TRENDING TAGS :
Arshad Madani News: ‘मुसलमान न कभी झुका है और न झुकेगा’, देश को वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश, अरशद मदनी का बयान
Arshad Madani News: अरशद मदनी ने देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और वैचारिक बदलाव पर चिंता जताई। उन्होंने नफरत की राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठाए।
Arshad Madani News
Arshad Madani News: जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष Arshad Madani ने देश की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश को एक योजनाबद्ध तरीके से “वैचारिक राष्ट्र” में बदले जाने की कोशिश हो रही है, जिससे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर असर पड़ सकता है।
बढ़ती नफरत और राजनीतिक माहौल पर सवाल
अरशद मदनी ( Arshad Madani Latest News) ने अपने बयान में कहा कि पहले केवल मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब स्थिति और गंभीर हो गई है क्योंकि इस्लाम को भी टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा, हालांकि वह प्रेम और शांति के मार्ग पर चलने में विश्वास रखता है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की बैठक का घोषणापत्र भी साझा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में नफरत की राजनीति अब “धमकी की राजनीति” में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य समुदायों के बीच भय का माहौल पैदा करना है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून व्यवस्था पर टिप्पणी
मदनी ने आरोप लगाया कि देश में सांप्रदायिकता बढ़ रही है और संवैधानिक संस्थाएं कई मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कानून के रखवाले निष्क्रिय दिखाई दे रहे हैं, जबकि समाज में तनाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए समाज में ध्रुवीकरण किया जा रहा है और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, सरकारें भय और दबाव से नहीं बल्कि न्याय और समानता से चलती हैं।
राजनीतिक बयानों और नीतियों पर आपत्ति
अपने बयान में उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक राजनीतिक नेता के कथित बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि “केवल एक समुदाय के लिए काम करने” की सोच संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री या जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना है। मदनी ने यह भी आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता, कुछ धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य बनाने की चर्चा, धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई और मतदाता सूची से जुड़े बदलाव जैसे कदम समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।
“वैचारिक राष्ट्र” बनाने की कोशिश का आरोप
अरशद मदनी ( Arshad Madani News) ने कहा कि देश को एक विचारधारा आधारित राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद लागू नीतियां और कानून इस दिशा में संकेत देते हैं कि अल्पसंख्यकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब स्थिति केवल सामाजिक या राजनीतिक नहीं रही, बल्कि धार्मिक पहचान को भी चुनौती दी जा रही है।
एकजुटता और संघर्ष की अपील
अपने बयान के अंत में मदनी ने सभी न्यायप्रिय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की कि वे मिलकर सांप्रदायिकता के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि देश में भाईचारा, सहिष्णुता और संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।


