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भारत में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला Weekly Insulin, साल में 365 नहीं सिर्फ 52 इंजेक्शन
Weekly Insulin India Launch 2026: भारत में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला साप्ताहिक इंसुलिन, साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन
Weekly Insulin India Launch 2026
Weekly Insulin India Launch 2026: लोगों के बीच बेहद आम बीमारी बन चुकी डायबिटीज के इलाज में भारत ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने इसी महीने की 9 जुलाई 2026 को भारत में Avicli (Insulin Icodec) लॉन्च कर दिया है। यह दुनिया का पहला ऐसा हफ्ते में एक बार लगाया जाने वाला बेसल इंसुलिन है। अब तक जिन मरीजों को हर दिन इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता था, उन्हें साल में करीब 365 बार सुई लगानी पड़ती थी। नई दवा के आने के बाद यह संख्या घटकर सिर्फ 52 इंजेक्शन सालाना रह सकती है। हालांकि, यह दवा डायबिटीज का इलाज नहीं है, बल्कि ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने का नया विकल्प माना जा रहा है।
भारत बना दुनिया का छठा देश
भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां इंसुलिन आइकोडेक उपलब्ध है। इससे पहले यह दवा यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्विट्जरलैंड और कनाडा जैसे देशों में लॉन्च हो चुकी है। भारत में इसकी एंट्री इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि देश में करोड़ों लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है जिन्हें लंबे समय तक इंसुलिन थेरेपी की जरूरत पड़ती है।
क्या है बेसल इंसुलिन और अविक्लि इंसुलिन कैसे अलग है?
बेसल इंसुलिन वह इंसुलिन होता है जो पूरे दिन शरीर में धीरे-धीरे काम करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। अभी तक उपलब्ध अधिकांश बेसल इंसुलिन रोजाना एक या दो बार लगाना पड़ता था।
नई दवा Insulin Icodec को इस तरह तैयार किया गया है कि यह शरीर में बहुत धीरे-धीरे रिलीज होती है। यह खून में मौजूद एल्ब्यूमिन प्रोटीन से जुड़कर सात दिनों तक लगातार असर बनाए रखती है। यही वजह है कि मरीज को हर दिन इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
साल में 365 नहीं, सिर्फ 52 इंजेक्शन
इस दवा का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है। अगर कोई मरीज अभी रोजाना बेसल इंसुलिन ले रहा है, तो उसे सप्ताह में सात इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। अविक्लि इंसुलिन (Avicli) के साथ वही काम सप्ताह में सिर्फ एक इंजेक्शन से हो सकता है।
यानी पूरे साल में इंजेक्शन की संख्या 365 से घटकर सिर्फ 52 रह जाएगी। इससे न केवल बार-बार सुई लगाने की परेशानी कम होगी, बल्कि इलाज के प्रति मरीजों की नियमितता भी बढ़ सकती है।
40% सस्ती होने का दावा कैसे?
पहली नजर में इसकी कीमत अधिक लग सकती है। कंपनी ने एक प्री-फिल्ड पेन की कीमत 2,611 रुपये रखी है। लेकिन 40% तक किफायती होने का दावा दवा की कीमत पर नहीं, बल्कि पूरी इंसुलिन थेरेपी के कुल खर्च पर आधारित है। कम इंजेक्शन, कम सुइयों का इस्तेमाल, बार-बार इंजेक्शन लगाने की जरूरत में कमी और इलाज के बेहतर पालन से कुल खर्च में कमी आ सकती है। हालांकि वास्तविक बचत हर मरीज की दवा, डोज और इलाज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कौन ले सकता है यह दवा?
अविक्लि इंसुलिन केवल टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए मंजूर किया गया है। जिन मरीजों को डॉक्टर बेसल इंसुलिन की सलाह देते हैं। उनके लिए यह नया विकल्प हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि इसे खुद से शुरू नहीं किया जा सकता। डॉक्टर पहले मरीज की मौजूदा इंसुलिन डोज, ब्लड शुगर और स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करेंगे, उसके बाद ही साप्ताहिक डोज तय करेंगे।
किन लोगों को नहीं लेना चाहिए?
यह दवा हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। फिलहाल इसे टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए मंजूरी नहीं मिली है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में भी इसका उपयोग डॉक्टर की विशेष सलाह के बिना नहीं किया जाना चाहिए। गंभीर लिवर या किडनी रोग वाले मरीजों में भी अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। इसके अलावा, किसी भी इंसुलिन की तरह इसमें भी लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) का खतरा रहता है। इसलिए भोजन छोड़ना या डोज में मनमानी करना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर क्यों मान रहे हैं इसे बड़ा बदलाव?
डायबिटीज पर चिकित्सकों का मानना है कि रोजाना इंजेक्शन लगाने की मजबूरी कई मरीजों को इलाज बीच में छोड़ने पर मजबूर कर देती है। हफ्ते में सिर्फ एक इंजेक्शन होने से इलाज का पालन करना आसान होगा और मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि शुरुआती दिनों में सही डोज तय करना बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कहां मिलेगी नई दवा?
नोवो नॉर्डिस्क ने अविक्लि इंसुलिन को देश के प्रमुख शहरों के अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स के जरिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में इसके ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होने की संभावना है। यह दवा केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलेगी।
क्या यह डायबिटीज को खत्म कर देगी?
अविक्लि इंसुलिन डायबिटीज का स्थायी इलाज नहीं है और न ही यह बीमारी को जड़ से खत्म करती है। इसका उद्देश्य केवल ब्लड शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना और मरीज के लिए इंसुलिन थेरेपी को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
इसके साथ भी संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन पहले की तरह जरूरी रहेगा। यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह नई तकनीक लाखों टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के लिए इलाज को पहले से कहीं आसान और अधिक आरामदायक बना सकती है।


