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Abhishek Banerjee: जाली दस्तखत केस में अभिषेक-कुणाल का आमना-सामना, CID के सवालों से फंसेगा पेंच!
Abhishek Banerjee: सीआईडी ने इस बार अभिषेक बनर्जी और टीएमसी नेता कुणाल घोष को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की रणनीति बनाई है।
Abhishek Banerjee
Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सियासी हलचल अपने चरम पर है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े जाली हस्ताक्षर मामले ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी सिलसिले में डायमंड हार्बर से सांसद और टीएमसी के प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी एक बार फिर कोलकाता स्थित अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे, जहां उनसे दूसरे दौर की पूछताछ की जा रही है। इस बार जांच एजेंसियों का फोकस पहले दिए गए बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच कथित विसंगतियों की जांच पर है। राजनीतिक गलियारों में इस पूछताछ को बेहद अहम माना जा रहा है।
आमने-सामने बैठाकर हो रही पूछताछ
सूत्रों के अनुसार सीआईडी ने इस बार अभिषेक बनर्जी और टीएमसी नेता कुणाल घोष को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की रणनीति बनाई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि दोनों नेताओं के बयानों का मिलान करने से मामले की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।बताया जा रहा है कि पिछले दौर की पूछताछ में मिले जवाबों से जांच एजेंसी पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। यही वजह है कि इस बार दोनों नेताओं से अलग-अलग और संयुक्त रूप से सवाल किए जा रहे हैं।
दस्तावेजों की भी हो रही जांच
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्रस्तुत करने को कहा था। इनमें 19 मई को हुई बैठक से जुड़े रिकॉर्ड और विधायकों के हस्ताक्षरों वाले दस्तावेज शामिल हैं। जांच टीम विशेष रूप से उन हस्ताक्षरों की जांच कर रही है, जिन पर कुछ विधायकों ने आपत्ति जताई है। कई विधायकों का दावा है कि संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी भी नहीं थी।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस मामले की शुरुआत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन की प्रक्रिया से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार 6 मई को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर पार्टी विधायकों की बैठक हुई थी, जिसमें सर्वसम्मति से शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का समर्थन किया गया। बाद में विधानसभा सचिवालय द्वारा औपचारिक प्रस्ताव मांगे जाने पर 19 मई को एक दस्तावेज जमा किया गया, जिसमें 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था। इसी दस्तावेज को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
हस्ताक्षरों पर उठे सवाल
मामला तब गंभीर हो गया जब कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद संबंधित हस्ताक्षरों की तुलना अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड से की गई, जिसमें कथित तौर पर कई असमानताएं सामने आईं। इन आरोपों के आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई और बाद में सीआईडी ने जांच शुरू कर दी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि पूछताछ के बाद जांच एजेंसी क्या कदम उठाएगी। फिलहाल सीआईडी सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर रही है और बयानों का मिलान किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या दस्तावेजों में अनियमितता के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो मामला कानूनी रूप से और गंभीर हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
पूछताछ के दौरान भवानी भवन के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में टीएमसी समर्थक भी मौके पर मौजूद हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस हाई-प्रोफाइल मामले पर टिकी हुई है। जांच के नतीजे आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं और टीएमसी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।


