न पानी, न बेंच, गंदे टॉयलेट...आजादी के 80 साल बाद सरकारी स्कूल का ऐसा हाल! CJP ने खोला मोर्चा, VIDEO

CJP School Thik Karo Campaign: महाराष्ट्र के हिंगोली में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की बदहाली के खिलाफ 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया। स्कूल में पानी, बेंच और साफ टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी मिली।

Aditya Kumar Verma
Published on: 15 Aug 2026 6:47 PM IST
CJP School Thik Karo Campaign
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Image Source- Social Media

CJP School Thik Karo Campaign: कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने शनिवार को महाराष्ट्र (Maharashtra) के हिंगोली जिले के अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से 'स्कूल ठीक करो' अभियान (School Thik Karo Campaign) की शुरुआत की। अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों (Government Schools) की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आजादी के 80 साल बाद भी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं (Basic Amenities) की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब और वंचित परिवारों (Underprivileged Families) के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

अभिजीत दीपके अपने निवास स्थान छत्रपति संभाजीनगर, जिसे पहले औरंगाबाद कहा जाता था, से 234 किलोमीटर की दूरी तय कर संतुक पिंपरी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने गांव के जिला परिषद स्कूल (Zilla Parishad School) का दौरा किया और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया।

'सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं'

स्कूल का निरीक्षण करने के बाद अभिजीत दीपके ने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने स्कूल की स्थिति के वीडियो भी साझा किए।

उन्होंने स्कूल की कमियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां पीने का पानी (Drinking Water) नहीं है, बच्चों के बैठने के लिए बेंच (Benches) नहीं हैं, शौचालय गंदे हैं, खिड़कियां टूटी हुई हैं और पानी की सप्लाई (Water Supply) भी नहीं है।

टूटी खिड़की पर डिप्टी सीएम के बैनर

अभिजीत दीपके ने स्कूल के हालात दिखाते हुए कई वीडियो साझा किए। एक वीडियो में उन्होंने सरकारी स्कूल की टूटी हुई खिड़की दिखाई, जिसे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बैनरों से ढका गया था।

उन्होंने स्कूल के शौचालय की स्थिति भी दिखाई और सवाल उठाया कि क्या ऐसी सुविधा बच्चों के इस्तेमाल के लायक है। वीडियो में गंदगी और कचरे से ढका हुआ कमोड दिखाई दिया। इसे दिखाते हुए दीपके ने सवाल किया कि कोई बच्चा इस शौचालय का इस्तेमाल कैसे कर सकता है।

बच्चों के बीच बैठकर जानी समस्याएं

अभिजीत दीपके ने स्कूल में बच्चों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं भी सुनीं। उन्होंने बच्चों से स्कूल में आने वाली परेशानियों के बारे में पूछा और उनके जवाबों को नोट किया।

उन्होंने बताया कि इस दौरान गांव के मुखिया से भी बात हुई। गांव के मुखिया ने उन्हें भरोसा दिलाया कि स्कूल की समस्याओं को जल्द से जल्द दूर कराया जाएगा।

दीपके ने कहा कि उनके गांव के मुखिया ने आश्वासन दिया है कि ग्राम पंचायत (Village Panchayat) एक सप्ताह के भीतर स्कूल की सभी समस्याओं को दूर करेगी। उन्होंने कहा कि जब लोग एक साथ आते हैं और काम करते हैं तो बदलाव संभव है।

10 अगस्त को किया था अभियान का ऐलान

अभिजीत दीपके ने 10 अगस्त को ही 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने का ऐलान किया था। इस अभियान के तहत उन्होंने ग्रामीण इलाकों (Rural Areas) में सरकारी स्कूलों का ऑडिट (School Audit) करने की अपील की है।

उन्होंने अभिभावकों (Parents) से कहा कि वे अपने गांव के सरकारी स्कूलों का खुद निरीक्षण करें और यह देखें कि वहां बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। इसके साथ ही अभिभावकों से स्कूलों की कमियों को वीडियो में रिकॉर्ड करने की अपील की गई है।

अभिभावक इन वीडियो के साथ स्कूल में मौजूद कमियों की जानकारी सीजेपी को भेज सकते हैं। इसके बाद पार्टी की ओर से इन मामलों को उठाने और आगे की कार्रवाई के लिए फॉलोअप करने की बात कही गई है।

गांव के मुखिया को जोड़ने की कोशिश

इस अभियान के तहत अभिजीत दीपके ने यह भी घोषणा की थी कि वह 15 अगस्त को अपने पैतृक गांव जाकर गांव के मुखिया से मुलाकात करेंगे और सरकारी स्कूल में सुधार के लिए दबाव बनाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी उन गांवों के मुखियाओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करेगी, जो इस अभियान में हिस्सा लेंगे और अपने गांव के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कराने के लिए काम करेंगे।

प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम की मांग

शनिवार को अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को समान और बेहतर शिक्षा (Quality Education) पाने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने निजी स्कूलों (Private Schools) की फीस पर सीमा तय करने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि सीजेपी सरकारी अस्पतालों (Public Hospitals) की खराब स्थिति को लेकर भी इसी तरह का अभियान शुरू करेगी।

'प्रेशर ग्रुप' के तौर पर काम जारी रखेगी CJP

सीजेपी की शुरुआत मुख्य न्यायाधीश भारत यानी सीजेआई (CJI) सूर्यकांत (Surya Kant) की 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी के जवाब में हुई थी। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर इसे एक व्यंग्यात्मक संगठन (Satirical Outfit) के तौर पर शुरू किया था।

सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर भी आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने इस्तीफा दिया था।

इसके बाद 5 अगस्त को सीजेपी ने घोषणा की कि वह एक 'प्रेशर ग्रुप' (Pressure Group) के तौर पर काम जारी रखेगी और जनता से जुड़े दूसरे मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी। अभिजीत दीपके ने लोगों की समस्याओं को समझने के लिए 'क्या बोलती पब्लिक' (Kya Bolti Public) अभियान शुरू करने का भी ऐलान किया था।

अब 'स्कूल ठीक करो' अभियान के जरिए सीजेपी ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को अपना नया मुद्दा बनाया है। अभिजीत दीपके का कहना है कि बदलाव तभी संभव है, जब लोग एक साथ आकर अपनी आवाज उठाएं और समस्याओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करें।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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