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बंगाल की किताबों से ‘अब्बा-अम्मी’ OUT, ‘बाबा-मां’ IN! मुगल इतिहास से लेकर टैगोर तक, क्या-क्या बदलेगा
Bengal School Textbooks: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार की पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने बांग्ला की किताबों में ‘पानी’ की जगह ‘जल’ और ‘अब्बा’ की जगह ‘बाबा’ करने की सिफारिश की है।
Suvendu Adhikari
Bengal School Textbooks: पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को किताबों में सिर्फ नए पाठ ही नहीं, कुछ पुराने शब्दों की जगह नए शब्द भी पढ़ने को मिल सकते हैं। मसलन, किताबों से ‘पानी’ और ‘अब्बा-अम्मी’ जैसे शब्द हटाकर ‘जल’ और ‘बाबा-मां’ को जगह देने का प्रस्ताव है। यानी स्कूलों में भाषा की क्लास से लेकर इतिहास के पाठ तक, बदलाव की नई पटकथा तैयार हो रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की सरकार की ओर से गठित पाठ्यक्रम समीक्षा समिति (Curriculum Review Committee) ने भाषा, इतिहास और साहित्य से जुड़े कई संशोधनों की सिफारिश की है। इनमें हिंदू राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Syama Prasad Mukherjee) के जीवन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ मुगल शासन (Mughal Rule), ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास (British Colonial History) और मार्क्सवादी विचारधारा (Marxist Ideology) से जुड़े कुछ हिस्सों को कम करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
बांग्ला की किताबों में ‘पानी’ नहीं, ‘जल’ पढ़ेंगे बच्चे
पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति के प्रमुख तथा कल्याणी विश्वविद्यालय (University of Kalyani) के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी के मुताबिक, बांग्ला भाषा (Bengali Language) की किताबों में ‘पानी’, ‘अब्बा’ और ‘अम्मी’ जैसे शब्दों को बदलने का फैसला किया गया है। उनकी जगह ‘जल’, ‘बाबा’ और ‘मां’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे। समिति का तर्क है कि बांग्ला में रोजमर्रा की बातचीत के लिहाज से ये शब्द ज्यादा प्रचलित हैं।
समिति का लक्ष्य जनवरी 2027 तक नई पाठ्यपुस्तकों (New Textbooks) का पहला संस्करण तैयार करना है। हालांकि, इन बदलावों को लागू करने के लिए समयसीमा काफी सीमित है। इसी वजह से फिलहाल पाठ्यक्रम (Curriculum) में व्यापक बदलाव के बजाय चुनिंदा संशोधन और गलतियों को सुधारने पर जोर दिया गया है।
कम समय में तैयार होंगी 12 करोड़ से ज्यादा किताबें
देबाशीष चटर्जी ने बताया कि नई किताबें 2 जनवरी तक उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए 12 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन (Book Publication) करना होगा। इतने बड़े स्तर पर किताबें तैयार करने और तय समयसीमा का पालन करने के कारण इस बार पाठ्यक्रम में बड़े फेरबदल करना संभव नहीं था।
समिति के मुताबिक, फिलहाल जरूरी सुधारों और संशोधनों को प्राथमिकता दी गई है। आने वाले समय में पाठ्यक्रम की विषयवस्तु में और बदलाव किए जा सकते हैं। यानी इस बार भाषा और इतिहास के कुछ हिस्सों में बदलाव दिखेंगे, जबकि व्यापक समीक्षा के लिए आगे की प्रक्रिया अहम होगी।
सिनौली और राखीगढ़ी की खोजों से बदलेगा इतिहास का पाठ?
इतिहास की नई किताबों (History Textbooks) में उत्तर प्रदेश के सिनौली (Sinauli) और हरियाणा के राखीगढ़ी (Rakhigarhi) में हुई पुरातात्विक खोजों (Archaeological Discoveries) को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। समिति के प्रमुख का कहना है कि इन स्थलों से मिले निष्कर्षों को आर्यों के भारत आगमन (Aryan Migration Theory) से जुड़े प्रचलित सिद्धांतों के संदर्भ में पढ़ाया जाना चाहिए।
देबाशीष चटर्जी के अनुसार, अब तक विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता रहा है कि आर्य अपने साथ सभ्यता, रथ और घोड़े लेकर भारत आए थे। उनका दावा है कि सिनौली और राखीगढ़ी में हुई खुदाई से सामने आए तथ्य इस धारणा पर सवाल खड़े करते हैं। समिति चाहती है कि इन खोजों को भी इतिहास की किताबों में जगह मिले। हालांकि, इन पुरातात्विक निष्कर्षों की व्याख्या और आर्यों के आगमन से जुड़े सिद्धांतों पर इतिहासकारों के बीच अकादमिक चर्चा का अपना महत्व है।
मुगल इतिहास और मार्क्सवाद से जुड़े पाठों में कटौती
समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इतिहास की किताबों में मुगल शासन (Mughal Rule), ब्रिटिश शासन (British Rule) और मार्क्सवाद (Marxism) से संबंधित कुछ हिस्सों को कम करने की सिफारिश की गई है। दूसरी ओर, साहित्य के पाठ्यक्रम (Literature Syllabus) में रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) की कविता ‘शिवाजी उत्सव’ और द्विजेंद्रलाल रॉय (Dwijendralal Ray) के नाटक ‘मेवाड़ पतन’ को शामिल किया गया है।
वहीं, सिराजुद्दौला (Siraj ud-Daulah) पर आधारित एक नाटक और टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को पाठ्यक्रम से हटाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाने की सिफारिश की गई है। इन बदलावों से साफ है कि नई समीक्षा में भाषा और साहित्य के साथ इतिहास की विषयवस्तु पर भी ध्यान दिया गया है।
सिंगूर आंदोलन और कन्याश्री योजना के पाठ भी हटाने का प्रस्ताव
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान इतिहास की किताबों में सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन (Singur Land Acquisition Protest) से संबंधित अध्याय शामिल किए गए थे। इसके अलावा छात्राओं को आर्थिक सहायता देने वाली कन्याश्री योजना (Kanyashree Scheme) को भी पाठ्यक्रम में जगह मिली थी।
अब समीक्षा समिति की सिफारिशों के तहत इन दोनों विषयों को भी किताबों से हटाने का प्रस्ताव है। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो विद्यार्थियों को राज्य के हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम से जुड़े कुछ पाठ नई किताबों में नहीं मिलेंगे।
स्कूलों में मोबाइल पर रोक और पास-फेल व्यवस्था की वापसी पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 25 अक्टूबर को कहा था कि राज्य सरकार स्कूल शिक्षा व्यवस्था (School Education System) में कई बदलावों पर विचार कर रही है। उस समय उन्होंने बताया था कि सरकार को पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या समीक्षा समिति (Curriculum and Syllabus Review Committee) की अंतिम रिपोर्ट नहीं मिली थी।
अधिकारी ने स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध (Mobile Phone Ban), नो-डिटेंशन नीति (No-Detention Policy) खत्म करने और पास-फेल व्यवस्था (Pass-Fail System) दोबारा लागू करने की संभावनाओं का जिक्र किया था। उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और व्रतचारी कार्यक्रम को सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (Co-curricular Activities) के तौर पर फिर शुरू करने का समर्थन भी किया था।
सरकार की ओर से प्रस्तावित इन बदलावों पर अंतिम फैसला लागू होने वाली नीतियों और आधिकारिक आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पाठ्यक्रम समीक्षा की सिफारिशों के आधार पर पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में भाषा, इतिहास, साहित्य और स्कूल गतिविधियों से जुड़े कई बदलावों की तैयारी है।


