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TMC के बाद अब इस बड़े दल में महा-बगावत के संकेत, लोकसभा में 2 तिहाई बहुमत के करीब NDA
Shiv Sena UBT Split: तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट द्वारा 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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Shiv Sena UBT Split: केंद्र की सत्ता संभाल रहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नजर अब लोकसभा में संख्याबल को और मजबूत करने पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन विपक्षी दलों के कुछ सांसदों को अपने साथ जोड़कर दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट द्वारा 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।
शिवसेना (UBT) में टूट की सुगबुगाहट
सूत्रों के अनुसार अगला राजनीतिक झटका उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को लग सकता है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। वर्तमान में लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं और इनमें से 6 सांसदों के एक साथ अलग होने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी भी सांसद की सदस्यता बचाने के लिए पर्याप्त संख्या में सांसदों का समूह बनाकर किसी अन्य दल में विलय करना आवश्यक होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठता है तो इन सांसदों के लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना हो सकती है।
महाराष्ट्र में शिंदे गुट की बढ़ती पकड़
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में एनडीए की शानदार सफलता के बाद से ही राज्य की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एकनाथ शिंदे ने संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर सक्रियता के बल पर अपने प्रभाव का लगातार विस्तार किया है। पिछले कुछ वर्षों में शिवसेना (UBT) के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इसके चलते यह धारणा बन रही है कि उद्धव ठाकरे का राजनीतिक प्रभाव अब पहले की तुलना में सीमित होता जा रहा है और उनका मजबूत आधार मुख्य रूप से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों तक केंद्रित रह गया है।
NDA की नजर दो-तिहाई बहुमत पर
लोकसभा में वर्तमान समय में 540 सांसद हैं, जबकि कुछ सीटें रिक्त हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि एनडीए इस आंकड़े के करीब पहुंचता है तो संसद में कई महत्वपूर्ण विधायी फैसलों को आगे बढ़ाने में उसे अधिक मजबूती मिलेगी। इसी वजह से बीजेपी लगातार अपने गठबंधन का दायरा बढ़ाने और विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को साथ लाने की संभावनाएं तलाश रही है।
टीएमसी के बागी समूह ने दावा किया था कि उनके पास 19 सांसदों का समर्थन मौजूद है, जो एनडीए सरकार को समर्थन देने के पक्ष में हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।अब सबकी नजर इस बात पर है कि विपक्षी दलों में चल रही इन चर्चाओं का वास्तविक असर कितना दिखाई देता है और क्या एनडीए वास्तव में लोकसभा में 360 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने में सफल हो पाता है या नहीं।


