Bihar News: पीके शाही ने छोड़ा महाधिवक्ता का पद, सरकार के लिए करते थे कानूनी पैरवी

Bihar News: बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

Shishumanjali kharwar
Published on: 14 Jun 2026 2:49 PM IST
Prashant Kumar Shahi
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Prashant Kumar Shahi

Bihar News: बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अचानक फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, पीके शाही ने स्वयं संज्ञान लेते हुए अपना त्यागपत्र सौंपा है। पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार का पक्ष मजबूती से रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पीके शाही लंबे समय से राज्य सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में उनका इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि अभी तक उनके पद छोड़ने के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे

पीके शाही का बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ वर्षों पुराना संबंध रहा है। वे राज्य के प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं और राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री, पर्यावरण मंत्री और योजना एवं विकास मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली थी। मंत्री पद से हटने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और दोबारा पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक राज्य सरकार की ओर से अदालत में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की।

2023 में दोबारा बने थे महाधिवक्ता

पीके शाही को 16 जनवरी 2023 को बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति तत्कालीन महाधिवक्ता ललित किशोर के इस्तीफे के बाद हुई थी। नीतीश सरकार ने अपने भरोसेमंद कानूनी सलाहकार के रूप में एक बार फिर पीके शाही पर विश्वास जताया था।महाधिवक्ता के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार का पक्ष रखा और कानूनी रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने कई जटिल कानूनी मामलों में सफलता भी हासिल की।

पहले भी निभा चुके हैं यह जिम्मेदारी

यह पहली बार नहीं था जब पीके शाही को बिहार का महाधिवक्ता बनाया गया था। वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आए थे, तब भी पीके शाही को राज्य का एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया था। उन्होंने 2005 से 2010 तक इस पद पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया। बाद में उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल कर शिक्षा, पर्यावरण और योजना विकास जैसे विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई।वर्ष 2013 में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव भी लड़ा था। हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और कानूनी क्षेत्र में अपनी सेवाएं जारी रखीं।

नए महाधिवक्ता की नियुक्ति को लेकर मंथन

पीके शाही के इस्तीफे के बाद अब बिहार के नए महाधिवक्ता की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, राज्य का विधि विभाग नए एडवोकेट जनरल के चयन के लिए तेजी से काम कर रहा है। संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नए महाधिवक्ता के नाम की घोषणा की जा सकती है। फिलहाल पटना हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है। पीके शाही के इस्तीफे के बाद बिहार की कानूनी और राजनीतिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण पद खाली हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार किस वरिष्ठ अधिवक्ता को नया महाधिवक्ता नियुक्त करती है और आने वाले समय में यह बदलाव बिहार की कानूनी रणनीति को किस तरह प्रभावित करेगा।

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Shishumanjali kharwar

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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