TRENDING TAGS :
बिहार में 5 बड़े विभागों ने खर्च किए ₹78,812 करोड़, लेकिन हिसाब नहीं; CAG रिपोर्ट से उठे सवाल
CAG की रिपोर्ट में बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठे हैं। मार्च 2025 तक ₹92,132 करोड़ के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट लंबित हैं, जिनमें ₹78,812 करोड़ सिर्फ पांच विभागों से जुड़े हैं। बजट, राजकोषीय घाटे और केंद्र पर निर्भरता का पूरा विश्लेषण पढ़ें।
corruption in bihar
बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक राज्य सरकार 92,132.75 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े 62,632 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) जमा नहीं कर सकी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 78,811.86 करोड़ रुपये (करीब 85.5%) का हिसाब सिर्फ पांच बड़े विभागों के पास लंबित है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सरकार लगातार बड़ा बजट पेश कर रही है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पा रहा। वहीं, खर्च की गई राशि का समय पर लेखा-जोखा भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
क्या होता है यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC)?
सरकारी योजनाओं के लिए जारी धनराशि खर्च होने के बाद संबंधित विभाग को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (Utilisation Certificate) जमा करना होता है। यह प्रमाणित करता है कि आवंटित राशि उसी उद्देश्य के लिए खर्च की गई, जिसके लिए उसे जारी किया गया था। UC लंबित रहने पर खर्च की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।
इन 5 विभागों के पास सबसे ज्यादा लंबित राशि:
| विभाग | लंबित राशि (करोड़ रुपये) |
| ------------------------- | -----------------------: |
| पंचायती राज विभाग | 32,383.08 |
| शिक्षा विभाग | 19,097.00 |
| शहरी विकास एवं आवास विभाग | 17,876.32 |
| ग्रामीण विकास विभाग | 6,418.60 |
| स्वास्थ्य विभाग | 3,036.86 |
इन पांच विभागों के पास ही कुल लंबित राशि का बड़ा हिस्सा अटका हुआ है।
बजट बढ़ा, लेकिन खर्च करने की क्षमता नहीं बढ़ी:
CAG रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार का बजट पिछले पांच वर्षों में लगातार बढ़ा है।
2020-21: 2.45 लाख करोड़ रुपये
2024-25: 3.64 लाख करोड़ रुपये
इसके बावजूद वर्ष 2024-25 में सरकार 3,64,518.87 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के मुकाबले केवल 2,87,178.49 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। यानी 77,340.38 करोड़ रुपये (21.22%) की राशि बिना खर्च किए ही बच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बची हुई राशि में से 66,952 करोड़ रुपये (86.57%) वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले औपचारिक रूप से सरेंडर भी नहीं किए गए। वित्तीय नियमों के अनुसार, अप्रयुक्त राशि समय रहते वापस की जानी चाहिए ताकि उसे अन्य आवश्यक योजनाओं में लगाया जा सके।
राजकोषीय घाटा तय सीमा से ऊपर:
बिहार की वित्तीय स्थिति पर भी CAG ने चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार:
राजकोषीय घाटा: 41,222.50 करोड़ रुपये
GSDP का अनुपात: 4.16%
FRBM अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा: 3.50%
इसका मतलब है कि राज्य का वित्तीय घाटा निर्धारित सीमा से अधिक रहा।
केंद्र पर अब भी भारी निर्भरता:
रिपोर्ट बताती है कि बिहार की अपनी आय अब भी सीमित है।
कुल राजस्व प्राप्तियों का 59.20% हिस्सा केंद्र से मिलने वाले करों पर निर्भर है।
राज्य की अपनी आय कुल राजस्व का केवल 24.50% है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बिहार अभी भी वित्तीय रूप से केंद्र सरकार पर काफी हद तक निर्भर है।
AC बिल भी बड़ी चिंता:
यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट के अलावा एडवांस कंटिजेंसी (AC) बिलों का भी बड़ा बैकलॉग सामने आया है।
19,487 AC बिल लंबित
कुल राशि: 10,361.74 करोड़ रुपये
इनमें से 5,513.69 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय से जुड़े हैं।
CAG ने कहा है कि लंबे समय तक AC बिल लंबित रहने से सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का जोखिम बढ़ जाता है।
राजस्व घाटे में भी पहुंचा बिहार:
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति के बावजूद वर्ष 2024-25 में बिहार 357.38 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे में दर्ज किया गया। इसकी प्रमुख वजह वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में 19.84% की वृद्धि बताई गई है।
CAG रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
मार्च 2025 तक 92,132.75 करोड़ रुपये के UCs लंबित।
78,811.86 करोड़ रुपये सिर्फ पांच विभागों से संबंधित।
77,340 करोड़ रुपये का बजट खर्च नहीं हो सका।
66,952 करोड़ रुपये समय पर सरेंडर नहीं किए गए।
राजकोषीय घाटा 4.16%, जो FRBM सीमा से अधिक है।
19,487 AC बिल और 10,361.74 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा लंबित।
केंद्र पर वित्तीय निर्भरता अब भी 59% से अधिक।


