी हो सकती है।इसलिए किसी भी अनजान 'डिले स्प्रे' को खुद से इस्तेमाल करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और उत्पाद के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

डैपॉक्सेटिन क्या है?

डैपॉक्सेटिन एक दवा है, जिसे कुछ देशों में शीघ्रपतन के इलाज के लिए मंजूरी मिली है। यह सेरोटोनिन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है और कुछ पुरुषों में स्खलन का समय बढ़ाने में मदद कर सकती है। इसके संभावित दुष्प्रभावों में मतली, सिरदर्द और चक्कर शामिल हैं। कुछ दूसरी दवाओं के साथ इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। इसकी उपलब्धता और मंजूरी भी अलग-अलग देशों में अलग है। इसलिए इसे खुद से खरीदकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। डॉक्टर मरीज की स्थिति और दूसरी दवाओं को ध्यान में रखकर ही इसकी सलाह दे सकते हैं।

क्या अवसाद की दवाएँ भी दी जाती हैं?

कुछ मामलों में पैरॉक्सेटीन, सर्ट्रालीन और फ्लुओक्सेटीन जैसी SSRI दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ये मूल रूप से अवसाद और कुछ दूसरी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में दी जाती हैं, लेकिन इनके असर से कुछ पुरुषों में स्खलन देर से हो सकता है। इन दवाओं से मतली, नींद में बदलाव, यौन इच्छा में कमी और दूसरे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह शुरू करना, खुराक बदलना या अचानक बंद करना ठीक नहीं है।

क्या वियाग्रा शीघ्रपतन का इलाज है?

वियाग्रा यानी सिल्डेनाफिल मुख्य रूप से इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज में इस्तेमाल होती है। यह इरेक्शन पाने और बनाए रखने में मदद करती है, लेकिन शीघ्रपतन की सीधी दवा नहीं है। यदि किसी पुरुष को दोनों समस्याएँ हैं, तो डॉक्टर इरेक्शन की समस्या का इलाज कर सकते हैं। इससे कुछ मामलों में स्खलन से जुड़ी परेशानी भी कम हो सकती है। सिल्डेनाफिल कुछ दूसरी दवाओं, विशेषकर नाइट्रेट वाली दवाओं के साथ खतरनाक रूप से ब्लड प्रेशर घटा सकती है। इसलिए इसे बिना चिकित्सकीय सलाह नहीं लेना चाहिए।

क्या शराब या ट्रामाडोल से स्खलन देर से होता है?

कुछ लोगों में शराब से स्खलन देर से हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षित या प्रमाणित इलाज नहीं है। अधिक शराब से इरेक्शन, यौन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ट्रामाडोल जैसी दर्द कम करने वाली दवाओं से भी कुछ मामलों में स्खलन देर से हो सकता है। लेकिन इनसे लत लगने, दौरे पड़ने और दूसरी गंभीर समस्याओं का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें शीघ्रपतन के इलाज के लिए खुद से लेना खतरनाक है।

क्या योग, व्यायाम और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज से फायदा होता है?

नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव कम करने की आदतें समग्र यौन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। कुछ अध्ययनों में पेल्विक फ्लोर यानी पेल्विक एरिया की मांसपेशियों की एक्सरसाइज से स्खलन पर नियंत्रण बेहतर होने की संभावना भी दिखी है।

लेकिन हर पुरुष में शीघ्रपतन का कारण इन मांसपेशियों की कमजोरी नहीं होता। कुछ लोगों में इन मांसपेशियों में जरूरत से ज्यादा तनाव भी हो सकता है। इसलिए बिना सही जानकारी के बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करना उचित नहीं। योग या व्यायाम से हर तरह का शीघ्रपतन ठीक हो जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है। इन्हें जरूरत के अनुसार दूसरे उपचारों के साथ अपनाया जा सकता है।

क्या मनोवैज्ञानिक उपचार से फायदा होता है?

कुछ पुरुषों में सेक्स थेरेपी और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग उपयोगी हो सकती है। इसमें यौन प्रदर्शन का डर, अवास्तविक अपेक्षाएँ, तनाव और रिश्ते से जुड़ी परेशानियों को समझने की कोशिश की जाती है।

काउंसलिंग से व्यक्ति यह समझ सकता है कि जल्दी स्खलन को अपनी मर्दानगी या असफलता से जोड़ना जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर साथी को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। कुछ मामलों में दवा और काउंसलिंग का संयुक्त उपचार बेहतर विकल्प हो सकता है।

क्या शीघ्रपतन के लिए सर्जरी होती है?

शीघ्रपतन के इलाज में सर्जरी सामान्यतः पहली पसंद नहीं है। कुछ प्रयोगात्मक तरीकों में लिंग की संवेदना कम करने या तंत्रिकाओं पर काम करने की कोशिश की गई है, लेकिन इनके लंबे समय के लाभ और सुरक्षा के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। ऐसी प्रक्रियाओं से संवेदना में स्थायी बदलाव, दर्द या दूसरी समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए केवल जल्दी स्खलन होने के कारण सर्जरी कराने का फैसला नहीं करना चाहिए। पहले यूरोलॉजिस्ट या यौन चिकित्सा विशेषज्ञ से प्रमाणित उपचारों की जानकारी लेनी चाहिए।

बाजार में बिकने वाली 'मर्दाना ताकत' की दवाओं से सावधान रहें

भारत में शीघ्रपतन और यौन कमजोरी के नाम पर अनेक तेल, कैप्सूल, चूर्ण और स्प्रे बेचे जाते हैं। इनके विज्ञापनों में घंटों तक सेक्स करने या स्थायी इलाज की गारंटी जैसे दावे किए जाते हैं। ऐसे कई उत्पादों की प्रभावशीलता और सुरक्षा का भरोसेमंद वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होता। कुछ अनियमित उत्पादों में ऐसी दवाएँ भी छिपाकर मिलाई जा सकती हैं, जिनका पैकेट पर उल्लेख नहीं होता। इससे दूसरी दवाओं के साथ खतरनाक प्रतिक्रिया और दुष्प्रभाव हो सकते हैं। किसी एक तेल, गोली या कैप्सूल से सभी पुरुषों का शीघ्रपतन ठीक होने का दावा विश्वसनीय नहीं है।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि कभी-कभार जल्दी स्खलन होता है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं। लेकिन यदि समस्या कई महीनों से बनी हुई है, लगभग हर बार नियंत्रण में कठिनाई होती है या इससे मानसिक परेशानी और रिश्ते पर असर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

विशेष रूप से यदि पहले सब सामान्य था और अचानक स्खलन का समय काफी कम हो गया है, तो जाँच कराना उपयोगी है। इरेक्शन की समस्या, जननांग में दर्द या पेशाब से जुड़ी परेशानी होने पर भी डॉक्टर से मिलना चाहिए। यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट या यौन चिकित्सा विशेषज्ञ इसका मूल्यांकन कर सकते हैं। मानसिक तनाव या रिश्ते से जुड़ी कठिनाई होने पर प्रशिक्षित काउंसलर या सेक्स थेरेपिस्ट की मदद भी ली जा सकती है।

शीघ्रपतन का इलाज मिनट बढ़ाना नहीं, नियंत्रण और आत्मविश्वास लौटाना है

शीघ्रपतन एक वास्तविक और इलाज योग्य यौन समस्या हो सकती है। लेकिन हर बार जल्दी स्खलन होने को बीमारी मान लेना गलत है। इसी तरह लगातार परेशानी होने पर उसे केवल मानसिक कमजोरी बताकर नजरअंदाज करना भी उचित नहीं।

इसकी पहचान में तीन बातें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं: स्खलन का समय, उस पर नियंत्रण और उससे होने वाली परेशानी। कुछ पुरुषों में समस्या शुरुआती यौन अनुभवों से रहती है, जबकि कुछ में बाद में विकसित होती है। वहीं कई पुरुष अवास्तविक अपेक्षाओं के कारण सामान्य अनुभव को भी बीमारी समझने लगते हैं।

इलाज में व्यवहार संबंधी अभ्यास, काउंसलिंग, कुछ स्थानीय क्रीम या स्प्रे और डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएँ शामिल हो सकती हैं। लेकिन हर पुरुष को दवा की जरूरत नहीं होती।

सबसे जरूरी बात यह है कि पुरुष की यौन क्षमता को केवल इस आधार पर नहीं आँकना चाहिए कि वह कितने मिनट तक स्खलन रोक सकता है। यौन संतुष्टि एक साझा अनुभव है, जिसमें सहमति, संवाद, सहजता, भावनात्मक जुड़ाव और दोनों साथियों की इच्छाएँ महत्त्वपूर्ण हैं।

कुछ मिनट में स्खलित हो जाना अपने आप किसी पुरुष की मर्दानगी, प्रजनन क्षमता या साथी को संतुष्ट करने की योग्यता पर फैसला नहीं है। सही जानकारी, समस्या की उचित पहचान और जरूरत के अनुसार इलाज से शीघ्रपतन से जुड़ी परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी चिकित्सकीय परामर्श, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। शीघ्रपतन या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए योग्य यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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