Pregnancy During Periods: पीरियड्स में सेक्स से प्रेग्नेंसी हो सकती है? जानें इमरजेंसी पिल का असर

Pregnancy During Periods: क्या पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से गर्भधारण हो सकता है? जानिए प्रेग्नेंसी का जोखिम, इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन, मॉर्निंग आफ्टर पिल और कॉपर IUD कैसे काम करते हैं।

Neel Mani Lal
Published on: 7 Nov 2026 5:28 PM IST
Sex During Periods |Pregnancy During Periods|Can You Get Pregnant During Periods | Newstrack Hindi
X

Sex During Periods |Pregnancy During Periods|Can You Get Pregnant During Periods | Newstrack Hindi 

Pregnancy During Periods: पीरियड्स के दौरान गर्भधारण नहीं हो सकता, यह धारणा काफी आम है। इसी वजह से कुछ लोग मासिक धर्म के दिनों को गर्भनिरोध के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। पीरियड्स के दौरान गर्भधारण की संभावना आमतौर पर कम होती है, मगर इसे शून्य नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह महिला के मासिक चक्र, अंडोत्सर्जन (Ovulation) के समय और शुक्राणुओं के शरीर में जीवित रहने की क्षमता से जुड़ी है।

दूसरी ओर, अगर असुरक्षित यौन संबंध बन जाए या कंडोम फट जाए, तो अनचाहे गर्भधारण की आशंका कम करने के लिए इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे अक्सर 'मॉर्निंग आफ्टर पिल' कहा जाता है, लेकिन यह केवल अगली सुबह लेने वाली दवा नहीं है। इसके इस्तेमाल का सही समय और तरीका समझना जरूरी है।

क्या पीरियड्स के दौरान गर्भधारण संभव है?

हां, पीरियड्स के दौरान भी गर्भधारण संभव है, हालांकि सामान्य परिस्थितियों में इसकी संभावना कम होती है। इसे समझने के लिए पहले मासिक चक्र (Menstrual Cycle) को जानना जरूरी है।

मासिक चक्र के दौरान महिला के अंडाशय (Ovaries) में एक अंडा विकसित होता है। चक्र के बीच के आसपास अंडाशय से अंडा बाहर निकलता है, जिसे अंडोत्सर्जन या ओव्यूलेशन कहते हैं। इसी समय के आसपास गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है। यदि इस दौरान शुक्राणु अंडे से मिल जाए, तो निषेचन (Fertilization) हो सकता है।

आमतौर पर 28 दिनों के मासिक चक्र में ओव्यूलेशन लगभग 14वें दिन के आसपास हो सकता है, लेकिन हर महिला का चक्र 28 दिनों का नहीं होता। किसी का चक्र छोटा हो सकता है, किसी का लंबा और किसी का हर महीने अलग-अलग समय पर ओव्यूलेशन हो सकता है। यही बदलाव पीरियड्स के दौरान गर्भधारण की संभावना पैदा करता है।

पीरियड्स में सेक्स करने पर गर्भधारण कैसे हो सकता है?

इसकी सबसे महत्वपूर्ण वजह शुक्राणुओं का महिला के प्रजनन तंत्र में कुछ दिनों तक जीवित रहना है। अनुकूल परिस्थितियों में शुक्राणु लगभग पांच दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

मान लीजिए किसी महिला का मासिक चक्र 24 दिनों का है और उसका ओव्यूलेशन सामान्य से जल्दी हो जाता है। अगर उसने पीरियड्स के आखिरी दिनों में असुरक्षित यौन संबंध बनाया, तो उस दौरान शरीर में पहुंचे शुक्राणु कुछ दिन जीवित रह सकते हैं। यदि इसी बीच ओव्यूलेशन हो जाए, तो शुक्राणु अंडे को निषेचित कर सकते हैं और गर्भधारण संभव है।

यह स्थिति खासतौर पर उन महिलाओं में हो सकती है जिनका मासिक चक्र छोटा है या जिनका ओव्यूलेशन जल्दी होता है। अनियमित पीरियड्स में भी केवल तारीखों के आधार पर सुरक्षित दिनों का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। इसलिए पीरियड्स के दौरान सेक्स को गर्भधारण से बचने का भरोसेमंद तरीका नहीं माना जा सकता।

क्या पीरियड्स के सभी दिनों में गर्भधारण की संभावना एक जैसी होती है?

मासिक चक्र के अलग-अलग दिनों में गर्भधारण की संभावना अलग होती है। आमतौर पर ओव्यूलेशन से पहले के कुछ दिन और ओव्यूलेशन का दिन सबसे अधिक उपजाऊ (Fertile Window) माने जाते हैं।

पीरियड्स के शुरुआती दिनों में गर्भधारण की संभावना आमतौर पर कम होती है, क्योंकि इस समय ओव्यूलेशन होने में अभी कुछ दिन बाकी हो सकते हैं। लेकिन यदि मासिक चक्र छोटा है या ओव्यूलेशन जल्दी होता है, तो पीरियड्स के आखिरी दिनों में बने असुरक्षित यौन संबंध से गर्भधारण हो सकता है। एक और बात ध्यान रखने वाली है कि हर महीने ओव्यूलेशन एक ही तारीख को हो, यह जरूरी नहीं। तनाव, बीमारी, नींद में बदलाव और अन्य शारीरिक कारणों से भी मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है। इसलिए कैलेंडर या मोबाइल ऐप में दिखाई गई तारीख को गर्भधारण से बचने की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन क्या है?

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन (Emergency Contraception) गर्भनिरोध का ऐसा तरीका है जिसका इस्तेमाल असुरक्षित यौन संबंध के बाद अनचाहे गर्भधारण की संभावना कम करने के लिए किया जाता है।

इसकी जरूरत कई परिस्थितियों में पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, बिना किसी गर्भनिरोधक के यौन संबंध बन जाना, कंडोम का फट जाना या फिसल जाना, नियमित गर्भनिरोधक गोलियां लेना भूल जाना या यौन हिंसा की स्थिति में गर्भधारण का जोखिम होना।

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन के मुख्य रूप से दो तरीके हैं। पहला, इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियां और दूसरा, कॉपर इंट्रायूटेराइन डिवाइस यानी कॉपर आईयूडी (Copper IUD)।

यह समझना जरूरी है कि इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन गर्भपात कराने की दवा नहीं है। यह गर्भधारण होने से पहले उसे रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि गर्भधारण पहले ही स्थापित हो चुका है, तो ये गोलियां उसे समाप्त नहीं करतीं।

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल कैसे काम करती है?

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल में ऐसे हार्मोन होते हैं जो ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। भारत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली इमरजेंसी पिल में लेवोनॉरजेस्ट्रेल (Levonorgestrel) नामक हार्मोन होता है।

यह मुख्य रूप से अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया को रोकने या टालने का काम करता है। यदि अंडा बाहर निकलने की प्रक्रिया कुछ समय के लिए टल जाती है, तो शुक्राणुओं के जीवित रहने की अवधि के दौरान अंडा उपलब्ध नहीं हो पाता और निषेचन की संभावना कम हो जाती है।

एक अन्य प्रकार की इमरजेंसी पिल में यूलिप्रिस्टल एसीटेट (Ulipristal Acetate) होता है। यह भी ओव्यूलेशन को टालने में मदद करता है और कुछ परिस्थितियों में लेवोनॉरजेस्ट्रेल की तुलना में अधिक समय तक प्रभावी रह सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इमरजेंसी पिल मुख्य रूप से ओव्यूलेशन को रोकने या टालने के जरिए काम करती है। यदि ओव्यूलेशन हो चुका है, तो इन गोलियों का प्रभाव सीमित हो सकता है। इसलिए इन्हें जितनी जल्दी लिया जाए, उतना बेहतर है।

इमरजेंसी पिल कितने समय के भीतर लेनी चाहिए?

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अलग-अलग गोलियों के लिए समय-सीमा अलग हो सकती है।

लेवोनॉरजेस्ट्रेल वाली इमरजेंसी पिल को असुरक्षित यौन संबंध के बाद जितनी जल्दी हो सके, आदर्श रूप से 72 घंटे यानी तीन दिनों के भीतर लेना चाहिए। कुछ अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देश इसके इस्तेमाल को 120 घंटे तक की अवधि में भी देखते हैं, लेकिन समय बढ़ने के साथ इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।

यूलिप्रिस्टल एसीटेट वाली गोली 120 घंटे यानी पांच दिनों तक इस्तेमाल की जा सकती है। खासकर 72 से 120 घंटे के बीच यह लेवोनॉरजेस्ट्रेल की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।

एक तीसरा विकल्प कॉपर आईयूडी है, जिसे प्रशिक्षित डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी असुरक्षित यौन संबंध के पांच दिनों के भीतर गर्भाशय में लगा सकते हैं। यह इमरजेंसी गर्भनिरोध का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।इसलिए केवल यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि अगली सुबह या अगले दिन गोली ले लेंगे। सही विकल्प और समय के लिए डॉक्टर या फार्मासिस्ट से जल्द सलाह लेना बेहतर है।

कॉपर आईयूडी इमरजेंसी गर्भनिरोध में कैसे काम करता है?

कॉपर आईयूडी एक छोटा टी-आकार का उपकरण होता है, जिसे डॉक्टर गर्भाशय के अंदर लगाते हैं। इसमें मौजूद तांबा (Copper) ऐसे बदलाव पैदा करता है जो शुक्राणुओं की गति और उनकी निषेचन करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। इससे अंडे और शुक्राणु के मिलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

यदि इसे असुरक्षित यौन संबंध के पांच दिनों के भीतर लगाया जाए, तो यह 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावी हो सकता है। इसकी एक खास बात यह है कि इसे इमरजेंसी गर्भनिरोध के रूप में इस्तेमाल करने के बाद भी नियमित गर्भनिरोधक के तौर पर जारी रखा जा सकता है।

हालांकि, कॉपर आईयूडी लगवाने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की जरूरत होती है। यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।

इमरजेंसी पिल लेने के बाद क्या पीरियड्स पर असर पड़ता है?

इमरजेंसी पिल लेने के बाद मासिक चक्र में कुछ बदलाव हो सकते हैं। अगला पीरियड सामान्य समय से कुछ दिन पहले या बाद में आ सकता है। कुछ महिलाओं को हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग भी हो सकती है।

इसके अलावा, मतली, सिरदर्द, थकान, पेट में हल्का दर्द या स्तनों में संवेदनशीलता जैसे अस्थायी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये आमतौर पर कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं।

अगर गोली लेने के बाद उल्टी हो जाए, तो यह इस बात पर निर्भर करता है कि गोली लेने के कितनी देर बाद उल्टी हुई। ऐसी स्थिति में दोबारा खुराक की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

यदि अगला पीरियड अपेक्षित तारीख से सात दिन से अधिक देर से आए, तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए। असुरक्षित यौन संबंध के लगभग तीन सप्ताह बाद किया गया टेस्ट भी गर्भधारण की स्थिति जानने में मदद कर सकता है।

क्या इमरजेंसी पिल बार-बार लेना सुरक्षित है?

इमरजेंसी पिल को जरूरत पड़ने पर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। बार-बार इस्तेमाल से बांझपन होने का कोई प्रमाण नहीं है और इससे भविष्य में गर्भधारण करने की क्षमता स्थायी रूप से खत्म नहीं होती।

हालांकि, इसे नियमित गर्भनिरोधक तरीके के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। बार-बार लेने से मासिक चक्र अनियमित हो सकता है और सामान्य गर्भनिरोधक तरीकों की तुलना में यह गर्भधारण रोकने का कम भरोसेमंद विकल्प है।

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार इमरजेंसी पिल की जरूरत पड़ रही है, तो कंडोम, नियमित गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर आईयूडी या अन्य उपयुक्त तरीकों पर स्वास्थ्यकर्मी से चर्चा करना बेहतर है। यह भी ध्यान रखें कि इमरजेंसी पिल भविष्य में होने वाले यौन संबंधों से गर्भधारण को नहीं रोकती। गोली लेने के बाद दोबारा असुरक्षित यौन संबंध बनाने पर फिर गर्भधारण का जोखिम हो सकता है।

क्या इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन यौन संक्रमण से भी बचाता है?

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल और कॉपर आईयूडी का उद्देश्य गर्भधारण रोकना है। ये एचआईवी (HIV), क्लैमाइडिया, गोनोरिया या अन्य यौन संचारित संक्रमणों (STIs) से सुरक्षा नहीं देते।

यौन संक्रमणों से बचाव के लिए कंडोम का सही और नियमित इस्तेमाल जरूरी है। यदि असुरक्षित यौन संबंध हुआ है और संक्रमण का जोखिम है, तो डॉक्टर से जांच और जरूरी सलाह लेनी चाहिए। एचआईवी के संभावित संपर्क की स्थिति में पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) नामक दवा का विकल्प होता है, जिसे जल्द से जल्द और अधिकतम 72 घंटे के भीतर शुरू करना जरूरी है।

सबसे अहम बात यह है कि इमरजेंसी गर्भनिरोध को नियमित गर्भनिरोध का विकल्प नहीं समझना चाहिए। यदि गर्भधारण नहीं चाहिए, तो पहले से उपयुक्त गर्भनिरोधक तरीका अपनाना और जरूरत पड़ने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।

Neel Mani Lal
ABOUT THE AUTHOR

Neel Mani Lal

neelmanilal@gmail.com
Next Story