अन्नामलाई ने क्यों बदला CJP पर रुख? पहले समर्थन करके अब अभिजीत दीपके को दे दिया बड़ा झटका!

Annamalai on CJP: अन्नामलाई ने CJP को लेकर अपना रुख बदलते हुए कहा कि उन्होंने कभी कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन नहीं किया। पहले वह CJP के सवाल उठाने का समर्थन कर चुके हैं।

Aditya Kumar Verma
Published on: 23 Oct 2026 10:47 AM IST
Annamalai on CJP | From Support to Denial
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Image Source- Social Media

Annamalai on CJP: भारतीय जनता पार्टी छोड़ चुके के अन्नामलाई के कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) को लेकर सुर बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में सीजेपी के प्रदर्शन और उसके उठाए सवालों को लेकर अन्नामलाई ने कहा था कि भले ही वह संगठन के तौर-तरीकों से सहमत नहीं हैं, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर सीजेपी सवाल उठा रही है, उन पर वह उसका समर्थन करते हैं। अब उन्होंने साफ कहा है कि उन्होंने कभी भी सीजेपी का समर्थन नहीं किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को अन्नामलाई ने कहा कि उनकी पार्टी और सीजेपी का एजेंडा अलग है। उन्होंने कहा, "हमने कभी भी कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन नहीं किया है। उनका एजेंडा अलग है, हमारा एजेंडा अलग है।" अन्नामलाई के इस बयान के बाद उनके पुराने बयान को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

पहले CJP को लेकर क्या कहा था?

इससे पहले अन्नामलाई ने सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर कहा था कि हो सकता है कि वह संगठन के तौर-तरीकों या विरोध करने के तरीके से सहमत न हों, लेकिन जिन सवालों को सीजेपी उठाना चाहती है, उन पर वह पूरी तरह उसके साथ हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि किसी को गिरफ्तार कर जेल में डालने से सीजेपी के नेता और मजबूत हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एसआईआर (SIR) पर सवाल पूछने का अधिकार है। हालिया रिपोर्टों में भी अन्नामलाई के इसी रुख का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने सीजेपी के तरीकों से असहमति जताते हुए उसके विरोध और सवाल उठाने के अधिकार का समर्थन किया था।

जून में ही छोड़ दी थी भाजपा

अन्नामलाई के बयान इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि वह अब भाजपा में नहीं हैं। उन्होंने पांच जून 2026 को भाजपा छोड़ दी थी। इससे पहले वह तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई तमिलनाडु में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे और पार्टी के लिए एक चर्चित चेहरा बनकर उभरे थे। जून में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नई राजनीतिक राह पर आगे बढ़ने की बात भी कही थी।

अन्नामलाई ने हालिया विवाद के बीच खुद भी भाजपा के कुछ लोगों को याद दिलाया था कि वह पांच जून को ही पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा था कि सीजेपी के प्रदर्शन के तरीकों से वह सहमत नहीं हैं और उन्हें उसके कई तरीके गलत दिशा में लगते हैं, लेकिन किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर विरोध, बहस या प्रदर्शन करने के अधिकार को वह अलग विषय मानते हैं।

भाजपा पर भी उठाए थे सवाल

सीजेपी (CJP) को लेकर अपनी टिप्पणी से पहले अन्नामलाई ने केंद्र सरकार और भाजपा पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने एक पोस्ट में कहा था कि केंद्र सरकार दिल्ली में 12 साल से ज्यादा समय से सत्ता में है और खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लगातार किसी न किसी दुश्मन को खड़ा करती है।

अन्नामलाई ने सीजेपी के प्रदर्शन को देशविरोधी या विदेशी फंडिंग से संचालित बताए जाने के आरोपों को भी खारिज किया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र में अगर कोई कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाता है तो उसे तरह-तरह के नाम दिए जाते हैं और यहां तक कि विदेशी एजेंट भी कहा जाता है।

जेल और प्रदर्शन को लेकर भी कही थी बड़ी बात

बुधवार को वी द लीडर्स के संस्थापक ने कहा था कि आज किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल के लिए जेल भेजा जा सकता है, जमानतदारों के बॉण्ड खारिज किए जा सकते हैं और निवारक बॉण्ड से जुड़े मामलों में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को अधिकार मिलने के बाद वह अपने तरीके से कार्रवाई कर सकता है।

अन्नामलाई ने कहा था कि जब से उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने को कहा है, तब से उन पर लगातार हमले हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने इन हमलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी, क्योंकि उनके लिए तमिलनाडु के जमीनी मुद्दों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी था।

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर लोकतंत्र में कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाया जाता है तो सवाल करने वाले को भला-बुरा कहा जाता है और उस पर हमलों की झड़ी लग सकती है। इसमें उसे विदेशी एजेंट तक करार देने की बात शामिल हो सकती है।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर भी घेरा

अन्नामलाई ने सीजेपी (CJP) के खिलाफ लगाए जा रहे विदेशी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोपों पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए (FCRA) गृह मंत्रालय के तहत आता है और देश की एजेंसियां विपक्ष को रिपोर्ट नहीं करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावासों में पर्याप्त कर्मचारी हैं, जो विदेशी दुश्मनों के साथ सांठगांठ करने वाले किसी भी भारतीय पर नजर रख सकते हैं। उनके मुताबिक हर विरोध प्रदर्शन और बयान को देशविरोधी या बाहरी ताकतों से वित्तपोषित बताना अब थकाऊ और उबाऊ हो चुका है।

भाजपा ने भी किया था पलटवार

अन्नामलाई की लगातार टिप्पणियों के बाद भाजपा की ओर से भी पलटवार किया गया था। तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने अन्नामलाई के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भाजपा में रहते हुए अन्नामलाई एसआईआर (SIR) का समर्थन करते थे और उन्होंने इस प्रक्रिया का काम भी देखा था।

भाजपा की ओर से यह दावा भी किया गया था कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ बहस के दौरान अन्नामलाई ने एसआईआर का बचाव किया था। पार्टी के अनुसार, अब भाजपा छोड़ने के बाद सीजेपी और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख बदल गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में भी भाजपा के तमिलनाडु प्रवक्ता नारायणन तिरुपति के इसी आरोप का उल्लेख है।

इस तरह सीजेपी (CJP) को लेकर अन्नामलाई के पहले के बयान और अब सामने आए ताजा बयान ने राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ उनका पहले का बयान है, जिसमें उन्होंने सीजेपी के सवाल उठाने के अधिकार का समर्थन किया था, वहीं अब उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन नहीं किया।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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