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Sanjeev Arora ED arrest: सत्येंद्र जैन,सिसोदिया और अब संजीव अरोड़ा...पंजाब में डगमगा रहा है AAP का किला, समझिए कैसे
Sanjeev Arora ED arrest: संजिव अरोड़ा की गिरफ्तारी ने पंजाब में AAP की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ED की कार्रवाई, GST घोटाले के आरोप और BJP-AAP की सियासी जंग ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। जानिए कैसे डगमगाने लगा है AAP का किला।
Sanjeev Arora ED arrest: पंजाब की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे कद्दावर चेहरों में शुमार और लुधियाना वेस्ट से विधायक संजीव अरोड़ा फिलहाल सलाखों के पीछे हैं। कभी राज्यसभा में पार्टी की आवाज बुलंद करने वाले और फिर पंजाब सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के रूप में निवेश की झड़ी लगाने वाले संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया है। यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक प्रतिशोध, दलबदल और आगामी चुनावी बिसात की एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसने पूरे उत्तर भारत की राजनीति को गरमा दिया है।
GST धोखाधड़ी और ED की दबिश: कैसे नपे मंत्री जी?
संजीव अरोड़ा की मुसीबतें 9 मई की सुबह उस वक्त शुरू हुईं, जब ED की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित उनके सरकारी आवास पर पहुंची। उन पर कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। गिरफ्तारी से पहले जांच एजेंसी ने दिल्ली, गुरुग्राम और पंजाब सहित उत्तर भारत के पांच अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। ED का दावा है कि अरोड़ा जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। फिलहाल वे कस्टडी में हैं और 14 मई को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या उन्हें राहत मिलेगी या जेल की रातें और लंबी होंगी।
बीजेपी नेताओं जैसी राहत की गुहार
अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देते हुए संजीव अरोड़ा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं। उनके वकील पुनीत बाली ने कोर्ट में एक बेहद दिलचस्प दलील पेश की है। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की है कि संजीव अरोड़ा को भी वैसी ही सुरक्षा और राहत दी जाए, जैसी हाल ही में उन नेताओं को मिली है जो आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं।
वकील का इशारा संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता की ओर था। राजिंदर गुप्ता वही शख्स हैं, जिन्हें संजीव अरोड़ा के राज्यसभा छोड़ने के बाद उनकी जगह भेजा गया था, लेकिन वे बाद में राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में चले गए। कोर्ट में कहा गया कि पंजाब में 'राजनीतिक प्रतिशोध' की लड़ाई चल रही है और अरोड़ा को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने पाला बदलने से इनकार कर दिया। अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी को मौलिक अधिकारों का हनन करार दिया है।
केजरीवाल का जज्बे को सलाम
इस पूरी कानूनी लड़ाई के बीच आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पूरी मजबूती से अपने मंत्री के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर संजीव अरोड़ा के साहस की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, "संजीव अरोड़ा ने बीजेपी में शामिल होने के आसान रास्ते के बजाय जेल की कठिन राह चुनी। मुसीबत के समय ही इंसान का असली चरित्र पता चलता है, उन्हें मेरा सलाम!"
केजरीवाल यहीं नहीं रुके, उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब के लोग 'धक्का' (धौंस) बर्दाश्त नहीं करते। उन्होंने चेतावनी दी कि जितनी ज्यादा ED की रेड होगी, बीजेपी की उतनी ही सीटों पर जमानत जब्त हो जाएगी। केजरीवाल का आरोप है कि बीजेपी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर उनके सांसदों को तोड़ रही है, लेकिन संजीव अरोड़ा जैसे नेता झुकने को तैयार नहीं हैं।
लुधियाना वेस्ट से मंत्री पद तक: संजीव अरोड़ा की अहमियत
संजीव अरोड़ा का राज्यसभा से पंजाब की कैबिनेट तक का सफर बहुत छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली रहा है। जब अरविंद केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा दिलाकर लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में उतारा, तब कई अटकलें लगाई गई थीं। विरोधियों का कहना था कि केजरीवाल खुद राज्यसभा जाने के लिए यह सीट खाली करवा रहे हैं। हालांकि, केजरीवाल ने खुद लुधियाना में डेरा डाल दिया और व्यापारियों से वादा किया कि अरोड़ा मंत्री बनकर उनके कारोबार की कायाकल्प कर देंगे।
लुधियाना वेस्ट की जीत केजरीवाल के लिए दिल्ली की चुनावी हार के बाद एक बड़ी संजीवनी साबित हुई थी। मंत्री बनने के बाद अरोड़ा ने औद्योगिक निवेश लाने के लिए जिस रफ्तार से काम किया, उसकी चर्चा आज भी पंजाब के व्यापारिक हलकों में होती है। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी पर मनीष सिसोदिया ने भी उन्हें एक 'विजनरी' नेता करार दिया है।
पंजाब की रणभेरी: क्या दलबदल का बदला लेगी जनता?
7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में चले जाने के बाद संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी ने आम आदमी पार्टी को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक कर दिया है। पंजाब विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, यह मामला 'पंजाबी अस्मिता' बनाम 'दिल्ली की सत्ता' का रूप लेता जा रहा है। केजरीवाल इसे पंजाबियों के साथ हो रहे 'धक्के' के तौर पर पेश कर रहे हैं।


