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Azam Khan ED: भ्रष्टाचार पर शिकंजा, 28 करोड़ की बेनामी संपत्ति उजागर; आजम खां के ठिकानों पर ED छापा
Azam Khan ED कार्रवाई: 28 करोड़ की बेनामी संपत्ति का खुलासा, आजम खां से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी।
Azam Khan ED(Photo-Social Media)
Azam Khan ED: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जांच एजेंसियों ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। एक ओर विजिलेंस विभाग ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले के आरोपी पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के भाई अजय कुमार श्रीवास्तव से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा किया। दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी जांच में सपा नेता आजम खां और उनके करीबियों से जुड़े 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
28 करोड़ की संपत्ति का दावा
विजिलेंस जांच के मुताबिक अजय कुमार श्रीवास्तव बलरामपुर के सीएमओ कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनात रहे हैं। जांच में उनकी ज्ञात आय और सामने आई संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, उनकी संपत्ति वैध आय की तुलना में 783.65 प्रतिशत अधिक पाई गई। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद विजिलेंस की तीन टीमों ने बुधवार को लखनऊ और गोंडा में एक साथ कार्रवाई की। तलाशी के दौरान कई अचल संपत्तियों, दस्तावेजों और परिवार से जुड़ी कंपनियों की जानकारी जुटाई गई।
लखनऊ में 108 कमरों का होटल
विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान लखनऊ के मटियारी क्षेत्र में छह मंजिला ‘मिलेनिया रीजेंसी’ नाम का होटल सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक होटल में करीब 108 कमरे हैं। इसकी निर्माण लागत लगभग 15 करोड़ रुपये और इंटीरियर पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा इंदिरानगर और पटेलनगर इलाके में भी संपत्तियों की जानकारी मिली। पटेलनगर सेक्टर-8 में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से बना तीन मंजिला मकान मिला। तलाशी के दौरान वहां से कई दस्तावेज और महंगे फर्नीचर से संबंधित जानकारी सामने आई। इंदिरानगर में करीब 40 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत भी जांच के दायरे में आई।
गोंडा में भी संपत्ति मिली
गोंडा के जानकीनगर इलाके में करीब 1 करोड़ रुपये की लागत वाले आवास का भी पता चला। कार्रवाई के समय परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, जिसके बाद अधिकारियों ने मकान को सील कर दिया। जांच के दौरान लखनऊ के गणेशपुर-रहमानपुर में चार प्लॉट और इस्माइलगंज में एक भूखंड समेत बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में कई कृषि भूमि और अन्य भूखंडों से जुड़े दस्तावेज भी मिलने की बात सामने आई है। विजिलेंस टीम अब परिवार के नाम पर संचालित बताई जा रही कंपनियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर है कि इन संपत्तियों को अर्जित करने के लिए धन का स्रोत क्या था।
आजम खां से जुड़े 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी जांच में बड़ी कार्रवाई की। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की अलग-अलग टीमों ने आजम खां, उनके परिवार और जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों एवं ठेकेदारों के 10 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई का दायरा रामपुर, सहारनपुर और नई दिल्ली तक रहा। रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर, मैसर्स ए एंड एस एंटरप्राइजेज और शाहीन खान से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई। सहारनपुर में ट्रस्ट से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता के आवास और कार्यालय को भी जांच के दायरे में रखा गया। वहीं, नई दिल्ली में जौहर एसोसिएट्स के पार्टनर सैयद खालिद से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई।
ठेकों से मिले पैसों को ट्रस्ट तक पहुंचाने का आरोप
ED की जांच के मुताबिक, सरकारी विभागों से बड़े ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों द्वारा अर्जित मुनाफे का एक हिस्सा कथित तौर पर जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़ी गतिविधियों में डायवर्ट किया गया। एजेंसी इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और लेनदेन की जांच कर रही है। तलाशी के दौरान वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की गई है।
दो अलग-अलग मामलों में जांच तेज
उत्तर प्रदेश में एक ही दिन हुई इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने भ्रष्टाचार और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की सक्रियता को सामने ला दिया है। विजिलेंस जहां अजय कुमार श्रीवास्तव की कथित आय से अधिक संपत्ति और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है, वहीं ED जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में जुटी है। दोनों मामलों में जांच अभी जारी है और एजेंसियां बरामद दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगी।


