TRENDING TAGS :
अग्निवीरों को 2 साल की सेवा विस्तार, राजनाथ खुश तो ओवैसी-कांग्रेस ने उठाए सवाल
अग्निपथ योजना में मोदी सरकार का बड़ा बदलाव। 75 फीसदी अग्निवीरों को 2 साल की अतिरिक्त सेवा का मौका मिलेगा। राजनाथ सिंह ने फैसले का स्वागत किया, ओवैसी ने हेल्थ इंश्योरेंस पर सवाल उठाए तो पवन खेड़ा ने चुनावी यू-टर्न बताया।
Agniveer Scheme 2026: अग्निपथ योजना पर मोदी सरकार के नए फैसले ने सियासी घमासान छेड़ दिया है। चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सेना से बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को अब दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार इसे अग्निवीरों के प्रदर्शन और सेना की जरूरतों के मुताबिक बड़ा बदलाव बता रही है, लेकिन विपक्ष ने इसे युवाओं के भविष्य और सरकार की राजनीतिक मजबूरियों से जोड़कर सवाल खड़े कर दिए हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अग्निवीरों की सुविधाओं और सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनावी मंशा को लेकर मोदी सरकार को घेरा है।
चार 4 से बढ़कर 6 साल हो सकती है सेवा, कैबिनेट ने लगाई मुहर
दरअसल, केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत 14 जून 2022 को सेना में भर्ती की नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत अग्निवीरों की शुरुआती सेवा अवधि चार साल निर्धारित की गई थी। चार साल बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में शामिल करने का प्रावधान था। बाकी 75 फीसदी को सेवा से बाहर होना पड़ता था।
लेकिन अब सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। 4 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को भी दो साल का दूसरा सेवा कार्यकाल देने का फैसला हुआ है। इस तरह उन्हें छह साल तक सेना में सेवा करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, इसे सभी अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति समझना गलत होगा। दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी होने के बाद नियमित सैनिक बनने के इच्छुक अग्निवीरों को सेना के निर्धारित वस्तुनिष्ठ चयन मानकों पर खरा उतरना होगा। यानी स्थायी भर्ती अपने आप नहीं होगी।
18,300 अग्निवीरों को मिलेगा फायदा, दिसंबर से शुरू होनी थी विदाई
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अग्निपथ योजना के पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। करीब 18,300 अग्निवीरों को 31 दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर होना था। सेना में उनकी विदाई की प्रक्रिया नवंबर के मध्य से शुरू होनी थी।
अब कैबिनेट के फैसले से इन जवानों को दो साल और सेवा करने का विकल्प मिलेगा। खास बात यह है कि अतिरिक्त दो साल के दौरान उन्हें पहले की तुलना में अधिक पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। यानी सरकार ने न केवल सेवा अवधि बढ़ाई है, बल्कि अग्निवीरों के लिए नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का एक और अवसर भी तैयार किया है।
राजनाथ सिंह बोले- सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने वाला फैसला
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए इसे अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने इस अतिरिक्त सेवा अवधि को 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' नाम दिया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इससे इच्छुक अग्निवीरों को चार या छह साल की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित चयन मानकों पर खरा उतरने की स्थिति में नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह फैसला रक्षा बलों में लंबे समय से चल रहे संरचनात्मक सुधारों की निरंतरता है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को अधिक युवा, फिट, तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, यह महज भर्ती नीति में बदलाव नहीं है, बल्कि युद्ध के बदलते स्वरूप के हिसाब से भारतीय सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम है।
ओवैसी का सवाल- स्वास्थ्य बीमा और नियमित जवानों जैसी सुविधाएं मिलेंगी?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के फैसले का स्वागत करने के बजाय अग्निवीरों के अधिकारों और सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि दो साल अतिरिक्त सेवा करने वाले अग्निवीरों को क्या नियमित सैनिकों के समान सुविधाएं मिलेंगी?
ओवैसी ने कहा, ''क्या उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा? क्या उन्हें सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों को मिलने वाली सुविधाएं दी जाएंगी? गांवों में इसके लिए तैयारी करने वाले युवाओं का क्या होगा?''
उन्होंने कहा कि देश के आसपास सुरक्षा संबंधी कई खतरे हैं। ऐसे में सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
ओवैसी ने साफ किया कि उनकी पार्टी अग्निपथ योजना का शुरुआत से विरोध करती रही है और आगे भी विरोध जारी रखेगी। उनका सवाल सिर्फ दो साल की अतिरिक्त सेवा का नहीं, बल्कि अग्निवीरों को मिलने वाले अधिकारों और नियमित सैनिकों के साथ समानता का भी है।
पवन खेड़ा का हमला- चुनाव आते ही याद आए अग्निवीर, BJP को बताया 'भारतीय जनता पलटी'
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मोदी सरकार के फैसले को राजनीतिक मजबूरी से जोड़ते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निपथ योजना के खिलाफ लगातार उठ रही आवाज और आगामी विधानसभा चुनावों ने सरकार को अपना फैसला बदलने पर मजबूर किया है।
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी शुरुआत से ही अग्निपथ योजना का विरोध करते रहे हैं। यह योजना सेना के साथ-साथ देश के युवाओं के भविष्य के लिए भी नुकसानदेह है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होने की तैयारी करते हैं। ऐसे में युवाओं की नाराजगी चुनाव में सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।
खेड़ा ने सवाल उठाया कि सरकार ने चार साल बाद अग्निवीरों को बाहर करने की व्यवस्था बनाई थी, अब दो साल और सेवा का मौका दे रही है, लेकिन छह साल बाद बाकी युवाओं का क्या होगा? क्या उन्हें फिर सड़कों पर बेरोजगार छोड़ दिया जाएगा?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिना दूरगामी परिणामों पर विचार किए योजना लागू करने का यही नतीजा होता है।
इतना ही नहीं, पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बीजेपी के लिए 'भारतीय जनता पलटी' का तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और हिमाचल प्रदेश में चुनाव नजदीक हैं और इन राज्यों में सेना में भर्ती की आकांक्षा रखने वाले युवाओं की संख्या काफी अधिक है।
CDS ने बताया क्यों बदली अग्निपथ योजना, अग्निवीरों के प्रदर्शन को बताया सकारात्मक
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अग्निपथ योजना लागू करते समय ही यह तय किया गया था कि अग्निवीरों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर योजना की समीक्षा होगी।
उन्होंने बताया कि पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के करीब है। इस दौरान उनके प्रदर्शन का आकलन किया गया, जो सकारात्मक रहा है। इसी फीडबैक के आधार पर रक्षा बलों ने 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने की सिफारिश की थी।
सीडीएस ने स्पष्ट किया कि पहले 25 फीसदी अग्निवीरों को मेरिट के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा। शेष 75 फीसदी को दो साल का दूसरा सेवा कार्यकाल मिलेगा। इसके बाद नियमित सैनिक बनने के इच्छुक अग्निवीरों को निर्धारित चयन मानकों को पूरा करना होगा। इस अतिरिक्त अवधि में अग्निवीरों को बढ़ा हुआ पारिश्रमिक भी मिलेगा।
अग्निपथ पर सरकार का बदलाव, लेकिन विपक्ष के सवाल बरकरार
केंद्र सरकार का ताजा फैसला निश्चित रूप से उन हजारों अग्निवीरों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें चार साल बाद सेना से बाहर होना था। लेकिन इस बदलाव ने अग्निपथ योजना को लेकर पुराने सवाल भी फिर से खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर चार साल की सेवा के बाद अग्निवीरों का प्रदर्शन इतना बेहतर रहा है कि उन्हें दो साल और सेना में रखने की जरूरत महसूस हुई, तो क्या मूल योजना की चार साल वाली समयसीमा पर दोबारा विचार नहीं होना चाहिए था?
वहीं, छह साल की सेवा के बाद नियमित भर्ती में जगह नहीं पाने वाले युवाओं के रोजगार और भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? ओवैसी का स्वास्थ्य बीमा और सुविधाओं पर सवाल तथा पवन खेड़ा का चुनावी यू-टर्न वाला आरोप सरकार के सामने दो अलग-अलग राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियां खड़ी करते हैं।
फिलहाल इतना साफ है कि मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव किया है, लेकिन इस फैसले से अग्निवीरों के भविष्य को लेकर चल रही बहस खत्म होने के बजाय और तेज हो गई है।


