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"बिहार में 'सिस्टम' की सफाई! विजय सिन्हा से विवाद के बीच सम्राट चौधरी ने छीनी IAS की कुर्सी, ब्यूरोक्रेसी में बड़ा धमाका
Bihar IAS CK Anil transfer: बिहार में राजस्व विभाग की हड़ताल और सत्ता के भीतर बढ़ती खींचतान के बीच वरिष्ठ IAS अधिकारी सी.के. अनिल को अहम विभाग से हटाकर नई जिम्मेदारी दी गई है। सम्राट चौधरी सरकार के इस फैसले ने ब्यूरोक्रेसी और सियासत दोनों में हलचल तेज कर दी है।
Bihar IAS CK Anil transfer: बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक कड़ा फैसला लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। पिछले कई दिनों से बिहार में राजस्व अधिकारियों और अंचल अधिकारियों (CO) की चल रही हड़ताल के बीच सरकार के इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सचिवालय में चर्चा है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सी.के. अनिल को तत्कालीन मंत्री और वर्तमान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के साथ वैचारिक मतभेद रखना भारी पड़ गया, जिसका नतीजा अब उनके तबादले के रूप में सामने आया है।
सम्राट सरकार का एक्शन मोड
बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर जनता के बीच हमेशा से संवेदनशीलता रही है। राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के कारण आम लोगों के दाखिल-खारिज और म्यूटेशन जैसे जरूरी काम पूरी तरह ठप पड़े थे। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री का पद संभालते ही संकेत दे दिए थे कि वे जनता की परेशानी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही भूमि राजस्व विभाग के उन कर्मियों के निलंबन को रद्द करने का निर्देश दिया था, जिन पर पूर्ववर्ती फैसलों के तहत गाज गिरी थी। सी.के. अनिल के तबादले को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि विभाग और कर्मचारियों के बीच के गतिरोध को खत्म कर कामकाज को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
मुख्यधारा से हटाकर मिली नई जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सी.के. अनिल को अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। सरकार ने उन्हें अगले आदेश तक बिहार राज्य योजना परिषद में 'परामर्शी' (Advisory) के पद पर तैनात किया है। प्रशासनिक भाषा में इस तरह के तबादले को मुख्यधारा की पुलिसिंग या पावरफुल विभाग से हटाकर 'साइड पोस्टिंग' के तौर पर देखा जाता है। सरकार का यह त्वरित फैसला साफ संदेश देता है कि जो भी अधिकारी सरकार की नीतियों और जनहित के कार्यों में समन्वय बिठाने में विफल रहेगा, उस पर कार्रवाई तय है।
विजय सिन्हा से 'पंगा' और बदली हुई राजनीतिक बिसात
इस पूरे प्रकरण के पीछे की सबसे दिलचस्प कहानी तत्कालीन मंत्री विजय सिन्हा और सी.के. अनिल के बीच के रिश्तों को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि विभाग के कामकाज और अधिकारियों के निलंबन को लेकर विजय सिन्हा और प्रधान सचिव के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। अब जब सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की जोड़ी सरकार की कमान संभाल रही है, तो प्रशासनिक ढांचे में यह बड़ा बदलाव होना तय माना जा रहा था। इस तबादले ने यह भी साफ कर दिया है कि सम्राट सरकार में मंत्रियों और आला अधिकारियों के बीच तालमेल ही प्राथमिकता होगी।
जनता को राहत की उम्मीद: पटरी पर लौटेगा राजस्व विभाग
राजस्व अधिकारियों और अंचल अधिकारियों की हड़ताल के कारण बिहार के आम नागरिक दर-दर भटकने को मजबूर थे। जमीन का म्यूटेशन न होने से खरीद-बिक्री और बैंक लोन जैसे काम रुके हुए थे। अब प्रधान सचिव के बदले जाने और सरकार के सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अधिकारी अपनी हड़ताल वापस लेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की इस अधिसूचना के बाद अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि राजस्व विभाग का नया मुखिया कौन होगा और वह विभाग में व्याप्त इस भ्रष्टाचार और हड़ताल के संकट को कैसे सुलझाएगा। फिलहाल, सी.के. अनिल की विदाई ने ब्यूरोक्रेसी में हलचल तेज कर दी है।


