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जेल की हवा लगी तो मिला सुकून! तिहाड़ में ऐसा क्या मिला कि तारीफ करने लगे आशुतोष रांका?
Ashutosh Ranka Tihar Jail: तिहाड़ जेल में 8 दिन बिताने के बाद CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने बताया कि वहां उन्होंने नींद पूरी की, किताबें पढ़ीं और मोबाइल-सोशल मीडिया से दूरी बनाई। जानिए जेल के अनुभव पर उन्होंने क्या कहा।
Ashutosh Ranka
Ashutosh Ranka Tihar Jail: जेल (Jail) का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में पाबंदियों, मुश्किलों और बेचैनी की तस्वीर उभरती है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) का अनुभव कुछ अलग रहा। एक सप्ताह से ज्यादा समय तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में बिताने के बाद बाहर आए रांका ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जेल में उन्हें दो ऐसे फायदे मिले, जिनकी शायद उन्होंने खुद भी कल्पना नहीं की थी। उनके मुताबिक, वहां उन्होंने अपनी अधूरी नींद पूरी की और मोबाइल फोन (Mobile Phone) व सोशल मीडिया (Social Media) से दूरी बनाकर डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox) भी कर लिया।
जेल में बिताए वक्त को लेकर क्या बोले आशुतोष रांका?
जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर कथित तौर पर जबरन प्रवेश कर प्रदर्शन की कोशिश और बेल बॉन्ड (Bail Bond) की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों के बाद गिरफ्तार किए गए रांका को जेल भेजा गया था। बाहर आने के बाद उन्होंने जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि शुरुआती दो-तीन दिन उन्होंने मुख्य रूप से आराम करने और सोने में बिताए।
एक इंटरव्यू (Interview) में अपने अनुभव को हल्के-फुल्के अंदाज में साझा करते हुए रांका ने बताया कि हिरासत के दौरान रात में बार-बार जगाए जाने के कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में जेल पहुंचने के बाद शुरुआती दिनों में उन्हें आराम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने कुछ किताबें पढ़ीं और बाकी समय भी अपेक्षाकृत शांति से बिताया।
रांका ने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि अगर कोई व्यक्ति वहां किसी बड़ी गलती के कारण नहीं पहुंचा है, तो उसके लिए जेल का अनुभव वैसा मुश्किल नहीं हो सकता, जैसा आमतौर पर माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जेल एक ऐसी जगह है, जहां से कुछ सीखने का अवसर मिल सकता है।
8 दिन में मोबाइल और सोशल मीडिया से हो गया डिटॉक्स
आशुतोष रांका ने जेल में रहने के एक और दिलचस्प पहलू का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों को अक्सर फोन और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाला माना जाता है। ऐसे में जेल में बिताए आठ दिनों के दौरान उन्हें मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों से दूर रहने का मौका मिला।
रांका के मुताबिक, इस दौरान उनका सोशल मीडिया और मोबाइल डिटॉक्स (Mobile Detox) भी हो गया। यानी जिस फोन और इंटरनेट से लोग दिनभर जुड़े रहते हैं, उनसे दूरी अपने आप बन गई। उनके इस बयान में जेल के अनुभव के साथ हल्का हास्य (Humour) भी नजर आया।
डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox) का मतलब कुछ समय के लिए स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाना है। लगातार स्क्रीन देखने और ऑनलाइन रहने की आदत से ब्रेक लेने के लिए इसे उपयोगी माना जाता है। इससे कुछ लोगों को नींद की दिनचर्या सुधारने, ध्यान केंद्रित करने और मानसिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की आदतों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
तिहाड़ के खाने और इंतजाम की भी कर चुके हैं तारीफ
जेल से बाहर आने के बाद रांका ने तिहाड़ में मिलने वाले खाने और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर भी सकारात्मक टिप्पणी की थी। एक कंटेंट क्रिएटर (Content Creator) से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उन्हें जेल का खाना अच्छा लगा और तिहाड़ जेल भी अच्छी लगी।
इससे पहले रांका ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अगर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को जेल में डाला गया, तो वे वहां ‘जेल ठीक करो आंदोलन’ (Improve Jail Campaign) शुरू कर देंगे। हालांकि, उनके मुताबिक, तिहाड़ के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जेल की व्यवस्था पहले से ही अच्छी है। रांका ने भी अपने अनुभव के आधार पर वहां के खाने और इंतजाम की तारीफ की।


