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“मेरे बेटे की हत्या हुई… दोषियों को फांसी दो!”- भरत तिवारी एनकाउंटर पर मां का भावुक और बड़ा बयान
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: भोजपुर एनकाउंटर केस में नया मोड़ आया है। भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने न्यायिक जांच और दोषियों को फांसी की सजा की मांग की है। परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। भरत की मां आशा देवी ने कहा है कि उन्हें जांच के सिलसिले में इन-कैमरा बयान देने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आशा देवी ने कहा कि उनका बेटा समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय था और उसकी मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि अब परिवार को न्यायिक जांच के नतीजों का इंतजार है।
गरीबों की आवाज उठाने का दावा
परिवार के अनुसार, 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी लंबे समय से सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय थे। वे बाढ़ प्रभावित लोगों, नदी कटाव से प्रभावित परिवारों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार आवाज उठाते थे। बताया जाता है कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए थे। परिवार का कहना है कि भरत ने हमेशा जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी और लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
एनकाउंटर को लेकर परिवार के आरोप
भरत तिवारी की मौत 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई थी। परिवार का आरोप है कि पुलिस और एसटीएफ की टीम जब उनके घर पहुंची, तब भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था। परिजनों का कहना है कि इसके बावजूद उनके साथ बल प्रयोग किया गया और बाद में उन्हें गोली मार दी गई। परिवार का दावा है कि घायल अवस्था में भरत को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने न्यायिक जांच और दोषियों को फांसी की सजा की मांग की है।
पुलिस ने क्या कहा?
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी अवैध हथियार के साथ मौजूद थे और पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, जिसके दौरान भरत घायल हुए। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सरकार ने बैठाई न्यायिक जांच
घटना के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। बढ़ते विवाद को देखते हुए बिहार सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसी बीच आशा देवी की शिकायत पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शाहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया है। कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
गांव से लेकर अदालत तक उठ रही न्याय की मांग
भरत तिवारी की मौत के बाद गांव में महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठाई। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का कहना है कि उनका बेटा समाज के लिए काम करता था और उसे न्याय मिलना चाहिए। आशा देवी ने कहा कि वे केवल निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहती हैं। फिलहाल पूरे मामले की नजर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके बाद आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।


