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बिहार में फिर से शुरू होगी दारू? मुकेश सहनी के दावे ने मचाया हड़कंप, टूटने वाला है नीतीश का 10 साल पुराना सपना!
Bihar News: बिहार में फिर से शुरू होने वाली है शराब? मुकेश सहनी ने बीजेपी पर लगाया शराबबंदी खत्म करवाकर मोटी कमाई करने का सनसनीखेज आरोप।
Bihar News: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा उबाल आया है जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य में पिछले 10 सालों से लागू शराबबंदी कानून अब केवल एक नियम नहीं, बल्कि राजनेताओं के बीच एक-दूसरे को घेरने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। जहाँ एक तरफ नीतीश सरकार इस कानून को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही सहयोगी पार्टियों और विपक्ष ने इसे 'असफल' बताना शुरू कर दिया है। इसी बीच, 'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से मशहूर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न केवल बिहार बल्कि दिल्ली तक की राजनीति में आग लगा दी है। सहनी के दावे ने इस बहस को एक खौफनाक मोड़ दे दिया है कि आखिर बिहार की शराबबंदी के पीछे का असली खेल क्या है?
बीजेपी पर मुकेश सहनी का सबसे बड़ा और सीधा प्रहार
गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को पटना की धरती से मुकेश सहनी ने मीडिया के सामने जो खुलासे किए, वे किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं। सहनी ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अंदरखाने यह चाह रही है कि बिहार में शराबबंदी खत्म हो जाए और बोतलों का खेल फिर से शुरू हो। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कानून को माताओं-बहनों की सुरक्षा और घर के झगड़ों को खत्म करने के लिए लागू किया गया था, वह आज भ्रष्टाचार का अड्डा कैसे बन गया? सहनी ने कड़े लहजे में पूछा कि अगर सरकार से राज्य नहीं संभल रहा और पुलिस प्रशासन कंट्रोल में नहीं है, तो फिर इस कानून का ढोंग क्यों किया जा रहा है?
चार्टर प्लेन और करोड़ों की मोटी कमाई का 'सीक्रेट'
मुकेश सहनी यहीं नहीं रुके, उन्होंने बीजेपी की नीयत पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी का एकमात्र लक्ष्य बिहार को खोखला करना है। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि बिहार के नेताओं को हर महीने चार्टर प्लेन से पैसा भरकर ऊपर तक पहुंचाना है। सहनी के अनुसार, बीजेपी चाहती है कि शराबबंदी को फिर से चालू किया जाए ताकि इसके जरिए मोटी कमाई की जा सके और राज्य के खजाने को चूना लगाया जा सके। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि पिछले 9-10 सालों में बिहार को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये सालाना का नुकसान हो रहा है, जिसका जवाब अब तक जनता को नहीं मिला है। यह आरोप सीधे तौर पर बीजेपी की व्यापारिक राजनीति की तरफ इशारा करता है।
नीतीश कुमार की 'अस्वस्थता' और बीजेपी का बढ़ता दबदबा
सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का सपना था कि बिहार को महात्मा गांधी के आदर्शों वाला राज्य बनाया जाए, ठीक उसी तरह जैसे गुजरात में शराबबंदी लागू है। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। सहनी के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब अस्वस्थ हैं और इसी का फायदा उठाकर बीजेपी उन पर हावी हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब नेतृत्व कमजोर पड़ता है, तो सहयोगी पार्टियां अपने फायदे के लिए गलत निर्णय थोपने लगती हैं। सहनी ने पूछा कि जिस उद्देश्य के लिए लाखों करोड़ों का राजस्व कुर्बान किया गया, अगर वही पूरा नहीं हो रहा, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
शराबबंदी की समीक्षा या फिर सत्ता का नया समीकरण?
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक द्वारा शराबबंदी की समीक्षा की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब मुकेश सहनी के बयानों के बाद एक नई दिशा में मुड़ गया है। राज्य सरकार भले ही बार-बार कह रही हो कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन सहनी के 'चार्टर प्लेन' वाले बयान ने जनता के मन में संदेह पैदा कर दिया है। क्या वाकई शराबबंदी के नाम पर पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? बिहार की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या राजस्व का नुकसान सहकर भी समाज सुधरा है, या फिर भ्रष्टाचार के नए रास्ते खुल गए हैं? फिलहाल, मुकेश सहनी के इस बम ने बिहार की राजनीति में वो आग लगा दी है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों तक बुझती नजर नहीं आ रही।


