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जमीन के अंदर गोला-बारूद से लेकर सीमा पर सड़कों तक... सिलीगुड़ी 'चिकन नेक' को लेकर शाह का बड़ा गेमप्लान
सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अंडरग्राउंड सैन्य ढांचे, रेलवे टनल और कई सड़क परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।
Amit Shah's Big Plan for Chicken Neck: भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। 'चिकन नेक' को लेकर गृहमंत्री अमित शाह बड़े गेम प्लानिंग करने लगे हैं, चाहे इसकी सुरक्षा की बात हो या फिर
सरकार की योजनाओं में सैन्य बुनियादी ढांचे, रेलवे, हाईवे, सीमा सड़क और नए सैन्य स्टेशनों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनका मकसद किसी एक सड़क या रास्ते पर निर्भरता कम करना और संकट की स्थिति में पूर्वोत्तर तक सैन्य और नागरिक आवाजाही को बनाए रखना है।
जमीन के नीचे बनेगा सैन्य गोला-बारूद भंडारण
भारतीय सेना के लिए 12 अंडरग्राउंड एयर डिफेंस गोला-बारूद भंडारण केंद्र और एक अंडरग्राउंड लॉन्ग रेंज वेक्टर (LRV) एम्युनिशन स्टोरेज बनाने की योजना है। इसके अलावा 21 LRV एम्युनिशन एम्प्लेसमेंट भी बनाए जाएंगे। इन परियोजनाओं की कुल लागत 297 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस तरह गोला-बारूद को जमीन के नीचे सुरक्षित रखने से महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को हवाई हमलों या ड्रोन हमलों से बचाने में मदद मिलने की बात कही गई है। क्योंकि कई मौकों पर चीन और बांग्लादेश 'चिकन नेक' को लेकर अपनी हेकड़ी दिखाते रहे हैं।
अंडरग्राउंड रेलवे और रेलवे ट्रैक
सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाने के साथ NJP-सिलीगुड़ी और ठाकुरगंज-सिलीगुड़ी रेलवे ट्रैक को डबल करने की योजना भी शामिल है। इसका उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और किसी एक सतही मार्ग पर दबाव कम करना है। इससे सामान्य यातायात के साथ जरूरत पड़ने पर पूर्वोत्तर की ओर तेजी से सैन्य आवाजाही में भी मदद मिलने की बात कही गई है।
6-लेन एक्सप्रेसवे और रिंग रोड पर जोर
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत छह लेन वाले गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, कोरोनेशन ब्रिज के विकल्प के तौर पर छह लेन के नए रोड ब्रिज और सिलीगुड़ी रिंग रोड की योजना है। इसके साथ NH-27 और NH-17 को चार लेन करने और अपग्रेड करने का काम भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम करना और उत्तर व मध्य भारत से पूर्वी सीमा की ओर आवाजाही के लिए अतिरिक्त रास्ते तैयार करना है।
सीमा सड़कों और सैन्य कनेक्टिविटी को भी मजबूती
NH-17 और NH-27 को जोड़ने वाले तीन महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्तों को अपग्रेड करने की योजना है। इसके अलावा NH-10 के सेवोक-रंगपो हिस्से को भारी सैन्य वाहनों के लिए NHDL मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर फतेहपुर से गलगलिया तक 79.5 किलोमीटर की सीमा सड़क में से 75 किलोमीटर का काम पूरा होने की बात कही गई है। वहीं भारत-नेपाल बॉर्डर रोड-II के लिए भी प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजे गए हैं।
नए सैन्य स्टेशन बनाने की भी तैयारी
भारत-भूटान सीमा से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। साथ ही सेना मुख्यालय की ओर से सिलीगुड़ी कॉरिडोर में नए सैन्य स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन कदमों का उद्देश्य सीमा के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अब केवल सतही सड़क और रेलवे नेटवर्क पर निर्भर रहने के बजाय अंडरग्राउंड और मल्टी-मॉडल परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़े इस रणनीतिक कॉरिडोर में समानांतर रास्ते, अंडरग्राउंड रेलवे, मजबूत सीमा सड़क और सैन्य ढांचे तैयार करने से किसी एक मार्ग के बाधित होने की स्थिति में दूसरे रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।


