21 हजार तक सैलरी वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब हर साल मिलेगा बोनस, जानिए कितना और कब तक आएगा पैसा

New Labour Code: 21 हजार रुपये तक सैलरी वालों के लिए बड़ी खबर। सालाना बोनस 8.33 से 20 फीसदी तक होगा, जानिए किसे मिलेगा और कब तक भुगतान होगा।

Aditya Kumar Verma
Published on: 8 Sept 2026 7:12 PM IST
21000 Salary Employees to Get Annual Bonus Under New Labour Code | Check All Calculation
X

image source- Social Media

New Labour Code: केंद्र सरकार (Central Government) के श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) की ओर से दो नए नोटिफिकेशन (Notifications) जारी किए गए हैं। इन नोटिफिकेशन में कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि अब 21 हजार रुपये प्रति महीने तक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को कुछ शर्तों के तहत बोनस (Bonus) का लाभ मिलेगा। पात्र कर्मचारियों को यह बोनस देना नियोक्ता (Employer) के लिए जरूरी होगा।

वहीं, 21 हजार रुपये प्रति महीने से ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह बोनस अनिवार्य नहीं होगा। यानी कंपनी 21 हजार रुपये से ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को बोनस देने के लिए बाध्य नहीं होगी। नए नियम के तहत 21 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारी ही इस बोनस के पात्र होंगे।

30 दिन काम करने की शर्त

नए वेतन आयोग (New Wage Commission) के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019) की धारा 26(1) के अनुसार, 21 हजार रुपये प्रति महीने से कम वेतन पाने वाला कर्मचारी बोनस पाने का हकदार हो सकता है। हालांकि, इसके लिए एक जरूरी शर्त है।

कर्मचारी ने संबंधित साल में कम से कम 30 दिन काम किया होना चाहिए। यानी सिर्फ 21 हजार रुपये तक सैलरी होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बोनस पाने के लिए साल में कम से कम 30 दिन काम करने की शर्त भी पूरी करनी होगी।

कितना मिलेगा सालाना बोनस?

पात्र कर्मचारियों को मिलने वाला सालाना बोनस (Annual Bonus) कम से कम वेतन का 8।33 फीसदी और अधिकतम 20 फीसदी होगा। बोनस की गणना के लिए 7 हजार रुपये प्रति महीने या संबंधित कर्मचारी के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage), इनमें से जो भी ज्यादा होगी, उसे आधार बनाया जाएगा।

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। अगर कोई कर्मचारी 15 हजार रुपये प्रति महीने कमाता है, लेकिन जिस राज्य में वह काम करता है वहां उसके काम के लिए न्यूनतम मजदूरी 10 हजार रुपये तय है, तो नए श्रम कानून (Labour Law) के तहत बोनस की गणना 10 हजार रुपये के आधार पर की जाएगी।

यानी बोनस की गणना में सिर्फ कर्मचारी की वास्तविक सैलरी ही नहीं देखी जाएगी, बल्कि तय नियम के मुताबिक 7 हजार रुपये या लागू न्यूनतम मजदूरी में से जो ज्यादा होगी, उसे आधार बनाया जाएगा।

ऐसे कैलकुलेट होगा बोनस

सालाना बोनस की गणना के लिए दिए गए फॉर्मूले के मुताबिक मिनिमम सैलरी या 7 हजार रुपये, जो भी ज्यादा हो, उसे 8।33 फीसदी से गुणा किया जाएगा और फिर 12 महीनों से गुणा किया जाएगा।

सालाना बोनस = मिनिमम सैलरी या 7 हजार रुपये × 8।33% × 12

अब इसे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी कर्मचारी की न्यूनतम सैलरी 12 हजार रुपये है। चूंकि 12 हजार रुपये, 7 हजार रुपये के बेस प्राइस से ज्यादा हैं, इसलिए बोनस की गणना 12 हजार रुपये के आधार पर होगी।

12000 × 8।33% × 12 = 11,995 रुपये

इसका मतलब है कि 12 हजार रुपये की न्यूनतम सैलरी वाले पात्र कर्मचारी को सालाना कम से कम 11,995 रुपये का बोनस मिलेगा।

बोनस कब तक देना होगा?

नए लेबर कोड (New Labour Code) के तहत बोनस के भुगतान की समय-सीमा भी तय की गई है। ‘कोड ऑन वेजेज, 2019’ (Code on Wages, 2019) की धारा 39(1) के अनुसार, कर्मचारी को बोनस के तौर पर दी जाने वाली पूरी रकम का भुगतान अकाउंटिंग साल खत्म होने के आठ महीने के भीतर उसके बैंक खाते में जमा करना होगा।

हालांकि, अगर नियोक्ता समय बढ़ाने के लिए पर्याप्त कारण बताते हुए आवेदन करता है, तो इस अवधि को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।

इससे पहले ‘पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965’ (Payment of Bonus Act, 1965) की धारा 19 में भी अकाउंटिंग साल खत्म होने के बाद बोनस के भुगतान के लिए आठ महीने की समय-सीमा तय की गई थी।

यानी नए प्रावधानों के तहत 21 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए बोनस का अधिकार और उसके भुगतान की समय-सीमा दोनों को लेकर प्रावधान तय किए गए हैं।

Aditya Kumar Verma
ABOUT THE AUTHOR

Aditya Kumar Verma

Content Writer Mail ID - adityakumarverma993@gmail.comadityakumarverma993@gmail.com

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

Next Story