जेल से निकलते ही ED ने दबोचा, अब SC से भी बड़ा झटका! आजम खां के मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार

Azam Khan SC Hearing: जेल से रिहाई के तुरंत बाद ईडी की गिरफ्त में आए आजम खां को सुप्रीम कोर्ट से भी तत्काल राहत नहीं मिली। गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई संभव है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 2 Nov 2026 2:46 PM IST
Supreme Court Denies Azam Khans Urgent Hearing on Plea
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Azam Khan SC Hearing: हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्त में पहुंचे समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खां को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां की ओर से दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है। ऐसे में अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।

जेल के गेट पर ही ED ने कर लिया था गिरफ्तार

आजम खां को शनिवार की शाम रामपुर जेल से रिहाई मिली थी। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जैसे ही वह जेल से बाहर निकले, जेल के गेट पर ही प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ईडी की टीम उन्हें अपने साथ गाजियाबाद ले गई।

गाजियाबाद में रविवार को आजम खां की पेशी हुई, जिसके बाद उन्हें डासना जेल भेज दिया गया। अब आज उनकी रिमांड कस्टडी (Remand Custody) को लेकर सुनवाई हो सकती है। इसी बीच आजम खां ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

आजम खां की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी। मोहना की पीठ ने सुनवाई की। आजम खां की ओर से उनके वकील निजाम पाशा ने तत्काल सुनवाई की मांग रखी।

पीठ ने वकील की दलीलों पर संज्ञान लिया, लेकिन याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने यह जरूर कहा कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है। यानी आजम खां की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

जौहर ट्रस्ट से जुड़े धनशोधन मामले में हुई गिरफ्तारी

आजम खां के वकील ने अदालत को बताया कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता को जौहर ट्रस्ट (Jauhar Trust) से जुड़े धनशोधन (Money Laundering) मामले में गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था। विशेष अदालत ने 78 वर्षीय आजम खां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से आजम खां और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 58 प्राथमिकी (FIR) का संज्ञान लेते हुए उनके और अन्य लोगों के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया है। इसी मामले में ईडी की कार्रवाई आगे बढ़ी है।

जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें भी कुर्क

आजम खां के खिलाफ चल रही कार्रवाई का संबंध रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) से भी है। एजेंसी ने 28 अक्टूबर को बताया था कि उसने धनशोधन रोधी कानून (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क कर लिया है।

ईडी के मुताबिक इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया।

ईडी ने आजम खां पर यह भी आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री के तौर पर और उत्तर प्रदेश जल निगम में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कथित अनियमितताओं को अंजाम देने में मदद की गई। इसी मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है।

यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर भी चला आदेश

आजम खां की मुश्किलें सिर्फ ईडी की कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण (Rampur Development Authority) ने जुलाई में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

इसके खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। यानी यूनिवर्सिटी से जुड़े जमीन, भवन और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

अगस्त में भी हुई थी छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय ने अगस्त में इस मामले को लेकर छापेमारी (ED Raid) की थी। इस दौरान आजम खां से पूछताछ भी की गई थी। उनके खिलाफ पहले से कई अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद आजम खां की नजर इस बात पर है कि उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर इसी सप्ताह कब सुनवाई होती है। फिलहाल उन्हें गाजियाबाद की विशेष अदालत के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेजा गया है और रिमांड कस्टडी को लेकर भी अदालत में सुनवाई होनी है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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