TRENDING TAGS :
Assam Exit Poll: सत्ता में वापसी की राह पर हेमंत बिस्वा सरमा, लेकिन विपक्ष बनेगा चुनौती
Assam ElectionExit Poll: असम चुनाव 2026 के पोस्ट-पोल अनुमान में NDA आगे, लेकिन विपक्ष मजबूत। सीट-दर-सीट विश्लेषण, मतदान पैटर्न और जीत के प्रमुख कारक जानें।
Assam Election Result 2026 Post Poll Hemant Biswa Sarma
Assam Exit Poll 2026: असम चुनाव 2026 का जनादेश इस बार सीधा-सपाट नहीं है। रिकॉर्ड मतदान, क्षेत्रीय ध्रुवीकरण और सामाजिक समीकरणों के जटिल मेल ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। शुरुआती पोस्ट-पोल अनुमान संकेत देते हैं कि हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने की स्थिति में है, लेकिन विपक्ष पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभर रहा है। यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि सत्ता के संतुलन और राजनीतिक भूगोल को नए सिरे से परिभाषित करने का चुनाव बन गया है।
रिकॉर्ड मतदान ने क्यों नहीं दी किसी एक पक्ष को बढ़त?
असम के चुनाव में इस बार ‘रिकॉर्ड मतदान’ रहा है लेकिन ऊँचे मतदान को एकतरफा सत्ता-विरोध मान लेना इस राज्य के संदर्भ में सही नहीं है। क्योंकि यहाँ अक्सर दोनों पक्षों की उच्च लामबंदी भी बड़े मतदान में बदलती है। इस बार भी यही मिश्रित तस्वीर दिखी, ऊपरी असम, शहरी इलाकों और लाभार्थी समूहों में बढ़ा मतदान एनडीए के पक्ष में गया जबकि निचले असम और कुछ मिश्रित सामाजिक क्षेत्रों में अधिक भागीदारी ने विपक्ष को ऊर्जा दी। यानी मतदान ने किसी एक पक्ष को निर्णायक बढ़त नहीं दी। बल्कि मुकाबले को व्यापक और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया। यही कारण है कि कई सीटें अंतिम दौर तक अनिश्चित बनी रहीं।
ऊपरी बनाम निचला असम: दो अलग चुनावी कहानियाँ
इस चुनाव का दूसरा बड़ा कारक ‘क्षेत्रीय विभाजन’ रहा। ऊपरी असम—डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, सोनितपुर, गोलाघाट जैसी पट्टियों में—एनडीए की संगठनात्मक मजबूती, लाभार्थी योजनाएँ और असमीया पहचान की नई व्याख्या ने उसे ठोस आधार दिया। इसके विपरीत निचला असम—धुबरी, बरपेटा, नगांव-मोरीगांव—में मुस्लिम मतों का व्यवहार, स्थानीय असंतोष और विपक्षी पुनर्संगठन चुनाव को पूरी तरह अलग दिशा में ले गया। यही ‘डुअल पॉलिटिकल ज़ोन’ असम को बाकी राज्यों से अलग बनाता है, जहाँ एक ही चुनाव में दो तरह की राजनीतिक धाराएँ समानांतर चलती हैं।
मुस्लिम वोट: एकजुटता बनाम बिखराव का असर
निचले असम और बराक घाटी में मुस्लिम मत इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘फ्लोटिंग फैक्टर’ रहा। कई सीटों पर यह प्रश्न था कि मतदाता कांग्रेस के साथ एकजुट होगा या एआईयूडीएफ के साथ बँट जाएगा। जहाँ सामरिक मतदान हुआ, वहाँ विपक्ष को स्पष्ट लाभ मिला—धुबरी, गौरीपुर, बिलासिपारा जैसे क्षेत्रों में। लेकिन जहाँ यह बिखरा, वहाँ एनडीए को अप्रत्यक्ष फायदा हुआ। यही कारण है कि पूरे चुनाव में विपक्ष का प्रदर्शन ‘एक समान’ नहीं रहा।बल्कि सीट-दर-सीट बदलता रहा।
चाय-जनजाति और लाभार्थी राजनीति का निर्णायक रोल
ऊपरी असम और चाय-बागान क्षेत्रों में ‘चाय-जनजाति’ वोट निर्णायक बना रहा। पिछले कुछ वर्षों में वेतन, सामाजिक योजनाओं और पहचान की राजनीति के माध्यम से एनडीए ने इस वर्ग में मजबूत पैठ बनाई। दूसरी ओर विपक्ष इस वर्ग में पूर्ण रूप से पुनः स्थापित नहीं हो सका। इसके साथ ही ‘महिला लाभार्थी’, ‘प्रत्यक्ष नकद योजनाएँ’ और ‘कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी’ ने एक स्थिर वोट बैंक तैयार किया, जिसने कई सीटों पर एनडीए को आधार दिया, भले ही वहाँ स्थानीय असंतोष मौजूद रहा हो।
बोडोलैंड: किंगमेकर क्षेत्र की जटिल तस्वीर
बोडोलैंड क्षेत्र इस चुनाव में फिर ‘किंगमेकर ज़ोन’सबना। बीपीएफ का एनडीए के साथ आना और यूपीपीएल का अलग रहना, इस क्षेत्र को सीधी भाजपा बनाम कांग्रेस की लड़ाई से बाहर ले गया। यहाँ मुकाबला ‘बोडो बनाम गैर-बोडो’, ‘स्थानीय नेतृत्व बनाम गठबंधन’ और ‘वोट ट्रांसफर की क्षमता’ पर आधारित रहा। तमुलपुर, गोसाईगांव, बाओखुंगरी जैसी सीटों पर यही कारण है कि परिणाम पूरी तरह अनिश्चित बने रहे।
गोगोई फैक्टर और असमीया अस्मिता की वापसी
जोरहाट, शिवसागर, तिताबर, तेओक जैसी सीटों में ‘गोगोई परिवार’ और उससे जुड़ी राजनीतिक विरासत ने विपक्ष को एक वैचारिक और भावनात्मक आधार दिया। यह केवल चुनावी मुकाबला नहीं था। बल्कि असमीया अस्मिता, सीएए की स्मृति और क्षेत्रीय स्वाभिमान का संगम था। हालाँकि यह प्रभाव सीमित क्षेत्रों में ही केंद्रित रहा और पूरे राज्य में व्यापक लहर नहीं बन पाया।लेकिन जहाँ बना, वहाँ मुकाबला बेहद कड़ा हुआ।
शहरी बनाम ग्रामीण मतदान व्यवहार
गुवाहाटी, दिसपुर, जलुकबाड़ी जैसे शहरी क्षेत्रों में मतदान का पैटर्न अपेक्षाकृत स्थिर रहा, जहाँ संगठन, मध्यमवर्गीय मुद्दे और शासन-आधारित मतदान ने एनडीए को बढ़त दी। इसके विपरीत अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों—खासतौर पर गुवाहाटी के आसपास और निचले असम में—स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि अधिक प्रभावी रहे। इस ‘शहरी-ग्रामीण अंतर’ ने कई सीटों को टॉस-अप बना दिया।
बहुकोणीय मुकाबले में किसे मिला सबसे ज्यादा लाभ?
इस चुनाव का एक बड़ा कारक यह भी रहा कि कई सीटों पर सीधी लड़ाई नहीं थी। कांग्रेस, एआईयूडीएफ, राइजोर दल, असम जातीय परिषद, यूपीपीएल—इन सबकी मौजूदगी ने कई जगह त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबले बनाए। इसका सबसे बड़ा लाभ एनडीए को मिला। क्योंकि उसका वोट अपेक्षाकृत एकजुट रहा, जबकि विपक्षी वोट कई जगह बँट गया। जहाँ यह बिखराव कम हुआ, वहाँ विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया।
असम का यह चुनाव बड़े नेताओं के साथ-साथ ‘स्थानीय चेहरों’ का भी चुनाव रहा। कई सीटों पर पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार की व्यक्तिगत साख, सामाजिक जुड़ाव और क्षेत्रीय प्रभाव निर्णायक बना। इसी कारण कई सीटें, जहाँ एक पक्ष को बढ़त मानी जा रही थी, मतदान के बाद अनिश्चित हो गईं। यह रुझान विशेष रूप से नगांव, बरपेटा, बोडोलैंड और बराक घाटी में दिखा।
समग्र राजनीतिक निष्कर्ष
इन सभी कारकों को एक साथ रखने पर सबसे स्पष्ट तस्वीर यह बनती है कि असम में इस बार कोई एकतरफा लहर नहीं थी। चुनाव ‘संतुलित प्रतिस्पर्धा’ का था।जिसमें एनडीए अपनी संरचनात्मक बढ़त और संगठन के कारण आगे रहा, जबकि विपक्ष ने कुछ क्षेत्रों में प्रभावी वापसी की। यह चुनाव सत्ता परिवर्तन का संकेत कम और ‘सत्ता के आकार और संतुलन में बदलाव’ का संकेत अधिक देता है।असम में मतदान 9 अप्रैल 2026 को हुआ, कुल मतदान लगभग 85–86% के आसपास रहा और मतगणना 4 मई 2026 को होनी है। इसलिए नीचे दी गई सूची को ‘कौन जीत रहा है’ के अर्थ में पोस्ट-पोल अनुमान माना जाए, अंतिम परिणाम नहीं।
एनडीए में भाजपा, एजीपी और बीपीएफ साथ हैं। सीट बँटवारे में भाजपा 89, एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर है। विपक्ष में कांग्रेस-नेतृत्व वाला असम सोनमिलित मोर्चा है, जिसमें कांग्रेस, राइजोर दल, असम जातीय परिषद, वाम दल और पहाड़ी सहयोगी शामिल हैं। एआईयूडीएफ अलग लड़ रही है, जबकि यूपीपीएल भी एनडीए से अलग होकर मैदान में है।
अंतिम पोस्ट-पोल अनुमान: एनडीए — 74 सीट, करीब 46–47% वोटकांग्रेस-नेतृत्व वाला मोर्चा — 43 सीट, करीब 39–41% वोटएआईयूडीएफ — 4 सीट, करीब 5% वोटयूपीपीएल/अन्य/निर्दलीय — 5 सीट, करीब 7–8% वोट
पार्टी-दर-पार्टी अनुमान : भाजपा — 58 सीट, करीब 36–37% वोट,एजीपी — 8 सीट, करीब 5–6% वोट,बीपीएफ — 8 सीट, करीब 4% वोट,कांग्रेस — 34 सीट, करीब 31–33% वोट,राइजोर दल — 3 सीट, करीब 2–3% वोट,असम जातीय परिषद — 2 सीट, करीब 2–3% वोट,वाम/पहाड़ी सहयोगी — 4 सीट, करीब 2% वोट,एआईयूडीएफ — 4 सीट।यूपीपीएल/अन्य — 5 सीट।
सीट-दर-सीट पोस्ट-पोल अनुमान: कहाँ कौन आगे?
1. कोकराझार–बोडोलैंड
गोसाईगांव — टॉस-अप। डोटमा — एनडीए। कोकराझार — एनडीए। बाओखुंगरी — टॉस-अप।परबतझोरा — एनडीए। सिदली चिरांग — एनडीए।बिजनी — टॉस-अप। मानस — एनडीए। बक्सा — एनडीए।
2. धुबरी पट्टी
गोलकगंज — एनडीए। गौरीपुर — कांग्रेस। धुबरी — कांग्रेस। बिरसिंह-जरुआ — टॉस-अप। बिलासिपारा — कांग्रेस। मनकाचर — एआईयूडीएफ/विपक्षी बढ़त।जलेश्वर — कांग्रेस। गोलपाड़ा ईस्ट — टॉस-अप।श्रीजंग्राम — टॉस-अप। मंदिया — कांग्रेस। चेंगा — कांग्रेस।
3. बरपेटा–बोंगाईगांव–नलबाड़ी
अभयापुरी — एनडीए। बोंगाईगांव — एनडीए। भवनिपुर-सोरभोग — एनडीए। बरपेटा — टॉस-अप। पकाबेतबाड़ी — टॉस-अप। बजाली — एनडीए। हाजो-सुआलकुची — टॉस-अप। बरखेेत्री — एनडीए। नलबाड़ी — एनडीए। तिहू — एनडीए।
4. दर्रांग–उदालगुड़ी–तमुलपुर
रंगिया — एनडीए। कमलपुर — एनडीए। तमुलपुर — टॉस-अप। गोरेश्वर — एनडीए। भेरगांव — टॉस-अप।उदालगुड़ी — एनडीए। मजबाट — एनडीए। तंगला — टॉस-अप। सिपाझार — एनडीए। मंगलदई — एनडीए।दलगांव — टॉस-अप।
5. गुवाहाटी–कामरूप
गोलपाड़ा वेस्ट — टॉस-अप। दूधनोई — टॉस-अप।चमरिया — टॉस-अप। बोक-छायगांव — टॉस-अप।पलाशबाड़ी — एनडीए। दिसपुर — एनडीए। डिमोरिया — एनडीए। न्यू गुवाहाटी — एनडीए। गुवाहाटी सेंट्रल — एनडीए हल्की बढ़त। जलुकबाड़ी — एनडीए।
6. बराक पहाड़
बोकाजन — एनडीए। हाव्राघाट — एनडीए। दिफू — एनडीए।रोंगखांग — एनडीए। आमरी — एनडीए।हाफलांग — एनडीए।
7. करीमगंज–हैलाकांडी
हैलाकांडी — टॉस-अप। अलगापुर-कटलीछरा — टॉस-अप। करीमगंज नॉर्थ — एनडीए। करीमगंज साउथ — एनडीए। पाथरकांडी — एनडीए। राम कृष्ण नगर — एनडीए।
8. सिलचर–कछार
लखीपुर — टॉस-अप। उधारबंद — एनडीए। कटीगोराह — टॉस-अप। बोरखोला — एनडीए। सिलचर — एनडीए। सोनाई — टॉस-अप। ढोलाई — एनडीए।
9. नगांव–मोरीगांव
जगिरोड — टॉस-अप। लहरीघाट — कांग्रेस/विपक्ष।मोरीगांव — टॉस-अप। धिंग — कांग्रेस/विपक्ष।रूपाहीहाट — कांग्रेस/विपक्ष। समागुड़ी — टॉस-अप।नगांव-बटाद्रबा — टॉस-अप। राहा — एनडीए।
10. काजीरंगा–होजाई–गोलाघाट
कलियाबोर — टॉस-अप। बरहामपुर — एनडीए हल्की बढ़त। बिन्नाकांदी — एआईयूडीएफ हल्की बढ़त / टॉस-अप।होजाई — एनडीए। लुमडिंग — एनडीए। गोलाघाट — एनडीए। डेरगांव — एनडीए। खुमताई — एनडीए।बोकाखाट — एनडीए। सरूपाथार — एनडीए।
11. सोनितपुर–उत्तर तट
ढेकियाजुली — एनडीए। बरछल्ला — एनडीए। तेजपुर — टॉस-अप। रंगापारा — एनडीए। नादुआर — एनडीए। बिश्वनाथ — एनडीए। बेहाली — एनडीए।गोहपुर — एनडीए। बिहपुरिया — एनडीए।
12. लखीमपुर–धीमाजी
रोंगोनदी — एनडीए। नवबोइचा — एनडीए। लखीमपुर — एनडीए। ढकुआखाना — एनडीए। धीमाजी — एनडीए। सिस्सीबोरगांव — एनडीए। जोनाई — एनडीए।सादिया — एनडीए। डूमडूमा — एनडीए।
13. डिब्रूगढ़–तिनसुकिया
मार्घेरिटा — एनडीए। डिगबोई — एनडीए। माकुम — एनडीए। तिनसुकिया — एनडीए। चाबुआ-लाहोवाल — एनडीए। डिब्रूगढ़ — एनडीए। खोवांग — एनडीए हल्की बढ़त। दुलियाजन — एनडीए। तिंगखोंग — एनडीए।नाहरकटिया — एनडीए।
14. जोरहाट–शिवसागर
सोनारी — एनडीए। बमहमोरा — एनडीए। डेमो — टॉस-अप।शिवसागर — राइजोर दल/विपक्ष। नाजिरा — कांग्रेस। माजुली — एनडीए। तेओक — कांग्रेस/विपक्ष हल्की बढ़त। जोरहाट — कांग्रेस हल्की बढ़त। मारियानी — टॉस-अप। तिताबर — कांग्रेस हल्की बढ़त।
टॉस-अप सीटों की अलग सूची
गोसाईगांव, बाओखुंगरी, बिजनी, बिरसिंह-जरुआ, गोलपाड़ा ईस्ट, श्रीजंग्राम, बरपेटा, पकाबेतबाड़ी, हाजो-सुआलकुची, तमुलपुर, भेरगांव, तंगला, दलगांव, गोलपाड़ा वेस्ट, दूधनोई, चमरिया, बोक-छायगांव, हैलाकांडी, अलगापुर-कटलीछरा, लखीपुर, कटीगोराह, सोनाई, जगिरोड, मोरीगांव, समागुड़ी, नगांव-बटाद्रबा, कलियाबोर, तेजपुर, डेमो, मारियानी।
अंतिम तस्वीर: NDA की बढ़त, लेकिन विपक्ष की मजबूत वापसी
कुल मिलाकर, अनुमान में असम में एनडीए आगे है।लेकिन मुकाबला 2021 जैसा आसान नहीं है। अगर टॉस-अप सीटों में एनडीए आधी से अधिक सीटें जीत लेता है, तो वह 75 के आसपास या उससे ऊपर जा सकता है। अगर विपक्ष टॉस-अप में बड़ा प्रदर्शन करता है, तो एनडीए 64–68 तक सिमट सकता है। सबसे संभावित तस्वीर:एनडीए-74,कांग्रेस-नेतृत्व वाला विपक्ष-43,एआईयूडीएफ/अन्य-9।
असम का यह चुनाव हमें यह सिखाता है कि केवल वोट प्रतिशत या लहर से नहीं। बल्कि क्षेत्र, समाज, गठबंधन और उम्मीदवार के सूक्ष्म संतुलन से परिणाम तय होते हैं।यही कारण है कि असम में सरकार बनाना गणित का खेल कम और राजनीतिक भूगोल को समझने की कला ज्यादा है।


