अभिजीत दीपके ने क्यों रोक दिया आंदोलन? CJP के फैसले के पीछे जेल, जमानत और ‘बांग्लादेश’ कनेक्शन!

CJP Halts Protest: अभिजीत दीपके ने 5 महीने से जारी आंदोलनों पर फिलहाल ब्रेक लगाने का संकेत दिया है। उन्होंने समर्थकों से परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। जानिए रांका-दास की गिरफ्तारी और दिवाली से पहले बदली रणनीति की वजह।

Aditya Kumar Verma
Published on: 21 Oct 2026 8:20 AM IST
Abhijeet Deepke Halts Protest
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Image Source- Social Media

CJP Halts Protest: अभिजीत दीपके ने कॉकरोचों के आंदोलनों पर फिलहाल ब्रेक लगाने का ऐलान कर दिया है। बीते करीब 5 महीने से लगातार सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोलने की सलाह देने वाले दीपके ने अब अपने समर्थकों से कुछ समय के लिए घर में रहने और परिवार के साथ वक्त बिताने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों से यह बात कही।

हालांकि, दीपके की इस अपील के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बीते सप्ताह तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन पर अड़े दीपके ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया। इसके पीछे पार्टी की मौजूदा स्थिति, दो प्रमुख नेताओं का जेल में होना और आने वाले दिनों की रणनीति को बड़ी वजह माना जा रहा है।

मई से लगातार सक्रिय है CJP

अभिजीत दीपके की अगुवाई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) मई महीने के बाद से लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने सबसे पहले नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के मुद्दे को लेकर आवाज उठाई थी। इस मामले में जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन किया गया था।

यह आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। CJP ने इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर देखा। इस सफलता के बाद दीपके और उनके साथियों का हौसला भी बढ़ा और पार्टी लगातार नए मुद्दों पर सक्रिय होती गई।

इसके बाद सीजेपी ने स्कूल ठीक करो अभियान (School Reform Campaign) और आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान (Tribal School Reform Campaign) जैसे अभियान शुरू किए। इन अभियानों के जरिए पार्टी लगातार सुर्खियों में बनी रही और अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करती रही।

चुनाव आयोग के खिलाफ भी खोला मोर्चा

इसके बाद बीते महीने इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद दीपके की टीम ने चुनाव आयोग (Election Commission) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया।

पार्टी की योजना पूरे देश में विरोध प्रदर्शन (Nationwide Protest) कर सरकार पर दबाव बनाने की थी। हालांकि इस बार पार्टी की रणनीति पहले की तरह सफल नहीं हो सकी। आंदोलन को लेकर कई स्तर पर मुश्किलें सामने आईं और इसी बीच सीजेपी के दो प्रमुख नेता जेल पहुंच गए।

रांका और दास को जाना पड़ा जेल

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर आंदोलन की इजाजत नहीं मिली थी। इसके बावजूद सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास ने परिसर में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी।

दोनों को पहले 5 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजा गया था। अब उनकी न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ा दिया गया है। ऐसे में पार्टी के दो प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी का असर सीजेपी की आगे की रणनीति पर भी दिखाई देने लगा है।

16 मिनट के वीडियो में भावुक हुए दीपके

इसी बीच अभिजीत दीपके ने करीब 16 मिनट का एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें वह आशुतोष रांका और सौरभ दास की गैरमौजूदगी को लेकर भावुक नजर आए। दीपके ने अपने समर्थकों से कहा कि आने वाले कुछ दिन वे अपने परिवार के साथ बिताएं।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में त्योहार हैं और हाल की घटनाओं के बाद सभी के परिवार वाले भी काफी चिंतित होंगे। ऐसे में फिलहाल अपने परिजनों के साथ रहना सही होगा।

दीपके ने अपने समर्थकों से कहा, “मैं चाहता हूं कि आप त्योहारों पर अपनों के साथ रहें, लेकिन सौरव और आशुतोष को भी याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवार के पास नहीं जा सकते। अब वे ही हमारा परिवार हैं।”

आखिर आंदोलन रोकने की वजह क्या?

दीपके के इस वीडियो संदेश को देखें तो संकेत मिलता है कि कॉकरोचों का आंदोलन (CJP Protest) दिवाली तक थम सकता है। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजह पार्टी के दो अहम नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास का जेल में होना माना जा रहा है।

दीपके खुद एक बयान में बता चुके हैं कि सीजेपी के आंदोलनों का खाका तैयार करने में रांका और दास की अहम भूमिका रहती थी। दोनों के जेल में होने से पार्टी की आंदोलन संबंधी तैयारियों पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

इससे पहले 16 अक्टूबर को पार्टी की ओर से निकाला गया तिरंगा मार्च (Tiranga March) भी अपेक्षित असर नहीं छोड़ पाया था। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में कुछ समय के लिए आंदोलन रोककर आगे की रणनीति तैयार करना पार्टी के लिए जरूरी माना जा रहा है।

बांग्लादेश वाली तुलना भी बनी वजह

आंदोलन पर ब्रेक लगाने की दूसरी बड़ी वजह कॉकरोचों के प्रदर्शन की तुलना फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों से किए जाने को माना जा रहा है। रिजीम चेंज (Regime Change) जैसे शब्दों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है।

भाजपा (BJP) की ओर से लगातार हमले किए जाने के बाद मंगलवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने भी एक बयान में कहा कि भारत में नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है।

ऐसे माहौल में रिपोर्ट्स के मुताबिक सीजेपी खुद को इस तरह के किसी भी तमगे से दूर रखना चाहती है। पार्टी नहीं चाहती कि उसके आंदोलन को किसी दूसरे देश में हुए सत्ता परिवर्तन या सरकार विरोधी अभियानों से जोड़कर देखा जाए।

दिवाली तक मिल सकती है नई रणनीति

एक और वजह यह हो सकती है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल कुछ समय चाहता है। सीजेपी को उम्मीद है कि दिवाली तक आशुतोष रांका और सौरभ दास को जमानत मिल सकती है। अगर दोनों नेता जेल से बाहर आते हैं तो पार्टी की आंदोलन संबंधी रणनीति को फिर से गति मिल सकती है।

ऐसे में अभिजीत दीपके का अपने समर्थकों से घर में रहने और परिवार के साथ समय बिताने का संदेश सिर्फ त्योहारों को लेकर अपील नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए पार्टी को मौजूदा हालात में थोड़ा समय मिल सकता है, जबकि नेतृत्व आगे की रणनीति पर भी काम कर सकता है।

फिलहाल करीब 5 महीने से लगातार सक्रिय रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन को लेकर अपने तेवर कुछ समय के लिए धीमे करने के संकेत दिए हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि आशुतोष रांका और सौरभ दास को जमानत मिलती है या नहीं और दिवाली के बाद सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आंदोलन को किस तरह आगे बढ़ाती है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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