अगर TMC और BJP दोनों को नहीं मिला 'बहुमत' तो बंगाल में किसकी होगी सत्ता?

West Bengal Election Results 2026: क्या होगा जब भाजपा और ममता में से दोनों को ही बहुमत न मिले... पढें पूरी खबर

Snigdha Singh
Published on: 2 May 2026 4:42 PM IST
अगर TMC और BJP दोनों को नहीं मिला बहुमत तो बंगाल में किसकी होगी सत्ता?
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West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ हर चाल मायने रखती है और हर सीट सत्ता की सीढ़ी बन सकती है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला सीधा है, लेकिन नतीजा सीधा नहीं होगा।

एक तरफ हैं ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस, जो सत्ता बचाने की जंग में है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी, जिसने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की जमीन पर अपनी पकड़ जमाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। एग्जिट पोल्स बता रहे हैं कि लड़ाई अब विचारधारा से ज्यादा अंकगणित की हो चुकी है।

अधिकांश सर्वे एक ही कहानी सुना रहे हैं,सीटों का खेल 140 से 160 के बीच अटका हुआ है। बहुमत का आंकड़ा 148 और दोनों दल उसके आसपास मंडरा रहे हैं, जैसे दरवाजे के बाहर खड़े मेहमान अंदर आने के लिए बस एक धक्का कम पड़ रहा हो। कुछ सर्वे ABP News के लिए किए गए आंकड़ों में बीजेपी को बढ़त दिखाते हैं, तो कुछ में टीएमसी अभी भी खेल में बराबरी पर खड़ी नजर आती है।

दिलचस्प यह कि Axis My India जैसे बड़े पोलस्टर ने इस बार दूरी बना ली। वजह? मतदाता चुप हैं। और भारतीय राजनीति में जब मतदाता चुप हो जाए, तो समझ लीजिए कि नतीजा बोलने वाला है और ज़ोर से बोलने वाला है।

त्रिशंकु की आहट: सत्ता का गणित या जोड़-तोड़ का खेल?

अगर कोई भी दल 148 पार नहीं कर पाया, तो असली राजनीति शुरू होगी पोस्टर से बाहर और पर्दे के पीछे। राज्यपाल की भूमिका अचानक ‘संवैधानिक’ से ‘रणनीतिक’ हो जाएगी। सबसे बड़ी पार्टी को न्योता मिलेगा, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अपने विरोधियों के दरवाजे खटखटाने पड़ सकते हैं।

बीजेपी अगर सबसे बड़ी पार्टी बनती है, तो उसे निर्दलीयों और छोटे दलों की बैसाखी चाहिए होगी। वहीं टीएमसी, जो अब तक अकेले मैदान में लड़ती आई है, उसे कांग्रेस और वाम दलों की तरफ देखना पड़ सकता है। यानी चुनाव से पहले जो दुश्मन थे, वही चुनाव के बाद ‘लोकतांत्रिक सहयोगी’ बन सकते हैं सियासत का यही सबसे पुराना और कारगर व्यंग है।

यह चुनाव अलग क्यों है?

इस बार बंगाल में मुकाबला बहुकोणीय नहीं, बल्कि सीधा द्वंद्व बन चुका है। छोटे दल हाशिए पर हैं और लड़ाई पूरी तरह दो ध्रुवों के बीच सिमट गई है। 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान यह दिखाता है कि जनता सिर्फ वोट नहीं दे रही, बल्कि फैसला लिख रही है हालांकि वह फैसला अभी सीलबंद है।

जीत किसी की भी हो, खेल सबका है

बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस बारीक रेखा का खेल है, जहाँ 5–10 सीटें सरकार बनाती भी हैं और गिराती भी हैं। फिलहाल तस्वीर धुंधली है, लेकिन इतना तय है जब नतीजे आएंगे, तो या तो कोई साफ जीतेगा या फिर सब मिलकर जीतने की कोशिश करेंगे। और यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे दिलचस्प विडंबना है यहाँ हारने वाला भी सत्ता के करीब होता है।

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Snigdha Singh

Hi! I am Snigdha Singh, Leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

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