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भारत से निकला था ईरान का सुप्रीम लीडर...,यूपी के इस जिले से था बेहद खास कनेक्शन, हुआ बड़ा खुलासा
Ali Khamenei India Connection: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का जीवन, भारत से जुड़ी जड़ें और इस्लामिक क्रांति की विरासत एक ऐतिहासिक सफर की कहानी।
Ali Khamenei India Connection
Ali Khamenei India Connection: ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबरों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि तेहरान पर हुए हमले के दौरान वे अपने दफ्तर में मौजूद थे। इस घटना के बाद ईरान सरकार ने 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी खबरों की आधिकारिक पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बार फिर खामेनेई के जीवन, उनकी विरासत और भारत से जुड़े उनके पारिवारिक इतिहास की चर्चा तेज हो गई है।
एक गांव से शुरू हुई कहानी
यह कहानी उत्तर प्रदेश(UP) के बाराबंकी जिले के किंटूर गांव से जुड़ती है। 19वीं सदी में यहां सैयद अहमद मुसवी नामक एक शिया धर्मगुरु का संबंध बताया जाता है। कहा जाता है कि उनका परिवार कभी ईरान से भारत आया था, लेकिन बाद में वे धार्मिक यात्रा पर निकल पड़े। 1830 के आसपास वे इराक के नजफ पहुंचे और फिर ईरान के खुमैन शहर में बस गए। यहीं से उस वंश की कहानी आगे बढ़ती है जिसने आगे चलकर ईरान की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
क्रांति के नायक: Ruhollah Khomeini
24 सितंबर 1902 को खुमैन में जन्मे रुहोल्लाह खुमैनी ने कम उम्र में ही धार्मिक शिक्षा शुरू कर दी थी। बाद में वे कुम शहर में बस गए और एक प्रमुख शिया धर्मगुरु के रूप में उभरे। उन्होंने ईरान के शाह Mohammad Reza Pahlavi और उनके अमेरिका से संबंधों का खुलकर विरोध किया। उनकी आलोचना के कारण उन्हें देश निकाला दिया गया। वे तुर्की, इराक और अंततः फ्रांस में रहे। लेकिन निर्वासन के दौरान भी उनका प्रभाव कम नहीं हुआ।
1979 की इस्लामिक क्रांति
1979 में खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई। इस आंदोलन ने शाह की सत्ता को खत्म कर दिया और ईरान एक इस्लामी गणराज्य बन गया। देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए। संविधान से लेकर शासन प्रणाली तक सब कुछ इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप ढाला गया।
खामेनेई का उदय
खुमैनी के करीबी सहयोगी अली खामेनेई का जन्म 1939 में मशहद में हुआ। वे कम उम्र में ही धार्मिक शिक्षा से जुड़ गए और क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित हुए। 1989 में खुमैनी के निधन के बाद खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुना गया। उनके कार्यकाल में ईरान की राजनीति और अधिक केंद्रीकृत हुई। राष्ट्रपति बदलते रहे, लेकिन सर्वोच्च सत्ता सुप्रीम लीडर के हाथ में ही रही। वर्तमान में देश के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian हैं, पर असली शक्ति सर्वोच्च नेता के पास मानी जाती है।
विरासत और विवाद
खामेनेई और खुमैनी दोनों को ईरान की इस्लामी व्यवस्था का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है। समर्थक उन्हें धार्मिक मूल्यों का रक्षक बताते हैं, जबकि आलोचक उन्हें कठोर शासन प्रणाली का प्रतीक मानते हैं।


