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पंजाब में AAP में भूचाल! केजरीवाल के 43 विधायक अचानक गायब... सिसोदिया-मान की 'इमरजेंसी मीटिंग' से बढ़ा सस्पेंस
AAP Punjab crisis 2026: पार्टी के करीब 43 विधायकों के फोन बंद है वो या संपर्क में नहीं हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व की बड़ी चिंता बढ़ गई है।
AAP Punjab crisis 2026 (PHOTO: AI)
AAP Punjab crisis 2026: इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) बेहद गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। एक ओर जहां दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई ने दबाव बढ़ा दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ पंजाब में पार्टी के कई विधायकों से संपर्क न होने की खबरों ने सियासी हलकों में ज़बरदस्त हलचल मचा दी है। हालिया जानकारी के मुताबिक, पार्टी के करीब 43 विधायकों के फोन बंद है वो या संपर्क में नहीं हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व की बड़ी चिंता बढ़ गई है।
जालंधर में बुलाई गई आपात बैठक
जानकारी के मुताबिक, इस स्थिति को संभालने के लिए पंजाब के जालंधर में आम आदमी पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया भी शामिल होंगे। पार्टी ने सभी विधायकों को इस बैठक में शामिल होने के आदेश दिए हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य विधायकों की निष्ठा को गंभीरता से परखना और पार्टी में संभावित टूट को रोकना बताया जा रहा है।
राघव चड्ढा के 'इस' दावे ने बढ़ाया सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी सांसद राघव चड्ढा का एक पुराना दावा भी चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी के पास 63 विधायक मजबूत तरीके से जुड़े हुए हैं। हालांकि, अब 43 विधायकों के संपर्क में न होने की खबर ने इस दावे पर गंभीर रूप से सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर आप पर लगातार निशाना साध रहे हैं।
केजरीवाल पर CBI का शिकंजा
दूसरी तरफ, अरविंद केजरीवाल की बड़ी मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। CBI ने दिल्ली सरकार से जुड़े दो पुराने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है। ये मामले लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिनमें ठेके देने में अनियमितता और वित्तीय बड़ी गड़बड़ी के आरोप हैं।
एक मामले में सुरेंद्र बंसल और उनकी कंपनी पर आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध बड़ा लाभ पहुंचाया गया। वहीं दूसरे मामले में ठेके की प्रक्रिया में गड़बड़ी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
सियासी बयानबाजी तेज
इन घटनाओं के बीच तीखी जनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने केजरीवाल और उनकी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों का प्रयोग कर उन्हें निशाना बना रही है।
पंजाब सरकार पर भी प्रभाव की आशंका
इन सब के बीच पंजाब में यदि विधायकों की नाराजगी या टूट की स्थिति बनती है, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव राज्य की भगवंत मान सरकार पर पड़ सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व इस संकट को संभालने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद तो है कि कितने विधायक पार्टी के साथ बने हुए हैं।
अब आगे क्या?
मौजूदा स्थिति को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। एक ओर CBI की जांच और दूसरी ओर पार्टी के अंदरूनी हालात - दोनों ही आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं।
फिलहाल इस वक़्त सब की निगाहें जालंधर में होने वाली बैठक और CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आम आदमी पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और क्या वह अपने संगठन को एकजुट बनाए रख पाती है या नहीं।


