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High BP Case In Youth: युवाओं में बढ़ रहा ‘साइलेंट किलर’ का खतरा: 25 की उम्र में BP पहुंच रहा 180 तक
High BP Cases In Youth: एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में खुलासा हुआ कि युवा रोज 30 ग्राम तक नमक खा रहे हैं, जिससे हाई बीपी, स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
युवाओं में बढ़ रहा ‘साइलेंट किलर’ का खतरा: 25 की उम्र में BP पहुंच रहा 180 तक (Photo- Social Media)
High BP Cases In Youth: तेज रफ्तार जिंदगी, फास्टफूड की बढ़ती आदत, घंटों बैठकर काम करना और लगातार तनाव अब युवाओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगा है। कभी बढ़ती उम्र की बीमारी माने जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब 25 से 35 साल के युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई युवाओं का ब्लड प्रेशर 180 एमएमएचजी तक पहुंच रहा है, जो लकवा और ब्रेन हेमरेज जैसी जानलेवा स्थितियों का संकेत माना जाता है।
सरोजिनी नायडू में किए गए एक अध्ययन ने इस खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। मेडिसिन विभाग द्वारा 862 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पता चला कि युवाओं में अत्यधिक नमक सेवन और खराब जीवनशैली तेजी से हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप को बढ़ा रही है।
रोज 25 से 30 ग्राम तक नमक खा रहे युवा
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार अध्ययन में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में युवा जरूरत से कई गुना अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं। सामान्य तौर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक खाने की सलाह देते हैं, लेकिन अध्ययन में शामिल कई युवा रोजाना 25 से 30 ग्राम तक नमक ले रहे थे।
यह अतिरिक्त नमक केवल खाने में नहीं। बल्कि नमकीन स्नैक्स, चिप्स, फास्टफूड, पैकेज्ड फूड और कोल्डड्रिंक जैसी चीजों के जरिए शरीर में पहुंच रहा था। अध्ययन में शामिल लगभग 28 फीसदी लोग अत्यधिक नमक सेवन की श्रेणी में पाए गए।
25-35 साल के युवाओं में तेजी से बढ़ रहा हाई बीपी
अध्ययन के अनुसार 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 8.2 फीसदी मरीज उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए। वहीं 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग में यह आंकड़ा 31.7 फीसदी और 51 वर्ष से अधिक आयु वालों में 60.1 फीसदी रहा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि 25-35 वर्ष के 5.6 फीसदी युवाओं का ब्लड प्रेशर 130 से 150 एमएमएचजी के बीच पाया गया, जबकि 2.6 फीसदी युवाओं का बीपी 150 से 180 एमएमएचजी तक पहुंच चुका था। इनमें कॉलेज जाने वाले छात्र और कामकाजी युवा अधिक संख्या में शामिल थे।
फास्टफूड और तनाव बन रहे बड़ी वजह
डॉक्टरों के अनुसार केवल नमक ही नहीं। बल्कि आधुनिक जीवनशैली भी युवाओं को बीमार बना रही है। देर रात तक जागना, जंक फूड खाना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लगातार स्क्रीन टाइम और मानसिक तनाव हाई बीपी के प्रमुख कारण बन रहे हैं।अध्ययन में शामिल कई युवाओं में धूम्रपान की आदत और मोटापा भी पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब फिटनेस और तनाव शरीर की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाते हैं, जिससे रक्तचाप लगातार बढ़ने लगता है।
हाई बीपी से बढ़ रहा हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
मयंक अग्रवाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 150 एमएमएचजी से अधिक पहुंच रहा है तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि 180 एमएमएचजी से ऊपर बीपी पहुंचने पर लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले लकवा और ब्रेन हेमरेज के लगभग 28 फीसदी मरीजों में ब्लड प्रेशर 180 एमएमएचजी से अधिक पाया गया। इनमें युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
दिल और किडनी पर भी पड़ रहा असर
सौरभ नागर के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक हृदय रोगी पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 65 फीसदी मरीजों का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 38 फीसदी मरीज युवा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी रहने पर कार्डिएक अरेस्ट, किडनी खराब होने और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा तीन से पांच गुना तक बढ़ जाता है।
समय रहते सुधर सकती है स्थिति
डॉक्टरों के अनुसार अच्छी बात यह रही कि जिन मरीजों ने समय रहते इलाज, नियमित व्यायाम, फिटनेस और कम नमक वाले भोजन को अपनाया, उनमें से लगभग 62 फीसदी प्राइमरी हाइपरटेंशन के मरीजों की स्थिति में सुधार देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को शुरुआती चरण में नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए लोगों को अपनी जीवनशैली बदलनी होगी। नमक कम करना, धूम्रपान छोड़ना, रोज व्यायाम करना, तनाव कम करना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है।
इन संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सिर दर्द, चक्कर आना, सीने में दर्द, सांस फूलना, धुंधला दिखाई देना, अत्यधिक थकान और बेचैनी जैसे संकेत हाई बीपी के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि कई मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए नियमित बीपी जांच को बेहद जरूरी माना जा रहा है।


