TRENDING TAGS :
IIT Guwahati Cancer Research: कैंसर इलाज में भारत की बड़ी छलांग! IIT गुवाहाटी की RK-251 स्मार्ट दवा सीधे कैंसर सेल्स पर करेगी वार
IIT Guwahati Cancer Research: IIT गुवाहाटी और IASST के वैज्ञानिकों ने RK-251 स्मार्ट एंटी-कैंसर दवा विकसित की है। वहीं नकली और चोरी की कैंसर दवाओं के मामले में 17 आरोपी गिरफ्तार हुए।
RK-251 Smart Cancer Drug (Image Credit-Social Media)
नई दिल्ली: कैंसर के पारंपरिक इलाज और कीमोथेरेपी के गंभीर साइड-इफेक्ट्स से जूझ रहे मरीजों के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी समाधान खोज निकाला है। इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से 'RK-251' नामक एक स्मार्ट और लक्षित (टारगेटेड) एंटी-कैंसर दवा विकसित की है। यह दवा शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री' में इस शोध के परिणाम प्रकाशित हुए हैं।
पारंपरिक कीमोथेरेपी के दौरान कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं, जिससे मरीजों में अत्यधिक कमजोरी, बालों का झड़ना, उल्टी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट जैसे गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। IASST के डॉ. असीस बाला और IIT गुवाहाटी के डॉ. कृष्णा पी. भाबक के नेतृत्व में विकसित यह नई दवा इन दुष्प्रभावों को खत्म करने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
कैसे काम करता है 'RK-251' का मॉलिक्यूलर स्विच?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दवा शरीर में एक 'स्मार्ट मॉलिक्यूलर स्विच' की तरह काम करती है:
निष्क्रिय अवस्था: जब तक यह दवा रक्त परिसंचरण में रहती है, पूरी तरह निष्क्रिय (Inactive) रहती है और स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
कैंसर वातावरण में सक्रियण: कैंसर कोशिकाओं के भीतर 'रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज' (ROS) का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में बहुत अधिक होता है। जैसे ही यह दवा कैंसर सेल के संपर्क में आती है, उच्च ROS स्तर इसे सक्रिय कर देता है।
घातक प्रोटीन पर वार: सक्रिय होते ही दवा से NBDHEX नामक शक्तिशाली एक्टिव कंपाउंड निकलता है। यह कंपाउंड कैंसर कोशिकाओं में मौजूद GSTP1 जैसे प्रोटीन को ब्लॉक कर देता है, जो कैंसर सेल्स को जीवित रखने और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बनाने में मदद करते हैं।
वैज्ञानिकों ने जेब्राफिश (Zebrafish) के भ्रूण और आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) की कोशिकाओं पर इसका सफल प्री-क्लीनिकल परीक्षण किया है। हालांकि, इंसानों पर क्लीनिकल इस्तेमाल से पहले इसे अभी कई स्तरों के मानव परीक्षणों (ह्यूमन ट्रायल्स) से गुजरना होगा।
नकली और चोरी की कैंसर दवाएं बेचने वाले बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़, ₹9 करोड़ की दवाएं जब्त
कैंसर इलाज में एक तरफ जहां वैज्ञानिक नई उम्मीदें जगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की नकली और अस्पतालों से चोरी की गई जीवनरक्षक दवाइयों का अवैध कारोबार करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, राजस्थान और हरियाणा में छापेमारी कर सिंडिकेट के 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त एच.जी.एस. धालीवाल के अनुसार, यह गिरोह सरकारी और बड़े निजी अस्पतालों से चोरी की गई कैंसर की महंगी दवाइयां महज 10 से 15 प्रतिशत कीमत में खरीदता था और फिर जरूरतमंद मरीजों के तीमारदारों को 50 प्रतिशत तक की छूट का झांसा देकर बेच देता था।
केमिकल से मिटाते थे बैच नंबर और एक्सपायरी
जांच में सामने आया कि आरोपी एसीटोन जैसे केमिकल का इस्तेमाल कर शीशियों और डिब्बों से असली बैच नंबर, 'फॉर गवर्नमेंट सप्लाई ओनली' की मोहर और एमआरपी मिटा देते थे। इसके बाद पुरानी शीशियों में नकली या मिलावटी दवाएं भरकर बिना वैध लाइसेंस या बिल के खुले बाजार में सप्लाई करते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹9 करोड़ मूल्य की 988 भरी हुई दवा शीशियां, खाली पैकेजिंग सामग्री, 3,021 अन्य दवाएं और ₹50 लाख नकद बरामद किए हैं। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े वित्तीय लेन-देन, शेल कंपनियों और अस्पतालों के संदेहास्पद कर्मचारियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।


