अभिजीत दिपके के दौरे के बाद प्रिंसिपल सस्पेंड और 4 शिक्षक होंगे नियुक्त, हिंगोली में बड़ा एक्शन

School Thik Karo Campaign: हिंगोली के संतुक पिंपरी गांव में स्कूल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों के अनशन के बीच अभिजीत दिपके ने बड़ा दावा किया है। प्रिंसिपल के निलंबन और 4 शिक्षकों की नियुक्ति पर सहमति बनी है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 18 Aug 2026 2:27 PM IST
School Thik Karo Campaign
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School Thik Karo Campaign: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) इन दिनों महाराष्ट्र के हिंगोली जिले (Hingoli District) के दौरे पर हैं। दो दिन पहले उन्होंने संतुक पिंपरी गांव के जिला परिषद स्कूल (Zilla Parishad School) का जायजा लिया था। इस दौरान उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल पर शराब के नशे में रहने का आरोप लगाया था और उनके निलंबन (Suspension) की मांग की थी।

अब अभिजीत दिपके ने एक बार फिर संतुक पिंपरी गांव का दौरा किया और बेहतर स्कूली व्यवस्था (School Education System) की मांग को लेकर अनशन (Hunger Strike) पर बैठे ग्रामीणों से मुलाकात की। दिपके ने बताया कि प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों को मान लिया है।

प्रिंसिपल के निलंबन और नियुक्ति पर सहमति

अभिजीत दिपके के मुताबिक, प्रशासन ने स्कूल को लेकर ग्रामीणों की मांगों पर सहमति जताई है। इसमें स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित (Principal Suspension) करने और स्कूल में तुरंत चार शिक्षकों (Four Teachers) की नियुक्ति करने की बात शामिल है।

दिपके ने यह भी बताया कि स्कूल में बच्चों के लिए बेंच (School Benches) भी पहुंच गई हैं। उनका कहना है कि ग्रामीणों की मांगों पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू होने के बाद स्कूल की व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम बढ़ा है।

‘सभी राज्यों में आंदोलन शुरू’

अभिजीत दिपके ने कहा कि देश के सभी राज्यों में स्कूलों की बेहतर व्यवस्था (Better School Infrastructure) को लेकर आंदोलन शुरू हो चुका है। उनका आरोप है कि सरकार स्कूलों की वास्तविक स्थिति (Ground Reality of Schools) को छिपाने की कोशिश कर रही है।

दिपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्कूलों की असलियत छिपाने से वह बदल नहीं सकती। उनका कहना है कि जब तक सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक इस मुद्दे को उठाया जाता रहेगा।

‘अब्दुल मेरे परिवार जैसा, मेरा भाई है’

अभिजीत दिपके ने अब्दुल (Abdul) का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब्दुल उनके साथ जंतर-मंतर प्रोटेस्ट (Jantar Mantar Protest) में शामिल था। जब उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान (School Thik Karo Campaign) की शुरुआत की, तब अब्दुल बंगाल चला गया और वहां स्कूलों का निरीक्षण (School Inspection) करने लगा।

दिपके ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अब्दुल के साथ मारपीट (Assault) की। उनके मुताबिक, जब अब्दुल के पिता उसे बचाने के लिए आए तो मारपीट के दौरान उनकी मौत हो गई।

अभिजीत दिपके ने कहा कि अब्दुल उनका परिवार है और उनका भाई है। उन्होंने इस घटना को लेकर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि अब्दुल और उसके परिवार के साथ जो हुआ, वह बेहद गंभीर है।

‘10 साल से देश में हो रही नफरत की राजनीति’

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि पिछले 10 साल से देश में नफरत की राजनीति (Politics of Hate) हो रही है। उनका कहना है कि अब्दुल और उसका परिवार भी इसी नफरत की राजनीति का शिकार हुआ है।

दिपके ने संतुक पिंपरी के स्कूल प्रिंसिपल के निलंबन को अब्दुल और उसके पिता की जीत बताया। उनका कहना है कि स्कूल की व्यवस्था में सुधार की दिशा में हुआ यह फैसला उन लोगों की लड़ाई की जीत है, जो बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने साफ कहा कि जब तक देश के सभी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं होती, तब तक उनका ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान जारी रहेगा।

आवाज उठा रहे Gen Alpha

देश के कई हिस्सों में जेन अल्फा (Gen Alpha) बेहतर शिक्षा व्यवस्था (Better Education System) और स्कूलों की खस्ता हालत (Poor School Conditions) में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। कई राज्यों में स्कूलों की स्थिति सुधारने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं (Better Facilities) उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।

अभिजीत दिपके का कहना है कि स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका अभियान जारी रहेगा। संतुक पिंपरी में प्रिंसिपल के निलंबन, चार शिक्षकों की नियुक्ति और बच्चों के लिए बेंच उपलब्ध कराने को वह इसी अभियान की दिशा में हुई कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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