TRENDING TAGS :
Health Tips: रात में बार-बार खुलती है नींद? सोते समय दिमाग तक नहीं पहुंच रही पर्याप्त नींद, जानें क्यों ?
Sleep Apnea Warning Signs: विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते वक़्त व्यक्ति का ऊपरी श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है।
Sleep Apnea Warning Signs
Sleep Apnea Warning Signs: क्या आपकी नींद रात में बार-बार टूट जाती है? क्या आप सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करते हैं या आपको खर्राटों की समस्या है? अगर ऐसा है तो इसे सामान्य समस्या समझकर अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार नींद खुलना और सोते समय सांस रुकना "ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया" (OSA) नामक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जो सीधे तौर पर दिमाग की सेहत को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते वक़्त व्यक्ति का ऊपरी श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके कारण सांस लेने में रुकावट आती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यह दिक्कत पूरी रात में कई बार हो सकती है, जिससे दिमाग और शरीर दोनों पर नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ता है।
दिमाग तक कम पहुंचती है ऑक्सीजन
डॉक्टरों के मुताबिक, स्लीप एपनिया का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बार-बार कम हो जाती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में "इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया" कहा जाता है। जब खून में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, तो दिमाग की कोशिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है।
रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों के दिमाग के उन हिस्सों पर असर पड़ सकता है जो याददाश्त, ध्यान और फैसला लेने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। ऐसे लोगों को चीजें भूलने, एकाग्रता की कमी और मानसिक थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
नींद की गुणवत्ता भी होती है खराब
स्लीप एपनिया के कारण व्यक्ति को बार-बार सूक्ष्म रूप से जागना पड़ता है, हालांकि कई बार उसे इसका एहसास भी नहीं होता। इससे गहरी और आरामदायक नींद पूरी नहीं हो पाती।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गहरी नींद और REM Sleep दिमाग की रिकवरी, सीखने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन के लिए बेहद जरूरी होती है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है तो दिनभर नींद आना, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग और कामकाज की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बढ़ सकता है स्ट्रोक और डिमेंशिया का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्लीप एपनिया केवल नींद की समस्या नहीं है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। लगातार ऑक्सीजन की कमी और सूजन के कारण रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे दिमाग में रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है।
हालिया अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि लंबे समय तक इलाज न कराने पर स्लीप एपनिया अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
वक़्त रहते कराएं इलाज
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी बात यह है कि स्लीप एपनिया का प्रभावी इलाज संभव है। CPAP थेरेपी, वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार अपनाने से स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।
यदि आपको खर्राटे आते हैं, रात में बार-बार नींद खुलती है या दिनभर अत्यधिक थकान महसूस होती है, तो इसे हल्के में न लें। समय पर जांच और इलाज न केवल आपकी नींद बेहतर बना सकता है, बल्कि दिमाग और दिल को गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है।


