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'अब लड़ाई होगी आर-पार...', अन्ना की अंतिम चेतावनी से फडणवीस सरकार की बढ़ीं मुश्किलें! आंदोलन ने पकड़ा जोर, 2011 जैसी क्रांति फिर से?
Anna Hazare Lokayukt Demand: इस आंदोलन को अन्ना ने अपना 'अंतिम संघर्ष' करार देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी। उनका कहना है कि जब तक महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जाता, तब तक वे भूख हड़ताल किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं करेंगे।
Anna Hazare Lokayukt Demand (photo: social media)
Anna Hazare Lokayukt Demand: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता नज़र आ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की 'बुलंद' आवाज बन चुके वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर अन्ना हजारे ने अपने पैतृक गांव रालेगणसिद्धी में आज 30 जनवरी 2026 यानी शुक्रवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
इस आंदोलन को अन्ना ने अपना 'अंतिम संघर्ष' करार देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी। उनका कहना है कि जब तक महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जाता, तब तक वे भूख हड़ताल किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं करेंगे।
सरकार केवल दिखावा कर रही है - अन्ना का तीखा हमला
अनशन शुरू करने से पहले पत्रकारों से बातचीत में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “सरकार सिर्फ फाइलों और वादों का ढोंग कर रही है। यदि सरकार सच में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहती है, तो लोकायुक्त कानून से डर क्यों रही है?” अन्ना का मानना है कि लोकायुक्त कानून जनहित के लिए बाहर आवश्यक है और अब वे किसी भी तरह के खोखले आश्वासन के झांसे में नहीं आएंगे।
3 साल का इंतजार और टूटा विश्वास
अन्ना हजारे ने याद दिलाया कि यह मांग कोई नई नहीं है। लोकायुक्त कानून को लेकर उनका संघर्ष पिछले 3 सालों से लगातार जारी है।
- 2022 में भी अनशन: उस वक़्त देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्रियों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इस विश्वास पर अनशन तोड़ा था कि कानून जल्द लागू होगा।
- मंजूरी के बाद भी हुई देरी: विधानसभा और विधान परिषद से मसौदा पारित होने के बावजूद कानून आज तक जमीन पर नहीं उतर पाया।
- समिति की अनदेखी: सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को भी साफतौर पर अनदेखा कर दिया गया।
फडणवीस सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति के बीच अन्ना का यह कदम सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अन्ना ने साफ़ कहा कि इस बार "कमेटी-कमेटी" का खेल किसी कीमत पर नहीं चलेगा। आपको बता दे, 80 साल से ज्यादा उम्र होने के बावजूद उनका जज्बा आज भी वैसा ही है जैसा कि साल 2011 के ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान था।
अन्ना की अंतिम चेतावनी
रालेगणसिद्धी के यादवबाबा मंदिर परिसर में शुरू हुआ यह अनशन केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है।
अन्ना ने दो टूक शब्दों में कहा, “जब तक लोकायुक्त कानून लागू होने की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, मेरा अनशन जारी रहेगा। अब पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं।” अब देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और क्या अन्ना का यह ‘अंतिम महासंग्राम’ सरकार को झुकने पर मजबूर कर पाएगा।


