राघव चड्ढा तो सिर्फ 'ट्रेलर' थे, असली फिल्म तो संदीप पाठक ने दिखाई! समझिये क्यों संदीप का जाना केजरीवाल के लिए जेल जाने से भी बड़ा सदमा है?

आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट! जानें क्यों राघव चड्ढा से ज्यादा संदीप पाठक का साथ छोड़ना अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा झटका है। क्या पंजाब की जीत के सूत्रधार रहे संदीप पाठक के बीजेपी में जाने से AAP का अस्तित्व खतरे में है?

Shivam
Published on: 24 April 2026 7:38 PM IST (Updated on: 24 April 2026 7:38 PM IST)
राघव चड्ढा तो सिर्फ ट्रेलर थे, असली फिल्म तो संदीप पाठक ने दिखाई! समझिये क्यों संदीप का जाना केजरीवाल के लिए जेल जाने से भी बड़ा सदमा है?
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आम आदमी पार्टी में टूट-फूट की घटनाएँ पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार हालात पहली बार इतने गंभीर दिखते हैं। यह टूट अभी पूरी तरह बिखरने जैसी नहीं, लेकिन इसे बड़ा झटका जरूर कहा जा सकता है। एक साथ कई बड़े नेताओं का अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ना सामान्य राजनीतिक घटना नहीं मानी जा सकती। राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों का एक साथ पार्टी से अलग होना अपने आप में बड़ा संकेत है।

अब तक स्थिति यह थी कि अरविंद केजरीवाल ही कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते रहे हैं। शुरुआत संस्थापक सदस्यों योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण से हुई थी। उनके साथ कई अन्य नेता भी या तो पार्टी से हटाए गए या फिर खुद अलग राह पर चले गए।

ऐसा लगता है जैसे यह सब आम आदमी पार्टी के राजनीतिक ढांचे का ही हिस्सा बन गया हो मानो संगठन के भीतर ही कोई मूलभूत समस्या हो। कभी कुमार विश्वास, आशुतोष, आशीष खेतान और शाजिया इल्मी जैसे नेता पार्टी और केजरीवाल के समर्थन में मजबूती से खड़े नजर आते थे, लेकिन आज हालात यह हैं कि संजय सिंह जैसे नेताओं को अकेले मोर्चा संभालना पड़ रहा है।

संदीप पाठक का जाना सबसे बड़ा झटका

हालिया घटनाक्रम में राघव चड्ढा का नाम प्रमुखता से सामने है, लेकिन पार्टी के लिए सबसे गहरा झटका संदीप पाठक और उनके बाद अशोक मित्तल का जाना माना जा रहा है। स्वाति मालीवाल पहले ही पार्टी से अलग हो चुकी थीं।

राघव चड्ढा को हटाकर अरविंद केजरीवाल ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाया था, लेकिन अब वही भी राघव चड्ढा के साथ पार्टी से अलग हो गए हैं।

कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा और उनके साथ कई नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। इन सब घटनाओं ने पार्टी के भीतर अस्थिरता की स्थिति और बढ़ा दी है।

केजरीवाल के करीबी रहे नेता भी अलग

अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे कठिन दौर वह माना जा रहा है जब उनके बेहद करीबी रहे संदीप पाठक ने भी साथ छोड़ दिया। संदीप पाठक को संगठन और रणनीति का अहम चेहरा माना जाता था। उन्होंने पंजाब में पार्टी की रणनीति बनाने से लेकर चुनावी जीत तक में बड़ी भूमिका निभाई थी।

वे उस समय भी केजरीवाल के साथ मजबूती से खड़े रहे जब मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल में थे और खुद केजरीवाल भी मुश्किल हालात का सामना कर रहे थे। उस समय संदीप पाठक को पार्टी का अहम रणनीतिक स्तंभ माना जाता था।

संदीप पाठक का सफर

छत्तीसगढ़ में शुरुआती शिक्षा लेने वाले संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। बाद में वे आईआईटी दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर बने और यहीं से उनका राजनीतिक जुड़ाव शुरू हुआ।

कहा जाता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के लिए किए गए सर्वे और रणनीतिक काम ने पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा मजबूत किया। 2022 के पंजाब चुनावों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही और पार्टी को सत्ता में वापसी मिली। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई।

मौजूदा राजनीतिक स्थिति

फिलहाल पार्टी में दिल्ली और पंजाब दोनों स्तरों पर कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कुछ राज्यसभा सांसद पहले ही अलग हो चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी पार्टी के साथ बने हुए हैं। दिल्ली में संजय सिंह और एनडी गुप्ता जैसे नेता अब भी सक्रिय हैं, वहीं पंजाब में भी कुछ ही प्रमुख चेहरे पार्टी के साथ बचे हैं।

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है, जिससे संगठनात्मक स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।

दिल्ली चुनावों में हार के बाद आम आदमी पार्टी का फोकस पंजाब पर ज्यादा रहा, जहां उसे कुछ उपचुनावों में सफलता भी मिली। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने पार्टी की रणनीति और भविष्य दोनों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Shivam

Shivam

Shivam is a multimedia journalist.

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