अभिजीत दीपके ने ठुकराया NDA का ऑफर! बोले- अभी एक महीने पहले तो मैं एंटी नेशनल…

Abhijeet Dipke NDA Offer: रामदास आठवले ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को RPI(A) में शामिल होने का ऑफर दिया। दीपके ने ‘एंटी नेशनल’ वाले पुराने बयान को याद दिलाते हुए पलटवार किया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 19 Aug 2026 8:05 AM IST
Abhijeet Dipke NDA Offer
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Abhijeet Dipke NDA Offer: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले (Ramdas Athawale) की ओर से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) यानी आरपीआई (A) में शामिल होने के ऑफर पर तीखा जवाब दिया है। आरपीआई (A) केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है। अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर लिखा, “अभी एक महीने पहले तो मैं तुम्हारे लिए एंटी नेशनल था?”

रामदास आठवले ने दिया था ऑफर

रामदास आठवले ने सोमवार को कहा था कि अभिजीत दीपके को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीपके पार्टी में शामिल होकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (Dr Babasaheb Ambedkar) के सपने को पूरा करने और समाज के साथ-साथ आरपीआई (A) को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

आठवले ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें लगता है कि अभिजीत दीपके आंबेडकरवादी हैं। वह सक्रिय और युवा हैं। ऐसे में उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) में शामिल होने पर विचार करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति गलत करता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दीपके को सत्ता में शामिल धड़े के साथ आना चाहिए।

छात्र आंदोलन से जुड़ा था पूरा विवाद

रामदास आठवले की यह टिप्पणी पिछले महीने जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में मानी जा रही है। इन प्रदर्शनों में परीक्षा पेपर लीक (Exam Paper Leak), छात्रों की आत्महत्या (Student Suicides) और शिक्षा व्यवस्था में सुधार (Education System Reform) जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

जंतर-मंतर पर लगातार चले दबाव के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

धर्मेंद्र प्रधान ने उस समय अपने इस्तीफे को लेकर दिए गए बयान में “एंटी नेशनल फोर्सेज” यानी “राष्ट्र विरोधी ताकतों” का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में बने हालात को देखते हुए वह नहीं चाहते थे कि राष्ट्र विरोधी ताकतें इस स्थिति का फायदा उठाएं।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने, यह सुनिश्चित करने कि किसी भी भारतीय छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और बच्चों को अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने का मौका मिले, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा।

‘एंटी नेशनल’ लेबल पर पहले भी बोले थे दीपके

अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को “एंटी नेशनल” कहे जाने को लेकर पहले भी बीजेपी नेताओं पर सवाल उठाए थे। 7 अगस्त को उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के उस बयान का समर्थन किया था, जिसमें भागवत ने कहा था कि वास्तविक चिंताओं को लेकर प्रदर्शन करने वाली जेनरेशन जेड (Gen Z) को राष्ट्र विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए।

दीपके ने उस समय मोहन भागवत से अपील की थी कि वह यही संदेश बीजेपी नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) तक भी पहुंचाएं।

दीपके ने एएनआई (ANI) से बातचीत में कहा था कि मोहन भागवत का पिछला बयान सबसे महत्वपूर्ण बयानों में से एक था। उन्होंने कहा था कि जेनरेशन जेड को राष्ट्र विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि प्रदर्शन करना उनका अधिकार है और उनके मुद्दे वास्तविक हैं। दीपके ने कहा था कि वह भागवत की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं।

बीजेपी नेताओं के बयानों का भी किया था जिक्र

अभिजीत दीपके ने उस समय यह आरोप भी लगाया था कि बीजेपी के नेताओं की ओर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए पहले काफी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने कहा था कि बीजेपी के सदस्य ही प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राष्ट्र विरोधी कह रहे हैं। दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान का जिक्र किया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादियों की बी-टीम” कहा गया था। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के उस बयान का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को “वायरस” कहा था।

दीपके ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी नेता अब मोहन भागवत की बात सुनेंगे और उनके शब्दों पर ध्यान देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी के लिए आरएसएस के खिलाफ जाकर या उससे अलग कुछ कहना मुश्किल होगा।

अब रामदास आठवले की ओर से आरपीआई (A) में शामिल होने का ऑफर मिलने के बाद अभिजीत दीपके ने उसी “एंटी नेशनल” वाले मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया है कि जब करीब एक महीने पहले तक उन्हें राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा था, तो अब उन्हें अपने साथ शामिल होने का ऑफर क्यों दिया जा रहा है। इंस्टाग्राम पर उनकी ओर से किया गया “अभी एक महीने पहले तो मैं तुम्हारे लिए एंटी नेशनल था?” वाला पलटवार इसी विरोधाभास पर केंद्रित है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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