‘मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना…’, मुस्कुराते हुए ऐसा क्यों बोले अमित शाह?

Amit Shah Statement: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान चर्चा में है, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि उनके भाग्य में आंदोलनों और आतंकियों से निपटना लिखा है। उन्होंने कोरोना काल की चुनौतियों और भारत की वैक्सीन उपलब्धि का भी जिक्र किया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 28 Aug 2026 2:35 PM IST
Amit Shah Statement
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Amit Shah Statement: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि उनके भाग्य में आंदोलनों और आतंकियों से निपटना लिखा है। एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने गृह मंत्री के तौर पर अपने सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र में उन्हें गृह मंत्रालय मिला है, इसलिए उनके हिस्से में आंदोलनों और आतंकियों से निपटने की जिम्मेदारी भी आती है।

अमित शाह के इस भाषण का एक वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने गृह मंत्री के तौर पर मिले अनुभवों को साझा किया और कोरोना काल के दौरान देश के सामने आई बड़ी चुनौतियों को भी याद किया।

‘मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है, आतंकियों से भी’

कार्यक्रम के मंच से अमित शाह गृह मंत्रालय (Home Ministry) की जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बारे में बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, “मैं एक अनुभव बताना चाहता हूं। केंद्र में मुझे गृह मंत्रालय ही मिला है। तो मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है। आतंकियों से भी निपटना है।”

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलनों की चर्चा तेज रही है। बीते दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था।

इस दौरान प्रदर्शन को संभालने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना भी हुई थी। छात्रों पर हुई हिंसा को लेकर सवाल उठने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया था।

कोरोना काल की चुनौतियों को भी किया याद

अमित शाह ने अपने संबोधन में कोरोना काल (Covid Pandemic) के दौरान आई चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किसी शहर में कर्फ्यू (Curfew) लागू कराना भी कितना बड़ा काम होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अहमदाबाद जैसे शहर में अगर कर्फ्यू लागू करना हो तो कम से कम 300 पुलिस की गाड़ियों पर माइक लगाकर एनाउंसमेंट कराना पड़ता है कि अगले दिन सुबह 8 बजे से कर्फ्यू लगाया गया है और कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल सकता।

अमित शाह के मुताबिक, जब एक शहर में इस तरह कर्फ्यू लागू कराने के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था करनी पड़ती है, तब कोरोना काल के दौरान पूरे देश में सफलतापूर्वक कर्फ्यू लागू कराना एक बेहद बड़ी चुनौती थी।

‘दो मौतें हुईं और पता चला कोरोना तेजी से फैलेगा’

अमित शाह ने उस शुरुआती दौर को भी याद किया, जब कोरोना के मामले सामने आने लगे थे। उन्होंने कहा कि यहां दो मौतें हुईं और पुणे की लैब ने सत्यापित कर दिया कि कोरोना है और यह तेजी से फैलेगा।

उन्होंने कहा कि उस समय वह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों चिंतित थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा कि चिंता करके क्या होगा, रास्ते सोचने पड़ेंगे। इसके बाद जनता कर्फ्यू (Janata Curfew) लगाने का फैसला किया गया।

अमित शाह ने क्यों कहा था कि यह प्रयोग विफल होगा?

अमित शाह ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का विचार रखा तो उन्होंने कहा था कि आप ऐसा प्रयोग करने जा रहे हैं, जो विफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि इतनी सारी घोषणाओं के बाद भी लोग बाहर निकलते हैं।

लेकिन अमित शाह के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे घोषणा की और अगले दिन सड़कें पूरी तरह सुनसान थीं। कोई भी व्यक्ति सड़क पर नहीं निकला था। अमित शाह ने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भरोसे के साथ कहा था कि यह लड़ाई हम जीत जाएंगे।

भारत ने तेजी से बनाई वैक्सीन

कोरोना के बाद हुए विश्लेषण का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि सबसे तेज वैक्सीन (Vaccine) बनाने वाले तीन देशों में भारत भी शामिल था। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के 70 देशों में वैक्सीन भेजकर लोगों को बचाने का काम किया।

अमित शाह ने कहा कि भारत को हीनभावना से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर युवाओं के हौसले (Youth Motivation) की बात करते हुए कहा कि युवाओं को यह भरोसा और हौसला देने की जरूरत है कि हम सक्षम हैं।

उन्होंने अपने अनुभवों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि गृह मंत्री के तौर पर आंदोलनों और आतंकियों से निपटने के साथ-साथ कोरोना जैसी बड़ी राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा रहा है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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