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अभिजीत दिपके फिर खोल दिया मोर्चा! JPSC-JSSC छात्रों के समर्थन का किया ऐलान, अभ्यर्थियों से की बात
Abhijeet Dipke Support JPSC-JSSC Protest: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ा समर्थन मिला है। CJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत अभ्यर्थियों से बातचीत कर उनके संघर्ष का खुला समर्थन किया है।
Abhijeet Dipke Support JPSC-JSSC Protest: झारखंड में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं को अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक समर्थन हासिल हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत अभ्यर्थियों के हक में हुंकार भरी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे झारखंड के युवाओं के साथ चट्टान की तरह मजबूती से खड़े हैं और उनकी सभी मांगों का पूरी तरह समर्थन करते हैं।
सोशल मीडिया पर किया समर्थन का ऐलान
अभिजीत दिपके ने अपने X हैंडल से जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सीधी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे इन अभ्यर्थियों की न्यायसंगत आवाज को दबाया नहीं जा सकता। CJP पूरी मजबूती के साथ झारखंड के हर एक पीड़ित छात्र के साथ है। संगठन उनकी मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष के मैदान में साथ खड़ा रहेगा।
परीक्षाओं में धांधली से युवाओं में भारी आक्रोश
गौरतलब है कि झारखंड में पिछले काफी समय से हजारों छात्र भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली, पेपर लीक और समय पर रिजल्ट घोषित न होने के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि पारदर्शी व्यवस्था न होने के कारण सालों से दिन-रात मेहनत कर रहे युवाओं का भविष्य अंधकार में लटक गया है। JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए युवाओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।
छात्र आंदोलन को मिली नई ताकत और राजनीतिक दिशा
CJP और अभिजीत दिपके के इस खुले समर्थन के बाद झारखंड का यह छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। युवाओं का कहना है कि जब तक राज्य सरकार उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के इस आक्रोश और नए समर्थन से राज्य सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा और ज्यादा जोर पकड़ सकता है।


