भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, विजय बघेल की याचिका पर अब चलेगा ट्रायल

सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को बड़ा झटका लगा है। पाटन विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली विजय बघेल की याचिका पर अब ट्रायल आगे बढ़ेगा। जानिए अदालत में क्या हुआ।

Alakha Singh
Published on: 3 Nov 2026 7:23 PM IST
भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, विजय बघेल की याचिका पर अब चलेगा ट्रायल
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Bhupesh Baghel News: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई रोकने की कोशिशों को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया कि अब चुनाव याचिका पर ट्रायल आगे बढ़ेगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की ओर से बार-बार उठाई जा रही कानूनी आपत्तियों पर नाराजगी भी जताई।

'आप जितना हो सके ट्रायल में देरी कर रहे हैं'

मंगलवार, 3 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने भूपेश बघेल की नई याचिका खारिज कर दी। बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें चुनाव याचिका की वैधता और समय-सीमा से जुड़े सवालों को पहले प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने से इनकार कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस वी. मोहना ने बघेल के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा विवेक तन्खा से कहा, 'ट्रायल को आगे बढ़ने दीजिए। आप जितना हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। आपको फैसला मिल जाएगा।'

अदालत की टिप्पणी से साफ संकेत मिला कि चुनावी विवाद को बार-बार प्रक्रियागत आपत्तियों के जरिए लंबा खींचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

कपिल सिब्बल की दलील भी नहीं आई काम

भूपेश बघेल की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने यह मानकर गलती की कि मामले में कोई प्रारंभिक मुद्दा विचारणीय नहीं है। उन्होंने अदालत से मांग की कि या तो चुनाव याचिका दाखिल करने की समय-सीमा का सवाल पहले तय किया जाए या फिर यह नहीं कहा जाए कि ऐसा कोई मुद्दा बनता ही नहीं है।

हालांकि, जस्टिस वी. मोहना ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि समय-सीमा का सवाल कानून और तथ्यों, दोनों से जुड़ा है। साथ ही सवाल उठाया कि बघेल ने यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी सवाल किया कि बघेल ने अपनी लिखित दलील में जरूरी आपत्तियां शामिल करने के लिए संशोधन की मांग क्यों नहीं की। उन्होंने टिप्पणी की कि किसी को उन्हें लिखित जवाब में संशोधन करने की सलाह देनी चाहिए थी।

वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। यदि हर आपत्ति पर अलग-अलग सुनवाई शुरू होगी तो मुकदमे की प्रक्रिया और लंबी होती जाएगी।

कपिल सिब्बल ने भरोसा दिलाया कि बघेल अब लिखित जवाब में संशोधन के लिए कोई नया आवेदन दाखिल नहीं करेंगे। पीठ ने वरिष्ठ वकील के आग्रह पर उन पर जुर्माना लगाने से परहेज किया, लेकिन याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

क्या है पूरा विवाद? विजय बघेल ने दी थी चुनाव को चुनौती

दरअसल, यह पूरा मामला 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल की जीत से जुड़ा है। बीजेपी नेता विजय बघेल ने उनकी जीत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी।

चुनाव में भूपेश बघेल को 95,438 वोट मिले थे, जबकि विजय बघेल को 75,715 वोट हासिल हुए थे। इस तरह भूपेश बघेल ने 19,723 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

विजय बघेल का आरोप है कि मतदान से पहले अनिवार्य 48 घंटे की प्रचार प्रतिबंध अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र में जुलूस निकाला और चुनावी नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए भूपेश बघेल का निर्वाचन रद्द करने की मांग की है।

45 दिन की समय-सीमा को लेकर उठाया था सवाल

भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका की वैधता पर सबसे अहम आपत्ति उसकी समय-सीमा को लेकर उठाई गई थी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81 के तहत चुनाव याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर दाखिल करनी होती है।

पाटन सीट का चुनाव परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुआ था। इस हिसाब से याचिका दाखिल करने की अंतिम तारीख 17 जनवरी 2024 थी।

कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि विजय बघेल का हलफनामा 22 जनवरी 2024 का है, यानी निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद का। ऐसे में चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने पहले भी कहा था कि याचिका दाखिल करने की वास्तविक तारीख, रजिस्ट्री की आपत्तियों और दस्तावेजों में सुधार से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी है। केवल हलफनामे की तारीख के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

अब आगे क्या होगा?

3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद पाटन विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की चुनावी जीत को अवैध घोषित नहीं किया है और न ही विजय बघेल के आरोपों को सही ठहराया है। अब पूरे विवाद का फैसला ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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