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फ्रांस, नेपाल-बांग्लादेश की हिंसा से CJP की तुलना पर भड़के अभिजीत दीपके, किया बड़ा ऐलान
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश की हिंसा से आंदोलन की तुलना खारिज की। सौरव दास-आशुतोष रांका की हिरासत, SIR विवाद और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जानें ताजा अपडेट।
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध के बीच दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई हिंसा की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेही की है। उन्होंने जेल में बंद पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका का बचाव करते हुए महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला दिया। साथ ही समर्थकों से अपील की कि वे त्योहार जरूर मनाएं, लेकिन उन दोनों नेताओं और उनके परिवारों को न भूलें, जो कथित तौर पर आंदोलन की कीमत चुका रहे हैं।
दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब CJP के आंदोलन, उसके नेताओं की गिरफ्तारी और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद तेज हो गया है। दीपके ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका जेल जाने के बावजूद हिंसा के रास्ते पर नहीं चले। उन्होंने फ्रांस में हो रही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में उनके साथी नेताओं ने सत्याग्रह और अहिंसा का रास्ता चुना है। उनके मुताबिक, दोनों नेता जेल में रहकर भी गांधी के सिद्धांतों पर कायम हैं और रिहा होने के बाद भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
त्योहार मनाएं, लेकिन सौरव और आशुतोष को न भूलें
CJP संस्थापक ने अपने समर्थकों के नाम भावुक संदेश में कहा कि वे त्योहारों के दौरान अपने परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताएं, खुशियां मनाएं, लेकिन सौरव दास और आशुतोष रांका को भी याद रखें। दोनों 13 अक्टूबर से हिरासत में हैं और अपने परिवारों के साथ त्योहार नहीं मना पा रहे हैं। दीपके ने कहा कि आंदोलन में शामिल होने का फैसला दोनों नेताओं का अपना था, लेकिन इसके परिणाम उनके परिवारों को भी भुगतने पड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कई दिन आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए बेहद मुश्किल रहे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ ने पुलिस की कथित मारपीट का सामना करने की शिकायत की। दीपके के अनुसार, सौरव और आशुतोष के परिवारों से बातचीत ने उन्हें हिम्मत दी और यह भरोसा मजबूत किया कि आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
दीपके ने बताया कि सौरव दास की मां ने बेटे के जुझारू स्वभाव पर भरोसा जताते हुए दूसरे कार्यकर्ताओं को भी अपना ख्याल रखने के लिए कहा। वहीं, आशुतोष रांका जेल में होने के कारण अपने परिवार के एक सदस्य के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। दीपके ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों नेताओं के परिवारों ने उन्हें चिंता न करने और हिम्मत बनाए रखने का संदेश दिया।
‘नफरत के खिलाफ लड़ते हुए खुद नफरत का हिस्सा न बनें’
दीपके ने अपने समर्थकों को चेतावनी दी कि सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ हुए व्यवहार से उनके मन में नफरत पैदा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन उन लोगों और व्यवस्थाओं के खिलाफ है, जिनके बारे में CJP का मानना है कि वे नफरत और अन्याय को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को खुद वैसा नहीं बनना चाहिए, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने प्रेम, करुणा और अहिंसा को आंदोलन की बुनियाद बताते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। दीपके ने दोनों नेताओं को अपना भाई बताते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी से आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सौरव और आशुतोष जेल से बाहर आने के बाद भी उसी मुस्कान के साथ शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे।
दीपके ने कहा, “अगर सौरव और आशुतोष जेल जाते हैं, तो ऐसा नहीं है कि हम डर जाएंगे। हम पीछे नहीं हटेंगे।” उनके मुताबिक, CJP का आंदोलन महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूल्यों से प्रेरित है और आगे भी इन्हीं सिद्धांतों पर चलेगा।
सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को हाईकोर्ट में चुनौती
सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर विवाद अब कानूनी मोर्चे पर भी पहुंच गया है। 20 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, CJP ने दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी ने तत्काल सुनवाई और रिहाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि हिरासत बढ़ाने की प्रक्रिया मनमानी थी और इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। उन्हें पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जिसे 19 अक्टूबर को दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बाद पार्टी ने हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ कानूनी कदम उठाया।
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने भी हिरासत को चुनौती देते हुए इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि कानूनी प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया और राहत की मांग के बावजूद दोनों नेताओं को हिरासत में रखा गया। हालांकि, हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर पार्टी के आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को लेकर उपलब्ध जानकारी में स्पष्टता नहीं है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से बढ़ा विवाद
CJP का आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा है। पार्टी और उसके समर्थक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विवाद उस समय बढ़ गया, जब जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद CJP कार्यकर्ता वहां पहुंचे। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और नेताओं की हिरासत को लेकर विवाद सामने आया। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी ने आंदोलन को और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया।
CJP का कहना है कि नेताओं की हिरासत से आंदोलन की दिशा नहीं बदलेगी। पार्टी अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील कर रही है। दूसरी ओर, पुलिस कार्रवाई और हिरासत से जुड़े आरोपों का आकलन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर किया जाना होगा।
अभिजीत दीपके का संदेश: न डरेंगे, न हिंसा करेंगे
दीपके के ताजा बयान का मुख्य संदेश साफ है कि CJP अपने आंदोलन को फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं से जोड़ने की कोशिशों को खारिज करती है। वह सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को आंदोलन रोकने की वजह नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने का संकल्प बता रही है।
दीपके ने समर्थकों से अपील की कि वे त्योहारों के बीच जेल में बंद नेताओं के परिवारों के प्रति संवेदनशील रहें और किसी भी उकसावे में आकर हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उनका कहना है कि आंदोलन की ताकत नफरत या टकराव में नहीं, बल्कि सत्याग्रह, करुणा और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग में है।
CJP के सामने अब दो अहम मोर्चे हैं: SIR को लेकर अपनी मांगों पर राजनीतिक दबाव बनाए रखना और सौरव दास तथा आशुतोष रांका की हिरासत के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना। दीपके ने साफ कर दिया है कि दोनों नेताओं की गिरफ्तारी से पार्टी पीछे नहीं हटेगी और आंदोलन अहिंसा के रास्ते पर जारी रहेगा।


