Sitting and Heart Health: घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं? शरीर में हो सकते हैं ये बदलाव

Sitting and Heart Health: लगातार घंटों बैठे रहने से ब्लड शुगर, दिल की सेहत, कमर दर्द और वजन पर क्या असर पड़ता है?

Neel Mani Lal
Published on: 23 Oct 2026 2:45 PM IST (Updated on: 23 Oct 2026 2:59 PM IST)
Sitting and Heart Health | Sitting Too Long Effects | Physical Inactivity in Hindi | Newstrack Hindi
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Sitting and Heart Health | Sitting Too Long Effects | Physical Inactivity in Hindi | Newstrack Hindi

Sitting and Heart Health: कल्पना कीजिए, आप सुबह उठते हैं, नाश्ता करते हुए कुर्सी पर बैठते हैं, फिर ऑफिस या घर पर लैपटॉप के सामने कई घंटे गुजार देते हैं। शाम को सोफे पर बैठकर मोबाइल चलाते हैं और रात में खाना खाने के बाद बिस्तर पर लेट जाते हैं। दिन खत्म हो जाता है, लेकिन आपके शरीर को चलने-फिरने का मौका बहुत कम मिलता है।

आपको लगता है कि आपने कोई भारी काम नहीं किया, इसलिए शरीर पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ा होगा। लेकिन विज्ञान एक दिलचस्प बात बताता है: शरीर को नुकसान केवल ज्यादा मेहनत करने से ही नहीं होता, बल्कि लंबे समय तक बिल्कुल कम सक्रिय रहने से भी हो सकता है।

लगातार बैठे रहने का असर सिर्फ कमर दर्द या बढ़ते वजन तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता का संबंध टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और समय से पहले मृत्यु के बढ़े हुए जोखिम से भी पाया गया है। आखिर ऐसा क्यों होता है? जब हम बैठे रहते हैं, तब शरीर के भीतर क्या बदलता है? और क्या कुछ मिनट चलने से इस नुकसान को कम किया जा सकता है?

आइए, विज्ञान की मदद से समझते हैं।

घंटों बैठे रहने पर मांसपेशियों के साथ क्या होता है?

हम अक्सर सोचते हैं कि मांसपेशियों को नुकसान तभी होता है, जब हम भारी वजन उठाते हैं या कठिन शारीरिक काम करते हैं। लेकिन मांसपेशियों के स्वस्थ रहने के लिए नियमित गतिविधि भी जरूरी है। जब आप चलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या खड़े होकर काम करते हैं, तो पैरों, कूल्हों और धड़ की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इसके उलट, जब आप लगातार कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो इन मांसपेशियों की गतिविधि काफी कम हो जाती है।

अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो शरीर की शारीरिक क्षमता और मांसपेशियों की ताकत पर असर पड़ सकता है। खासकर तब, जब आप व्यायाम भी नहीं करते। यहां एक जरूरी अंतर समझिए: कुछ घंटे बैठने से मांसपेशियां अचानक खत्म नहीं हो जातीं। समस्या लंबे समय तक कम सक्रिय रहने की आदत से पैदा होती है, खासकर जब इसके साथ पर्याप्त व्यायाम की कमी भी जुड़ी हो।

नियमित चलना-फिरना और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली गतिविधियां शरीर की ताकत और कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी वयस्कों को बैठे रहने का समय कम करने और उसकी जगह किसी भी तीव्रता की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने की सलाह देता है।

क्या लगातार बैठे रहने से ब्लड शुगर पर असर पड़ता है?

यह लंबे समय तक बैठे रहने के सबसे महत्वपूर्ण प्रभावों में से एक है। जब आप खाना खाते हैं, तो भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट पचकर ग्लूकोज में बदलते हैं। यह ग्लूकोज रक्त के जरिए शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में इंसुलिन नाम का हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर की कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज लेने में मदद करता है।

अब सोचिए, आपने दोपहर का खाना खाया और उसके बाद लगातार तीन-चार घंटे कुर्सी पर बैठे रहे। इस दौरान पैरों की मांसपेशियां बहुत कम सक्रिय रहती हैं। शरीर की ऊर्जा की मांग भी चलने-फिरने की तुलना में कम होती है।

शोध बताते हैं कि लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहने पर भोजन के बाद रक्त में ग्लूकोज और इंसुलिन के स्तर की प्रतिक्रिया, बीच-बीच में हल्की गतिविधि करने की तुलना में अधिक हो सकती है।

कई नियंत्रित अध्ययनों के विश्लेषण में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने के बीच छोटे-छोटे वॉकिंग ब्रेक लेने से भोजन के बाद ग्लूकोज और इंसुलिन की प्रतिक्रिया कम हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को बैठे रहने से डायबिटीज हो जाएगी। लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहना, खासकर दूसरे जोखिम कारकों के साथ, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। अच्छी खबर यह है कि भोजन के बाद कुछ मिनट चलना भी उपयोगी कदम हो सकता है। इसके लिए हर बार जिम जाने की जरूरत नहीं होती।

दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ सकता है असर

दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे गुजरता है, तो शरीर को मिलने वाली गतिविधि कम हो जाती है। लंबे समय तक बैठे रहने का संबंध हृदय रोग और हृदय रोग से होने वाली मृत्यु के बढ़े हुए जोखिम से पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों में ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहने का संबंध हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर सहित कई प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों से है।

हालांकि, इस संबंध को सही तरीके से समझना जरूरी है। जो लोग ज्यादा बैठते हैं, उनमें अक्सर शारीरिक गतिविधि की कमी, अस्वास्थ्यकर खानपान या अन्य जोखिम कारक भी हो सकते हैं। इसलिए हर स्वास्थ्य समस्या का कारण सिर्फ बैठना नहीं होता। फिर भी, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत बदलना स्वास्थ्य के लिए एक उपयोगी कदम है। बीच-बीच में उठकर चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित व्यायाम करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है।

कमर, गर्दन और पीठ में दर्द क्यों होने लगता है?

क्या आपने कभी गौर किया है कि लैपटॉप पर लगातार काम करने के बाद गर्दन अकड़ने लगती है, कंधों में खिंचाव महसूस होता है या कमर में दर्द होने लगता है?

इसका एक कारण लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना हो सकता है। जब आप स्क्रीन की तरफ झुककर बैठते हैं, तो गर्दन आगे की ओर निकल सकती है, कंधे झुक सकते हैं और पीठ पर पड़ने वाला दबाव बदल सकता है। यदि आप कई घंटे इसी स्थिति में रहते हैं, तो मांसपेशियों में थकान और असहजता बढ़ सकती है।

लेकिन यहां भी एक बात समझना जरूरी है। हर तरह का पीठ दर्द सिर्फ बैठने की वजह से नहीं होता। गलत मुद्रा, पहले से मौजूद समस्याएं, मांसपेशियों की कमजोरी और दूसरी शारीरिक स्थितियां भी दर्द का कारण बन सकती हैं।

इसलिए केवल सीधा बैठना ही समाधान नहीं है। सबसे अच्छा तरीका है कि आप आरामदायक मुद्रा में बैठें और समय-समय पर अपनी स्थिति बदलते रहें।

कंप्यूटर स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें कि आपको लगातार गर्दन झुकाकर न देखना पड़े। पैरों को सहारा दें और बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें। लंबे समय तक गर्दन को एक ही स्थिति में रखने से बचने की सलाह भी दी जाती है।

क्या बैठे रहने से वजन भी बढ़ सकता है?

इसका जवाब है, हां, लेकिन इसके पीछे का संबंध थोड़ा व्यापक है। हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा प्राप्त करता है और इस ऊर्जा का इस्तेमाल सांस लेने, रक्त संचार, शरीर का तापमान बनाए रखने तथा शारीरिक गतिविधियों जैसे कामों में करता है।

जब आप चलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या घर के काम करते हैं, तो शरीर आमतौर पर आराम से बैठे रहने की तुलना में ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है। इसके विपरीत, यदि आप दिन का ज्यादातर समय बैठे रहते हैं, तो आपकी कुल शारीरिक गतिविधि और ऊर्जा खर्च कम हो सकते हैं। अगर लंबे समय तक भोजन से मिलने वाली ऊर्जा, खर्च होने वाली ऊर्जा से अधिक रहती है, तो वजन बढ़ने की संभावना होती है। हालांकि, वजन बढ़ने का कारण केवल बैठना नहीं है। खानपान, नींद, दवाएं, हार्मोन, आनुवंशिक कारक और दूसरी परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।

इसीलिए केवल कम बैठने से हर व्यक्ति का वजन अपने आप कम नहीं होगा। वजन को स्वस्थ स्तर पर बनाए रखने के लिए संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि दोनों महत्वपूर्ण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में अतिरिक्त चर्बी को नियंत्रित करने और कई दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम कम करने में मदद कर सकती है।

क्या लगातार बैठे रहने का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है?

लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना कभी-कभी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के साथ भी देखा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति पूरा दिन घर के भीतर स्क्रीन के सामने बैठकर गुजारता है, तो उसे बाहर निकलने, दूसरे लोगों से मिलने, धूप में समय बिताने और शारीरिक गतिविधि करने के अवसर कम मिल सकते हैं।

इस तरह की दिनचर्या का संबंध कुछ लोगों में खराब नींद, तनाव या अवसाद के लक्षणों से हो सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बैठे रहने से सीधे अवसाद हो जाता है। मानसिक स्वास्थ्य पर कई कारक एक साथ असर डालते हैं और शोध में पाया गया संबंध हमेशा सीधे कारण को साबित नहीं करता।

दूसरी ओर, नियमित शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शारीरिक गतिविधि चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है और नींद तथा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचा सकती है। इसलिए काम के बीच कुछ देर टहलना सिर्फ शरीर को आराम देने का तरीका नहीं है। यह आपकी रोजमर्रा की दिनचर्या में मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बदलाव हो सकता है।

अगर आप रोज जिम जाते हैं, तो क्या लंबे समय तक बैठना नुकसानदेह नहीं होगा?

यह एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है। मान लीजिए, आप हर सुबह 45 मिनट व्यायाम करते हैं, लेकिन उसके बाद ऑफिस में आठ घंटे बैठे रहते हैं। क्या सुबह की कसरत पूरे दिन बैठे रहने के असर को खत्म कर देगी?

नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद है, लेकिन यह मान लेना सही नहीं कि इससे लंबे समय तक बैठे रहने के सभी संभावित नुकसान खत्म हो जाते हैं। व्यायाम से दिल की सेहत, मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक क्षमता बेहतर हो सकती है। फिर भी, दिन के बाकी हिस्से में लगातार निष्क्रिय रहना एक अलग समस्या है।

ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा भी बताती है कि कोई व्यक्ति साप्ताहिक व्यायाम के लक्ष्य पूरे करने के बावजूद, यदि बाकी समय बहुत ज्यादा बैठता है, तो उसे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं। इसलिए बेहतर तरीका है कि आप व्यायाम भी करें और दिनभर बैठे रहने के समय को भी कम करें। सुबह टहलना, ऑफिस में बीच-बीच में उठना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और शाम को थोड़ी देर पैदल चलना, ये सभी आपकी दिनचर्या को अधिक सक्रिय बना सकते हैं।

आखिर कितनी देर बैठना ठीक है और इससे बचने के लिए क्या करें?

सभी वयस्कों के लिए बैठने की कोई एक निश्चित समय-सीमा स्थापित नहीं है, जिसके बाद अचानक स्वास्थ्य को नुकसान होने लगे। जोखिम इस बात से प्रभावित होता है कि आप कुल कितनी देर निष्क्रिय रहते हैं, कितनी शारीरिक गतिविधि करते हैं और आपकी सेहत कैसी है।

इसलिए लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि बैठना पूरी तरह बंद कर दिया जाए। लक्ष्य यह होना चाहिए कि लगातार बैठे रहने की अवधि कम हो और पूरे दिन में गतिविधि के अधिक अवसर मिलें।

काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें

यदि आप ऑफिस में काम करते हैं या लंबे समय तक कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, तो हर 30 से 60 मिनट में उठकर थोड़ा चलने का रिमाइंडर लगा सकते हैं। यह एक व्यावहारिक आदत है, कोई ऐसी चिकित्सकीय सीमा नहीं जिसके बाद ही उठना जरूरी हो। दो-तीन मिनट चलना, पानी लेने के लिए उठना या कुछ देर खड़े होकर हल्की गतिविधि करना भी लगातार बैठे रहने को तोड़ सकता है।

एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि लंबे समय तक बैठने के बीच छोटे-छोटे वॉकिंग ब्रेक लेने से भोजन के बाद रक्त में ग्लूकोज और इंसुलिन की प्रतिक्रिया बेहतर हो सकती है। हालांकि, ऐसे अध्ययनों में तत्काल मापे गए प्रभावों से यह साबित नहीं होता कि कुछ मिनट चलने से लंबे समय के सभी स्वास्थ्य जोखिम खत्म हो जाते हैं।

हर दिन पैदल चलने की आदत बनाएं

यदि आप अभी बहुत कम सक्रिय हैं, तो शुरुआत रोजाना 10 से 15 मिनट पैदल चलने से कर सकते हैं। फिर अपनी क्षमता के अनुसार समय और गति धीरे-धीरे बढ़ाएं।

वयस्कों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि हर सप्ताह कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि की जाए, या उसके बराबर अधिक तीव्रता वाली गतिविधि की जाए। इसके साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी करने चाहिए।

मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि का एक आसान उदाहरण तेज चाल से चलना है। इसमें सांस सामान्य से कुछ तेज होती है, लेकिन आप बातचीत कर सकते हैं। यदि आप बुजुर्ग हैं, किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं या चलने-फिरने में कठिनाई होती है, तो अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि चुनें और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

रोजमर्रा के कामों को भी गतिविधि में बदलें

हर शारीरिक गतिविधि के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। आप फोन पर बात करते समय टहल सकते हैं, पास की दुकान तक पैदल जा सकते हैं, घर के छोटे-मोटे काम कर सकते हैं या ऑफिस में किसी सहकर्मी से बात करने के लिए उसकी डेस्क तक चलकर जा सकते हैं। ये छोटे बदलाव दिनभर की कुल गतिविधि बढ़ाने में मदद करते हैं।।याद रखिए, कुछ गतिविधि करना बिल्कुल निष्क्रिय रहने से बेहतर है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसे नियमित बनाना अधिक महत्वपूर्ण है।

समस्या बैठने में नहीं, लगातार निष्क्रिय रहने में है

बैठना हमारे जीवन का सामान्य हिस्सा है। पढ़ाई करने, काम करने, खाना खाने और आराम करने के लिए हमें बैठना पड़ता है। इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। चिंता तब होती है, जब दिन का बड़ा हिस्सा लगातार बैठे-बैठे बीतता है और शरीर को पर्याप्त गतिविधि नहीं मिलती।

हर दिन थोड़ा चलें, काम के बीच उठें, नियमित व्यायाम करें और लगातार घंटों तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें। आपको अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हर समय कठिन व्यायाम करने की जरूरत नहीं है। कई बार कुर्सी से उठकर कुछ मिनट चलना भी एक बेहतर दिनचर्या की शुरुआत हो सकता है।

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