Sexual Abstinence Effects: लंबे समय तक सेक्स न करने से शरीर में क्या होता है? ब्रह्मचर्य का सच

Sexual Abstinence Effects: लंबे समय तक सेक्स न करने से शरीर, हार्मोन, वीर्य, टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं की योनि पर क्या असर पड़ता है? जानिए ब्रह्मचर्य और सेक्सुअल एब्स्टिनेंस का वैज्ञानिक सच।

Yogesh Mishra
Published on: 23 Aug 2026 5:29 PM IST
Sexual Abstinence Effects: लंबे समय तक सेक्स न करने से शरीर में क्या होता है? ब्रह्मचर्य का सच
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Sexual Abstinence Effects Explained in Hindi: सेलिबेसी (celi bacy) यानी जानबूझकर यौन संबंधों से दूर रहना। इसे केवल 'सेक्स न मिलना' समझना ठीक नहीं है। कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से वर्षों तक सेक्स से दूर रह सकता है। धार्मिक कारणों से, आध्यात्मिक जीवन के लिए, निजी पसंद से या किसी दूसरे कारण से। वहीं कोई व्यक्ति सेक्स या भावनात्मक निकटता चाहता हो, लेकिन उसे न मिल रही हो। दोनों स्थितियों में शरीर भले ही सेक्स न कर रहा हो लेकिन मन का अनुभव बिल्कुल अलग हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लंबे समय तक सेक्स न करने से शरीर को कोई नुकसान होता है? क्या पुरुष के शरीर में वीर्य (semen) जमा होता रहता है? क्या टेस्टोस्टेरोन बढ़ जाता है? क्या महिलाओं की योनि में कोई बदलाव आता है? और क्या कई साल तक सेक्स न करने के बाद शरीर सामान्य रूप से दोबारा यौन संबंध बना सकता है?

इन सवालों के जवाब में इंटरनेट पर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन विज्ञान की तस्वीर इससे काफी अलग है।

क्या सेक्स करना प्राकृतिक है और सेक्स न करना अप्राकृतिक?

मनुष्य में यौन इच्छा होना बिल्कुल प्राकृतिक है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित सेक्स करना शारीरिक जरूरत है। भोजन, पानी, ऑक्सीजन और नींद के बिना शरीर लंबे समय तक सामान्य रूप से काम नहीं कर सकता। सेक्स की स्थिति ऐसी नहीं है। कोई स्वस्थ व्यक्ति महीनों या वर्षों तक यौन संबंध बनाए बिना भी सामान्य शारीरिक जीवन जी सकता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सेक्स न करने से शरीर में कुछ जमा हो जाता है और उसे बाहर निकालना जरूरी है।

मनुष्य के शरीर में अपनी जरूरतों के अनुसार बदलाव करने की क्षमता होती है। कोई व्यक्ति नियमित यौन जीवन जी सकता है, कोई कभी-कभार यौन संबंध बना सकता है और कोई व्यक्ति जानबूझकर लंबे समय तक ब्रह्मचर्य अपना सकता है।

तीनों स्थितियाँ अपने-आप में बीमारी नहीं हैं।

यहाँ एक महत्वपूर्ण फर्क है। स्वैच्छिक संयम और अनचाहा अकेलापन एक चीज नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से सेक्स नहीं करना चाहता और इस जीवन से संतुष्ट है, तो इसमें अपने-आप कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति प्यार, संबंध या यौन निकटता चाहता है और लगातार अकेलापन या अस्वीकृति झेल रहा है, तो मानसिक तनाव का कारण सेक्स की कमी से ज्यादा अकेलापन और भावनात्मक जरूरतों का पूरा न होना हो सकता है।

पुरुष के शरीर में सेक्स न करने पर वीर्य का क्या होता है?

पुरुष के वृषण (testes) लगातार शुक्राणु बनाते रहते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वीर्य किसी टंकी में भरता रहता है और समय-समय पर उसे बाहर निकालना जरूरी होता है।

शरीर पुराने और उपयोग न किए गए शुक्राणुओं को तोड़कर उनके कुछ हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल कर सकता है। कुछ पुरुषों में नींद के दौरान अनैच्छिक वीर्यस्खलन (ejaculation) भी हो सकता है, जिसे आम बोलचाल में स्वप्नदोष कहा जाता है।

इसका मतलब यह नहीं कि शरीर में बहुत ज्यादा वीर्य जमा हो गया था और अब उसे बाहर निकालना जरूरी था। यह शरीर की सामान्य शारीरिक प्रक्रियाओं में से एक हो सकती है। इसलिए यदि कोई पुरुष कई महीने या साल तक वीर्यस्खलन न करे, तो शरीर किसी तरह के विषैले पदार्थ से भर नहीं जाता।

क्या वीर्य रोकने से टेस्टोस्टेरोन बहुत बढ़ जाता है?

इंटरनेट पर यह दावा खूब मिलता है कि कुछ दिनों या कुछ हफ्तों तक वीर्यस्खलन न करने से टेस्टोस्टेरोन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और आदमी ज्यादा ताकतवर, ज्यादा मर्दाना या ज्यादा ऊर्जावान हो जाता है। इस दावे के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में थोड़े समय के लिए यौन संयम के बाद टेस्टोस्टेरोन में मामूली बदलाव देखे गए हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वीर्यस्खलन रोकने से टेस्टोस्टेरोन लगातार बढ़ता रहता है।

टेस्टोस्टेरोन पर उम्र, नींद, शरीर में फैट, शारीरिक गतिविधि, तनाव, बीमारी, ऊर्जा की उपलब्धता और हार्मोनल व्यवस्था जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

इसलिए यह समझना गलत होगा कि वीर्य शरीर में बचता जाता है और उसी के साथ टेस्टोस्टेरोन भी बढ़ता जाता है। ऐसा कोई जैविक मीटर नहीं है जिसमें वीर्य रोकने पर टेस्टोस्टेरोन का स्तर लगातार ऊपर जाता रहे।

क्या लंबे समय तक सेक्स न करने से पुरुष की यौन क्षमता खत्म हो जाती है?

आम तौर पर नहीं। किसी स्वस्थ पुरुष का लंबे समय तक सेक्स न करना अपने-आप उसकी यौन क्षमता खत्म नहीं करता। नींद के दौरान स्वाभाविक स्तंभन होते रह सकते हैं और यौन उत्तेजना मिलने पर शरीर सामान्य प्रतिक्रिया दे सकता है।

हाँ, उम्र, मधुमेह, रक्तवाहिकाओं की बीमारी, हार्मोन की समस्या, कुछ दवाएँ और मानसिक तनाव स्तंभन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय बाद यौन संबंध बनाते समय परेशानी होती है, तो यह जरूरी नहीं कि इसका कारण सिर्फ लंबे समय तक सेक्स न करना हो।

कई बार उलटा भी हो सकता है। व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी, जिसके कारण उसकी यौन गतिविधि कम हुई।

क्या सेक्स न करने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ता है?

इस विषय पर शोध जरूर हुआ है, लेकिन इंटरनेट पर इसे जितना सीधा बताया जाता है, विज्ञान उतना सीधा निष्कर्ष नहीं देता। एक बड़े लंबे समय तक चले अध्ययन में अधिक बार वीर्यस्खलन की जानकारी देने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का निदान कुछ कम पाया गया था। लेकिन यह केवल एक संबंध था। इससे यह साबित नहीं होता कि कम सेक्स या कम वीर्यस्खलन प्रोस्टेट कैंसर का कारण है।

स्वास्थ्य, उम्र, जीवनशैली और दूसरी कई चीजें इस संबंध को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्रोस्टेट को स्वस्थ रखने के लिए एक निश्चित संख्या में सेक्स करना जरूरी है। ऐसी कोई चिकित्सकीय न्यूनतम संख्या तय नहीं है।

महिलाओं के शरीर में लंबे समय तक सेक्स न करने से क्या होता है?

महिलाओं के बारे में भी कई मिथक हैं। मसलन, यह कहा जाता है कि लंबे समय तक सेक्स न करने से योनि बंद हो जाती है या इतनी सिकुड़ जाती है कि दोबारा सेक्स करना मुश्किल हो जाता है।

स्वस्थ युवा महिला में केवल सेक्स न करने की वजह से ऐसा नहीं होता। योनि एक लचीला और पेशीय अंग है। वह सेक्स न करने की वजह से स्थायी रूप से बंद नहीं हो जाती। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद, स्थिति बदल सकती है। उस समय एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से योनि की दीवार पतली और सूखी हो सकती है तथा उसकी लचक कम हो सकती है।

यह मुख्य रूप से हार्मोन में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया है, केवल सेक्स न करने से नहीं।

लंबे समय बाद सेक्स करने पर दर्द क्यों हो सकता है?

कुछ लोगों को लंबे अंतराल के बाद यौन संबंध बनाने पर असुविधा या दर्द हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर सेक्स करना भूल गया। चिंता या डर के कारण श्रोणि की मांसपेशियाँ अनजाने में कस सकती हैं। पर्याप्त यौन उत्तेजना न होने पर प्राकृतिक चिकनाई कम हो सकती है। उम्र, रजोनिवृत्ति और कुछ दवाएँ भी सूखापन बढ़ा सकती हैं।

इसलिए लंबे अंतराल के बाद शरीर को समय देना जरूरी है। यदि दर्द लगातार हो या हर बार हो, तो उसे सिर्फ “बहुत दिनों बाद सेक्स हुआ” कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संक्रमण, श्रोणि की मांसपेशियों की समस्या, एंडोमेट्रियोसिस या दूसरी चिकित्सकीय स्थितियाँ भी इसकी वजह हो सकती हैं।

क्या सेक्स न करने से कामेच्छा बढ़ती है या कम हो जाती है?

दोनों संभव हैं। कुछ लोगों में लंबे समय तक सेक्स न करने पर यौन इच्छा ज्यादा महसूस हो सकती है। यौन कल्पनाएँ बढ़ सकती हैं और छोटी-छोटी चीजें भी ज्यादा उत्तेजक लग सकती हैं। दूसरे लोगों में धीरे-धीरे सेक्स उनकी रोजमर्रा की प्राथमिकताओं से बाहर हो सकता है और कामेच्छा कम महसूस होने लगती है। इसका कारण यह है कि यौन इच्छा सिर्फ हार्मोन से तय नहीं होती। इसमें मस्तिष्क, आदत, तनाव, रिश्ते, भावनाएँ, अवसर और व्यक्ति का ध्यान, इन सबकी भूमिका होती है।

इसलिए ब्रह्मचर्य अपने-आप कामेच्छा खत्म नहीं करता।

सेक्स न करने से दिमाग में क्या होता है?

सेक्स और चरमोत्कर्ष के दौरान मस्तिष्क में कई तरह के रासायनिक संदेशवाहक सक्रिय होते हैं। इनमें डोपामिन और ऑक्सीटोसिन जैसे पदार्थ भी शामिल हैं।

लेकिन सेक्स न करने से ये प्रणालियाँ बंद नहीं हो जातीं।

मस्तिष्क में पुरस्कार और सुख से जुड़े वही तंत्र भोजन, संगीत, व्यायाम, सामाजिक संपर्क, उपलब्धि और दूसरे सुखद अनुभवों के दौरान भी सक्रिय होते हैं।

यानी अगर कोई व्यक्ति सेक्स नहीं कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके दिमाग में डोपामिन या ऑक्सीटोसिन की कमी हो जाएगी। इसीलिए सेक्स और अंतरंगता को भी एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

कोई व्यक्ति सेक्स के बिना भी प्यार, दोस्ती, स्पर्श, परिवार और सामाजिक जुड़ाव से भरपूर जीवन जी सकता है।

क्या सेक्स तनाव कम करता है?

कुछ लोगों को सेक्स या चरमोत्कर्ष के बाद आराम और नींद बेहतर महसूस हो सकती है। इसका संबंध शरीर और मस्तिष्क में होने वाले कई बदलावों से हो सकता है।

लेकिन इसका उलटा निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि सेक्स नहीं करेंगे तो तनाव बना रहेगा।

व्यायाम, पर्याप्त नींद, ध्यान, संगीत, सामाजिक संपर्क और प्रकृति में समय बिताना भी तनाव कम करने के प्रभावी तरीके हो सकते हैं। इसलिए सेक्स तनाव कम करने का एक रास्ता हो सकता है, लेकिन शरीर की अनिवार्य तनाव-रोधी दवा नहीं है।

क्या ब्रह्मचर्य से शरीर की ऊर्जा बचती है?

आध्यात्मिक परंपराओं में वीर्य को जीवन-ऊर्जा से जोड़कर देखने की लंबी परंपरा रही है। लेकिन इसे जैविक तथ्य नहीं माना जा सकता। शरीर वीर्य बनाने में ऊर्जा जरूर खर्च करता है, लेकिन सामान्य वीर्यस्खलन से इतनी ऊर्जा या पोषक तत्व खत्म नहीं होते कि व्यक्ति कमजोर या “जीवन-ऊर्जा से खाली” हो जाए।

यदि कोई व्यक्ति ब्रह्मचर्य अपनाने के बाद ज्यादा एकाग्रता महसूस करता है, तो इसका वास्तविक अनुभव हो सकता है। लेकिन इसके पीछे यह जरूरी नहीं कि वीर्य की ऊर्जा शरीर में जमा होकर मस्तिष्क में चली गई। संभव है कि वह व्यक्ति अब डेटिंग, यौन संबंध, पोर्न या यौन विचारों में कम समय और ध्यान लगा रहा हो और वही ध्यान पढ़ाई, काम, साधना या दूसरे लक्ष्यों पर जा रहा हो।

क्या हस्तमैथुन सेलिबेसी के खिलाफ है?

इसका कोई एक चिकित्सकीय जवाब नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति सेलिबेसी या ब्रह्मचर्य को किस अर्थ में ले रहा है। कुछ धार्मिक परंपराओं में ब्रह्मचर्य का अर्थ सभी तरह की यौन गतिविधियों से दूरी हो सकता है। दूसरी परिभाषाओं में इसका अर्थ मुख्य रूप से दूसरे व्यक्ति के साथ यौन संबंध न रखना हो सकता है। इसलिए यह ज्यादा धार्मिक और व्यक्तिगत परिभाषा का सवाल है, चिकित्सा का नहीं।

स्वैच्छिक ब्रह्मचर्य और अकेलेपन में इतना फर्क क्यों है?

मान लीजिए कोई व्यक्ति तय करता है कि वह यौन संबंध नहीं बनाएगा। वह अपने फैसले से संतुष्ट है, उसके सामाजिक संबंध अच्छे हैं और उसे इस जीवनशैली में कोई परेशानी नहीं है। दूसरी तरफ एक व्यक्ति संबंध चाहता है, लेकिन उसे साथी नहीं मिल रहा। वह अकेला है, बार-बार अस्वीकृति महसूस करता है और भावनात्मक निकटता की कमी से परेशान है। दोनों सेक्स नहीं कर रहे हैं। लेकिन दोनों की मानसिक स्थिति बिल्कुल अलग हो सकती है। इसलिए यह कहना बहुत आसान होगा कि सेक्स न करने से अवसाद होता है। ज्यादा सही बात यह है कि अनचाहा अकेलापन, सामाजिक अलगाव और भावनात्मक जरूरतों का पूरा न होना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

क्या सेक्स करने वाले लोग ज्यादा स्वस्थ रहते हैं?

कुछ अध्ययनों में अधिक यौन गतिविधि और बेहतर स्वास्थ्य के बीच संबंध देखा गया है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सेक्स ही स्वास्थ्य को बेहतर बना रहा है। हो सकता है कि स्वस्थ लोग अधिक आसानी से यौन संबंध बना पाते हों। हो सकता है कि अच्छे रिश्तों वाले लोगों का मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो और उनकी यौन गतिविधि भी ज्यादा हो। हो सकता है कि उम्र, आर्थिक स्थिति, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन जैसी दूसरी चीजें दोनों को प्रभावित कर रही हों।

इसलिए चिकित्सा विज्ञान किसी स्वस्थ व्यक्ति को यह नहीं कहता कि स्वस्थ रहने के लिए सप्ताह में इतनी बार सेक्स करना अनिवार्य है।

सेक्स न करने का एक साफ स्वास्थ्य लाभ भी है

यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का यौन संपर्क नहीं करता, तो यौन संपर्क से फैलने वाले संक्रमण और अनचाही गर्भावस्था का जोखिम स्वाभाविक रूप से बहुत कम या समाप्त हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सेक्स अपने-आप अस्वस्थ या खतरनाक है।

सहमति, सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ यौन संबंध सामान्य मानव जीवन का हिस्सा हो सकते हैं। यहाँ दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं। सेक्स स्वस्थ जीवन का हिस्सा हो सकता है और सेक्स न करना भी अपने-आप अस्वस्थ नहीं है।

दस साल तक सेक्स न करने के बाद क्या शरीर दोबारा सामान्य रूप से सेक्स कर सकता है?

अधिकांश स्वस्थ लोगों में हाँ। पुरुष का लिंग केवल सेक्स न करने से काम करना बंद नहीं करता। महिला की योनि सेक्स न करने से स्थायी रूप से बंद नहीं होती। यौन इच्छा दोबारा पैदा हो सकती है और मस्तिष्क तथा शरीर यौन उत्तेजना पर फिर प्रतिक्रिया कर सकते हैं। हाँ, यदि इस दौरान व्यक्ति की उम्र काफी बढ़ गई हो, रजोनिवृत्ति आ गई हो, मधुमेह या रक्तवाहिका की बीमारी हो गई हो, हार्मोन में बदलाव आया हो या मानसिक तनाव बढ़ गया हो, तो यौन प्रतिक्रिया बदल सकती है। लेकिन तब कारण केवल सेलिबेसी नहीं होगा।

फिर ‘इस्तेमाल करो या खो दो’ वाली बात कितनी सही है?

पूरी तरह गलत भी नहीं, लेकिन इसे बहुत सावधानी से समझना चाहिए। यौन प्रतिक्रिया पर रक्तवाहिकाओं का स्वास्थ्य, हार्मोन, तंत्रिका तंत्र और ऊतकों की स्थिति का असर पड़ता है। उम्र और रजोनिवृत्ति के बाद कुछ महिलाओं में नियमित यौन उत्तेजना ऊतकों की लचक और रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद कर सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सेक्स बंद करते ही यौन अंग खराब हो जाएंगे। ज्यादा सही बात यह है कि अच्छा समग्र स्वास्थ्य यौन क्षमता बनाए रखने में ज्यादा महत्वपूर्ण है।

तो क्या सेलिबेसी स्वास्थ्य के लिए अच्छी है?

सेलिबेसी अपने-आप न स्वास्थ्यवर्धक है, न नुकसानदेह।

यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से ब्रह्मचर्य अपनाता है, उससे संतुष्ट है, उसके सामाजिक संबंध अच्छे हैं और वह लगातार अपराधबोध या मानसिक संघर्ष में नहीं है, तो वह लंबे समय तक बिना सेक्स के भी स्वस्थ जीवन जी सकता है। वहीं यदि किसी व्यक्ति का संयम जबरदस्ती, चिंता, अकेलेपन या लगातार दबाई जा रही इच्छा से जुड़ा है, तो उसका मानसिक अनुभव मुश्किल हो सकता है।

यही बात सक्रिय यौन जीवन पर भी लागू होती है। सहमति, सुरक्षा और संतोष पर आधारित यौन जीवन स्वस्थ हो सकता है। लेकिन जोखिमपूर्ण या बाध्यकारी यौन व्यवहार परेशानी पैदा कर सकता है।

इसलिए स्वास्थ्य का असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “सेक्स कितना करते हैं?” बल्कि यह भी है कि “सेक्स और अपनी यौन इच्छा के साथ आपका रिश्ता कैसा है?”

आखिर शरीर में वास्तव में क्या होता है?

लंबे समय तक सेक्स न करने पर शरीर में कोई जहरीला पदार्थ जमा नहीं होता। पुरुषों में वीर्य किसी टंकी की तरह भरता नहीं रहता। पुराने शुक्राणुओं को शरीर दोबारा अवशोषित कर सकता है और कभी-कभी स्वाभाविक रूप से स्वप्नदोष हो सकता है।

टेस्टोस्टेरोन अनिश्चित रूप से बढ़ता नहीं रहता। पुरुष की यौन क्षमता अपने-आप खत्म नहीं होती। महिलाओं की योनि केवल सेक्स न करने की वजह से बंद नहीं होती।

कामेच्छा किसी में बढ़ सकती है, किसी में घट सकती है और इसका संबंध सिर्फ सेक्स की आवृत्ति से नहीं है।

हाँ, कुछ अध्ययनों में अधिक वीर्यस्खलन और प्रोस्टेट कैंसर के कम निदान के बीच संबंध मिला है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सेक्स या वीर्यस्खलन स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात। सेक्स न करना और अकेला होना एक ही बात नहीं है।

कोई व्यक्ति बिना सेक्स के भी प्रेम, दोस्ती, परिवार, स्पर्श, सामाजिक जुड़ाव और संतोष से भरपूर जीवन जी सकता है। वहीं कोई व्यक्ति सेक्स करते हुए भी अकेला और भावनात्मक रूप से परेशान हो सकता है।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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