'हम ललन सिंह को नहीं जानते', अनंत सिंह के एक बयान से JDU में क्यों मची खलबली?

अनंत सिंह ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को पहचानने से इनकार किया। पटना स्नातक MLC चुनाव में नीरज कुमार के विरोध और जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन से JDU में सियासी टकराव बढ़ा।

Alakha Singh
Published on: 23 Oct 2026 9:25 PM IST (Updated on: 23 Oct 2026 9:27 PM IST)
हम ललन सिंह को नहीं जानते, अनंत सिंह के एक बयान से JDU में क्यों मची खलबली?
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Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एमएलसी चुनाव ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। कभी ललन सिंह का करीबी माने जाने वाले अनंत सिंह का कहना है कि वह उन्हें जानते ही नहीं हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अनंत सिंह पटना स्नातक सीट पर अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं और जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह की जीत का दावा कर रहे हैं।

अनंत सिंह का बयान सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी है या JDU के भीतर बढ़ती खाई का संकेत? यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि पार्टी ने नीरज कुमार के खिलाफ बगावती रुख अपनाने वाले अनंत सिंह को मनाने की जिम्मेदारी खुद ललन सिंह को सौंपी थी। दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन इसके बावजूद अनंत सिंह अपने रुख से पीछे हटते नहीं दिखे। अब केंद्रीय मंत्री को पहचानने तक से इनकार करने वाले उनके बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

ललन सिंह पर सीधा हमला या दूरी बनाने की रणनीति?

शुक्रवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह से पूछा गया कि ललन सिंह एमएलसी चुनाव में किसके साथ हैं। इस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "बिहार में एकाध सौ ललन सिंह हैं, किसके बारे में पूछ रहे हैं?" जब पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि सवाल केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को लेकर है, तो अनंत सिंह ने जवाब दिया, "हम नहीं जानते। उनका दिल्ली में कारोबार है, हम पटना में रहते हैं।"

राजनीतिक रूप से इस बयान को महज एक सामान्य टिप्पणी मानना मुश्किल है। ललन सिंह और अनंत सिंह के बीच पहले करीबी संबंधों की चर्चा रही है। ऐसे में चुनावी विवाद के बीच इस तरह की प्रतिक्रिया दोनों नेताओं के रिश्तों में आई तल्खी की ओर इशारा करती है। हालांकि, अनंत सिंह ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने ललन सिंह को लेकर ऐसा बयान क्यों दिया।

अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ क्यों उतरे अनंत सिंह?

पूरे विवाद की जड़ पटना स्नातक सीट का एमएलसी चुनाव है। इस सीट पर JDU ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया, लेकिन अनंत सिंह ने उनका समर्थन करने के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में खुलकर प्रचार किया। उन्होंने अनुज की जीत और नीरज की हार का दावा भी किया।

अनंत सिंह की नाराजगी के पीछे विधानसभा चुनाव के दौरान हुए पुराने राजनीतिक मतभेद बताए जा रहे हैं। ललन सिंह ने भी पहले मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि अनंत सिंह की नाराजगी की वजह समझी जा सकती है। उनके मुताबिक, विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने अनंत सिंह का विरोध किया था, लेकिन उस समय JDU की प्रदेश इकाई ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।

यहीं से पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा हुई। एक ओर पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में था, दूसरी ओर उसी पार्टी के विधायक उसके खिलाफ दूसरे प्रत्याशी के समर्थन में खड़े नजर आए। यह घटनाक्रम JDU के लिए संगठनात्मक अनुशासन और नेताओं के आपसी समीकरणों, दोनों के लिहाज से चुनौती बन गया।

ललन सिंह को मिली जिम्मेदारी, लेकिन नहीं माने अनंत

अनंत सिंह की बगावत सामने आने के बाद JDU नेतृत्व ने ललन सिंह को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दी थी। ललन सिंह ने अनंत सिंह से बात भी की और उन्हें नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी। लेकिन घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यह प्रयास अनंत सिंह को अपने रुख से पीछे हटाने में सफल नहीं हुआ।

इसके बाद ललन सिंह चुनाव प्रचार और बैठकों से भी दूर नजर आए। इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। क्या वह अनंत सिंह को मनाने में असफल रहे या उन्होंने विवाद से दूरी बनाए रखना बेहतर समझा? फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है।

हालांकि, यह जरूर है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिशों के बावजूद विवाद लगातार सुर्खियों में बना रहा। अनंत सिंह का ताजा बयान इस बात का संकेत है कि नीरज कुमार की उम्मीदवारी को लेकर पैदा हुई नाराजगी अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है।

'ना मरने का गम, ना जीने की खुशी', कार्रवाई की चुनौती

अनंत सिंह ने पार्टी के खिलाफ अपने रुख पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि वह चाहते हैं कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, "ना मरने का गम, ना जीने की खुशी है।" साथ ही उन्होंने जनता को मालिक बताते हुए कहा कि सब कुछ उसी के जिम्मे है।

उनका यह बयान पार्टी नेतृत्व के लिए खुली चुनौती की तरह देखा जा सकता है। आमतौर पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने वाले विधायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना रहती है। लेकिन अनंत सिंह का रुख बताता है कि फिलहाल वह संभावित कार्रवाई को लेकर दबाव में आते नहीं दिख रहे हैं।

दूसरी ओर, उन्होंने चुनाव में सरकार की ओर से बेईमानी किए जाने की संभावना से इनकार किया। साथ ही कहा कि अगर ऐसा हुआ तो आगे देखा जाएगा। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने चुनाव परिणाम और उसकी निष्पक्षता को लेकर भी अपनी बात रखी।

नीतीश कुमार को गुरु बताया, वशिष्ठ नारायण सिंह पर चुप्पी

विवाद के बीच अनंत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना गुरु बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पूरा बिहार बसाया है। वहीं, JDU के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह पर टिप्पणी करने से उन्होंने इनकार कर दिया। अनंत सिंह ने कहा कि वह अंतिम बेला में हैं और वह उन पर कुछ नहीं बोलेंगे।

नीतीश कुमार के प्रति सम्मान जताने और दूसरी ओर पार्टी के उम्मीदवार का विरोध करने का यह विरोधाभास भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि अनंत सिंह की नाराजगी को फिलहाल पूरे नेतृत्व के खिलाफ बगावत के बजाय नीरज कुमार की उम्मीदवारी और उससे जुड़े पुराने मतभेदों के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह अहम होगा।

अनुज सिंह की जीत का दावा, 27 अक्टूबर को आएगा फैसला

अनंत सिंह ने पटना स्नातक सीट से जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह की जीत का दावा किया है। जब उनसे पूछा गया कि अनुज सिंह जीत गए तो क्या वह रसगुल्ला बंटवाएंगे, तो उन्होंने कहा कि यह रसगुल्ला बांटने वाला चुनाव नहीं है। तीन जिलों में फैली सीट पर दूरी अधिक होने के कारण खर्च भी ज्यादा होगा।

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान समाप्त हो गया। अब 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आएंगे। इसके बाद स्पष्ट होगा कि अनंत सिंह का राजनीतिक आकलन कितना सही साबित हुआ और पटना स्नातक सीट पर JDU के उम्मीदवार को क्या परिणाम मिलता है।

नतीजे के बाद JDU के सामने होगी असली चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि नीरज कुमार जीतते हैं या हारते हैं। असली सवाल यह है कि चुनाव के बाद JDU अपने विधायक की खुली बगावत से कैसे निपटती है। यदि पार्टी कार्रवाई करती है, तो अनंत सिंह के साथ उसके रिश्तों पर असर पड़ सकता है। यदि कार्रवाई नहीं होती, तो दूसरे नेताओं के बीच भी पार्टी अनुशासन को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

ललन सिंह को लेकर अनंत सिंह की टिप्पणी ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। दोनों नेताओं के बीच पहले करीबी संबंधों की चर्चा और फिर सुलह की कोशिशों के बावजूद सामने आई तल्खी ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को चर्चा में ला दिया है।

फिलहाल इसे JDU में किसी बड़े विभाजन का निर्णायक संकेत कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना साफ है कि पटना स्नातक सीट का चुनाव पार्टी के लिए सिर्फ एक एमएलसी सीट की लड़ाई नहीं रह गया है। यह नेतृत्व की पकड़, आंतरिक अनुशासन और पुराने राजनीतिक रिश्तों की परीक्षा भी बन चुका है। 27 अक्टूबर के नतीजों के साथ ही यह भी देखना होगा कि चुनावी विवाद खत्म होता है या JDU के भीतर सियासी टकराव का नया अध्याय शुरू होता है।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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