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बंगाल BJP के दो गुट आपस में भिड़े! वसूली रोकने पहुंचे विधायक को अपनों ने ही पीटा, अस्पताल में भर्ती
पश्चिम बंगाल के डेबरा से BJP विधायक शुभाशिस ओम पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर हमला किया। वसूली रोकने के विवाद में विधायक घायल हुए। छह लोगों के नाम शिकायत में दिए जाने की खबर है। जानिए पूरा मामला।
West Bengal BJP MLA Subhashis Om Assault: पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों बाद बीजेपी के भीतर गुटबाजी और कथित वसूली को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा से बीजेपी विधायक शुभाशिस ओम पर कथित तौर पर उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। विधायक का आरोप है कि वह पार्टी के भीतर वसूली और आपसी विवाद को खत्म कराने पहुंचे थे, लेकिन खुद मारपीट का शिकार हो गए।
सबसे अहम बात यह है कि यह घटना ऐसे दिन हुई, जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कोलकाता में एक रैली के दौरान दावा कर रहे थे कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में वसूली का खेल खत्म कर दिया है। इस घटना ने बीजेपी के दावों और जमीनी स्तर पर पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या था पूरा मामला, कैसे शुरू हुआ विवाद?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत सोमवार, 2 नवंबर को डेबरा ब्लॉक के डुआ (10/2) ग्राम पंचायत कार्यालय के आसपास हुई। यहां बीजेपी कार्यकर्ताओं के दो गुटों के बीच कथित वसूली, स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं से जुड़े फॉर्म के वितरण को लेकर विवाद हो गया।
कुछ रिपोर्टों में प्रधानमंत्री आवास योजना और VB-G RAM G योजना के फॉर्म लेने और जमा करने को लेकर भी तनातनी की बात सामने आई है। वहीं, बीजेपी के एक अन्य गुट का दावा है कि स्थानीय मेले के आयोजन और उससे जुड़े पैसों के प्रबंधन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि कुछ लोग मेले के नाम पर वसूली करना चाहते थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी दौरान एक महिला बीजेपी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की शिकायत सामने आई। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, महिला पुलिस में शिकायत दर्ज कराने जा रही थी। विधायक शुभाशिस ओम ने कथित तौर पर दोनों गुटों को आपस में मामला सुलझाने की सलाह दी और पुलिस में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराने की अपील की।
विधायक के मुताबिक, इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने दूसरे पक्ष के लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब वह बीच-बचाव करने पहुंचे तो उन पर भी हमला कर दिया गया। उनके सिर और हाथों में चोटें आईं।
जिला अध्यक्ष के करीबियों पर लगाए आरोप
इस घटना के बाद बीजेपी के भीतर गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई। विधायक शुभाशिस ओम ने हमले के लिए बीजेपी के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया। उनके आरोपों का निशाना घाटक (Ghatal) संगठनात्मक जिला अध्यक्ष तन्मय दास के करीबी बताए जा रहे लोग हैं।
दूसरी तरफ, जिला अध्यक्ष तन्मय दास ने विधायक के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायक को वास्तव में पीटा गया या नहीं, यह सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद स्पष्ट होगा।
तन्मय दास ने डुआ क्षेत्रीय कार्यालय, डेबरा थाना और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी का कोई कार्यकर्ता विधायक पर हमले में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल से डिस्चार्ज हुए विधायक, 6 लोगों के नाम शिकायत
हमले के बाद शुभाशिस ओम को पहले डेबरा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें मेदिनीपुर जिला अस्पताल रेफर किए जाने की खबर आई। 3 नवंबर, मंगलवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह सिर पर पट्टी बांधकर घर लौटे।
शिकायत को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। हिंदुस्तान टाइम्स ने पश्चिम मेदिनीपुर के एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि विधायक ने डेबरा थाने में हाथ से लिखी शिकायत देकर छह लोगों के नाम बताए हैं। वहीं, आनंदबाजार पत्रिका की मंगलवार शाम की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया कि उस समय तक थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। इसलिए शिकायत पर पुलिस की आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
नितिन नवीन के बयान के बीच बीजेपी की मुश्किल
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि सोमवार को ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कोलकाता में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल में वसूली की व्यवस्था खत्म कर दी है।
लेकिन उसी दिन पार्टी के एक विधायक पर कथित तौर पर अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किए जाने की घटना सामने आ गई। विधायक का सार्वजनिक रूप से कहना कि उनकी पार्टी का मिशन वसूली खत्म करना है, इस विवाद को और राजनीतिक बना देता है।
राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि यदि पार्टी के दो गुटों के बीच विवाद हुआ है तो संगठन इसकी जांच करेगा। हिंसा हुई है तो पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी।
राजनीतिक विश्लेषण: सत्ता में आने के बाद भी गुटबाजी से जूझ रही बीजेपी?
डेबरा की घटना को केवल दो गुटों के बीच मामूली विवाद मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। इस मामले में तीन महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं।
1. वसूली के आरोप: विधायक खुद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं पर वसूली के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों पर सवाल उठते हैं।
2. संगठन बनाम विधायक: जिला अध्यक्ष और विधायक के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर मतभेद की आशंका बढ़ाई है।
3. सरकार के दावों की परीक्षा: जब पार्टी नेतृत्व राज्य से वसूली खत्म करने का दावा कर रहा है, उसी समय विधायक का अपने ही कार्यकर्ताओं पर ऐसे आरोप लगाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, हमले के आरोपों, कथित वसूली और दोनों गुटों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई से ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।


