TRENDING TAGS :
दशहरा vs गाँधी जयंती, धर्म और देशप्रेम के एक ही अवसर पर Newstrack survey में जानें जनता की वरीयता?
2 अक्टूबर को मनाए गए गांधी जयंती और दशहरा पर्व को लेकर Newstrack का खास सर्वे। जानिए भारतीयों ने किस पर्व को अधिक महत्व दिया, धर्म और राष्ट्रवाद पर लोगों की अलग-अलग राय।
Newstrack Survey: बीते 2 अक्टूबर को हमारी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के दो सबसे बड़े पर्व एक ही दिन पड़े थे। पहला तो था हर साल की तरह 2 अक्टूबर को ही मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पर्व गाँधी जयंती, और दूसरा हमारी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की धरोहर, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक, हिन्दू धर्म के सबसे पावन पर्वों में से एक दशहरा का पर्व। ऐसे में यह बात तो स्वाभाविक है कि देश के नागरिक किसी एक पर्व की ओर अपने रुझान को वरीयता देते। धर्म को अधिक मानने वाले हो सकता है दशहरा को और राष्ट्रप्रेम की भावना रखने वाले गाँधी जयंती को। वैसे धार्मिकता, देशभक्ति, आस्तिकता और नास्तिकता जैसी भावनाएं किसी व्यक्ति की अपनी भावनाएं होती हैं। इन भावनाओं को ज़ोर जबरदस्ती करके न तो किसी के मन में बसाया जा सकता है और न ही किसी के मन से निकाला जा सकता है। अब बीते 2 अक्टूबर को भारतीय लोगों ने अपनी किस भावना को आगे रखकर दशहरा और गाँधी जयंती में किस पर्व को अधिक महत्व दिया साथ ही दोनों पर्वों को लेकर उनकी मानसिकताएं क्या थी, इसको लेकर Newstrack ने एक सर्वे किया जिसमें हमने सोशल मीडिया के ज़रिये लोगों के मतों को जानने और उन्हें आप तक पहुचाने की कोशिश की है।
लोगों के मत
दशहरा और गाँधी जयंती के एक ही तारीख पर आयोजन को लेकर हमारे सर्वे में लोगों के मिश्रित ओपिनियन आए। कुछ ने दशहरा को वरीयता देने की बात कही तो कुछ ने गांधी जयंती को। वैसे दशहरे का समर्थन करने वाले लोगों की संख्या गाँधी जयंती की अपेक्षा थोड़ी अधिक थी। तो आइए आपको परिचित कराते हैं लोगों की वास्तविक टिप्पड़ियों से...
उमाकांत सावरिया- फेसबूक पर उमाकांत सावरिया ने लिखा- मैं गांधी जी के विचारों को फोलो करने की सलाह दूंगा। धर्म बाद में पहले देशभक्ति और देशभक्ति की अलख इस देश में महात्मा गांधी जी ने जगाई थी। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जी ने ऐसे ही इन्हें महात्मा और राष्ट्रपिता की उपाधि नही दी थी। धर्म किसी भी महान् राष्ट्र के पतन का कारण ही बनता है और किसी को शक है तो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अफगानिस्तान सीरीया बंगलादेश श्रीलंका नेपाल देख सकते हो। हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और मुझे मेरे राष्ट्र पर गर्व है।
साहबराव पाटिल- बहुत ही कम लेकिन जटिल और प्रभावशाली तरीके से साहबराव पाटिल ने अपने मत को लिखा- देश, इंसान और देशभक्ति है, तभी तो धर्म है।
गुप्ता पारुल- सोशल मीडिया पर पारुल नाम की एक यूज़र ने हम तक लिखा- देश, धर्म, शास्त्रों, वेदो और संस्कृति की रक्षा सदैव शस्त्रो से होती है इसलिए शस्त्र धारण करें और पूजन पहले करें! ऐसा उन्होंने दशहरा पर्व को लेकर कहा था, क्योंकि दहशरे पर श्रीराम ने शस्त्र से ही रावण का वध किया था।
मनोज यादव- धर्म को वरीयता देते हुए मनोज यादव ने लिखा- सर्व प्रथम स्वधर्म। धर्म का पालन करने से भक्ति तो स्वाभाविक रूप से आ ही जाती है।
मन मोहन कपरी- महात्मा गाँधी की आलोचना करते हुए मन मोहन कपरी ने सोशल मीडिया पर हमतक लिखा- देशभक्त होते तो देश के दो टुकड़े ना कराते विभाजन न करते, विभाजन के बाद भी आज देश का वही हाल है। क्यों किया था विभाजन किस आधार पर किया था मेरे लिए देश के विभाजन करने वाला पूजनीय नहीं है।


