Health News: बहुत गर्म चाय-कॉफी से भोजन नली के एक प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ने के संकेत

Health News: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के करीब 9.77 लाख लोगों के अध्ययन में बहुत गर्म पेय और भोजन नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच संबंध मिला है। जानिए चाय-कॉफी या तापमान में क्या है अहम।

Newstrack Network
Published on: 10 Sept 2026 9:29 PM IST
Very Hot Tea Cancer Risk
X

Very Hot Tea Cancer Risk (Image Credit-Social Media)

लंदन। अगर आप चाय या कॉफी को कप में डालते ही पीना शुरू कर देते हैं और उसे बेहद गर्म ही पसंद करते हैं, तो अपनी इस आदत पर थोड़ा विचार करना जरूरी हो सकता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक बड़े अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग गर्म पेय को ‘बहुत गर्म’ पीना पसंद करते हैं, उनमें भोजन नली के एक खास प्रकार के कैंसर—स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC)—का जोखिम ‘गुनगुने’ पेय पसंद करने वालों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक था।

हालांकि, इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि चाय या कॉफी खुद कैंसर का कारण हैं। शोध में मुख्य संबंध पेय के तापमान से सामने आया है। यानी चिंता चाय या कॉफी से ज्यादा उसे अत्यधिक गर्म अवस्था में पीने की आदत को लेकर है।

करीब 9.8 लाख लोगों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

ऑक्सफोर्ड पॉपुलेशन हेल्थ के शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक और मिलियन वुमेन स्टडी से करीब 9.8 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों की गर्म पेय पीने की आदतों और बाद के स्वास्थ्य परिणामों का लंबे समय तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने गर्म पेय के तापमान और भोजन नली के कैंसर के अलग-अलग प्रकारों के बीच संबंध का आकलन किया।

प्रतिभागियों से पूछा गया था कि वे अपने गर्म पेय को सामान्य तौर पर किस तापमान पर पीना पसंद करते हैं। इसके आधार पर उन्हें ‘गर्म’, ‘बहुत गर्म’ और अपेक्षाकृत कम गर्म पेय पीने वाले समूहों में देखा गया।

‘बहुत गर्म’ पेय वालों में करीब तीन गुना जोखिम

अध्ययन में पाया गया कि ‘गर्म’ पेय पसंद करने वालों में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम ‘गुनगुने’ पेय पसंद करने वालों की तुलना में करीब 1.7 गुना था। वहीं, ‘बहुत गर्म’ पेय पीने वालों में यह जोखिम करीब तीन गुना पाया गया।

यहां यह समझना जरूरी है कि यह सापेक्ष जोखिम है। इसका अर्थ यह नहीं है कि बहुत गर्म चाय पीने वाले हर तीन लोगों में से एक को कैंसर हो जाएगा। भोजन नली का यह कैंसर अपेक्षाकृत दुर्लभ है और किसी व्यक्ति का वास्तविक जोखिम कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।

हर तरह के भोजन नली कैंसर से नहीं मिला संबंध

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तापमान का संबंध भोजन नली के हर प्रकार के कैंसर से समान रूप से नहीं मिला। खास तौर पर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के साथ मजबूत संबंध सामने आया, जबकि भोजन नली के दूसरे प्रमुख प्रकार एडेनोकार्सिनोमा के लिए ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया।

इसलिए यह कहना कि ‘बहुत गर्म चाय से भोजन नली के हर कैंसर का खतरा तीन गुना हो जाता है’, अध्ययन के निष्कर्ष को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना होगा।

दिन में ज्यादा गर्म पेय लेने पर भी बढ़ा जोखिम

शोधकर्ताओं ने पेय की मात्रा और तापमान दोनों को देखा। अध्ययन में पाया गया कि दिन में छह या उससे अधिक गर्म पेय लेने वालों में छह से कम गर्म पेय लेने वालों की तुलना में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम करीब 71 प्रतिशत अधिक था, जब पेय के तापमान को ध्यान में रखा गया।

इससे संकेत मिलता है कि सिर्फ पेय का तापमान ही नहीं, बल्कि भोजन नली का बार-बार गर्म तरल के संपर्क में आना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

तापमान से कैसे बढ़ सकता है खतरा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, अत्यधिक गर्म तरल पदार्थ भोजन नली की अंदरूनी परत को बार-बार गर्मी से नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी तापीय क्षति और उससे जुड़ी सूजन कोशिकाओं में ऐसे बदलावों की संभावना बढ़ा सकती है, जो कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इस जैविक प्रक्रिया को पूरी तरह समझने के लिए आगे और शोध की जरूरत है।

नए अध्ययन के निष्कर्ष पहले के अंतरराष्ट्रीय शोध से भी मेल खाते हैं, जिसमें बहुत गर्म पेय और भोजन नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच संबंध के संकेत मिले हैं।

65 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा कहां से आया?

बहुत गर्म पेय को लेकर 65 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा नए ऑक्सफोर्ड अध्ययन से नहीं आया है। 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर पिए जाने वाले बहुत गर्म पेय को मनुष्यों के लिए ‘संभवतः कैंसरकारी’ यानी Group 2A में वर्गीकृत किया था।

IARC का यह वर्गीकरण चाय या कॉफी में मौजूद किसी विशेष पदार्थ को लेकर नहीं था, बल्कि अत्यधिक गर्म तापमान पर पेय पीने से जुड़े जोखिम पर आधारित था।

अध्ययन की एक बड़ी सीमा भी है

शोध की एक महत्वपूर्ण सीमा यह है कि प्रतिभागियों के पेय का वास्तविक तापमान थर्मामीटर से नहीं मापा गया था। लोगों ने स्वयं बताया कि वे अपना पेय ‘गर्म’ या ‘बहुत गर्म’ किस तरह पसंद करते हैं। इसलिए अलग-अलग लोगों के लिए इन श्रेणियों का वास्तविक तापमान अलग हो सकता है।

इस वजह से यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी निश्चित तापमान पर पहुंचते ही कैंसर का जोखिम बिल्कुल तीन गुना हो जाता है। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष तापमान की श्रेणियों और कैंसर जोखिम के बीच संबंध पर आधारित हैं।

चाय-कॉफी छोड़ने की जरूरत नहीं

इस अध्ययन का संदेश चाय या कॉफी पूरी तरह छोड़ने का नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि पेय को खौलता हुआ या मुंह जलाने वाली गर्म अवस्था में पीने से बचें। कप में चाय या कॉफी डालने के बाद उसे थोड़ा ठंडा होने दें और तब पिएं जब वह आराम से पीने लायक हो।

विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म पेय को कितनी देर ठंडा करना चाहिए, इसका एक ही समय सभी परिस्थितियों के लिए तय नहीं किया जा सकता। कप, पेय की मात्रा और वातावरण के तापमान जैसे कई कारक इसके ठंडा होने की गति बदलते हैं। इसलिए व्यावहारिक सलाह यही है कि पेय इतना गर्म न हो कि मुंह या जीभ जलने लगे।

तंबाकू और शराब भी बड़े जोखिम कारक

भोजन नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के जोखिम को केवल गर्म पेय के संदर्भ में देखना सही नहीं होगा। तंबाकू और शराब इस प्रकार के कैंसर के स्थापित प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसलिए कैंसर से बचाव के लिहाज से तंबाकू से दूरी और शराब का सेवन सीमित करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

लगातार निगलने में दिक्कत हो तो कराएं जांच

भोजन निगलने में लगातार परेशानी, खाना अटकने का एहसास, निगलते समय दर्द, बिना वजह वजन कम होना, लगातार बदहजमी या सीने में जलन जैसे लक्षण बने रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। इन लक्षणों का मतलब अपने आप कैंसर नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने पर उन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

क्या है अध्ययन का सीधा संदेश?

ऑक्सफोर्ड के इस बड़े अध्ययन से सबसे व्यावहारिक संदेश यही निकलता है कि चाय या कॉफी से डरने की जरूरत नहीं, लेकिन उसे बहुत ज्यादा गर्म पीने की आदत से बचना समझदारी है। अध्ययन में अत्यधिक गर्म पेय और भोजन नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच मजबूत संबंध मिला है, लेकिन यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है और इससे अकेले यह साबित नहीं होता कि गर्म पेय ही कैंसर का प्रत्यक्ष कारण है।

इसलिए अगली बार चाय या कॉफी का कप हाथ में आए तो उसे तुरंत गटकने के बजाय थोड़ा ठंडा होने दें—स्वाद भी बना रहेगा और मुंह जलने का खतरा भी कम होगा।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story